30 मार्च को चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि और सोमवार का दिन है। त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 6 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। दोपहर 2 बजकर 48 मिनट तक मघा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 30 मार्च को सोम प्रदोष व्रत है। साथ ही अनंग त्रयोदशी का व्रत भी किया जायेगा। ब्रह्म मुहूर्त: 05:01 ए एम से 05:47 ए एम अभिजित मुहूर्त: 12:18 पी एम से 01:08 पी एम गोधूलि मुहूर्त: 06:51 पी एम से 07:14 पी एम

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR HIMALAYAUK NEWS & FOUNDER PRESIDENT & SADHAK BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN. CALL US; 9412932030

चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 8 मिनट से होगा। वहीं पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगी। व्रतादि की पूर्णिमा 1 अप्रैल को होगी। पूर्णिमा के चांद की पूजा 1 अप्रैल की रात में की जाएगी इसलिए यह दिन व्रत के लिए शुभ रहेगा। वहीं स्नान-दान की पूर्णिमा 2 अप्रैल को मनाई जाएगी। 1 अप्रैल को चंद्रोदय शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा। इसलिए चंद्रमा की पूजा आप 6 बजकर 6 मिनट से रात्रि 9 बजे तक कर सकते हैं। स्नान-दान 2 अप्रैल को दोपहर 1 बजे तक करना शुभ रहेगा। चैत्र पूर्णिमा हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा है इसलिए इस दिन पूजा, स्नान-दान करने से आपको पूरे वर्ष भर अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इस दिन योग-ध्यान करने से आपको मानसिक शक्ति प्राप्त होती है और आध्यात्मिक पथ पर आप आगे बढ़ते हैं। चैत्र पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करने से कुंडली में चंद्र की स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना भी इस दिन शुभ माना गया है। वहीं चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाता है इसलिए हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और मंत्रों का जप करने से आपके जीवन में सुखद बदलाव आते हैं। चैत्र पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

सोम प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त- 06:38 पी एम से 08:57 पी एम & प्रदोष व्रत को भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। मार्च के महीने में पहला प्रदोष व्रत 16 मार्च के दिन था। वहीं दूसरा प्रदोष व्रत मार्च के अंत में
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। 30 मार्च 2026 को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरू होगी और इसका समापन 31 मार्च को होगा। प्रदोष व्रत में प्रदोष कालीन पूजा (सूर्यास्त के बाद का समय) का महत्व है और प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को ही रहेगी इसलिए 30 मार्च के दिन ही प्रदोष व्रत किया जाएगा। वहीं सोमवार के दिन प्रदोष व्रत है इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
- त्रयोदशी तिथि आरंभ- 30 मार्च 2026 को 07:09 AM पर
- त्रयोदशी तिथि समाप्त- 31 मार्च 2026 को 06:55 AM बजे
- प्रदोष कालीन पूजा का शुभ मुहूर्त – 06:38 PM से 08:57 PM
प्रदोष व्रत को भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को आरोग्य और दार्घायु की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भक्तों की मनोकामनाओं को भी भोलेनाथ पूरा करते हैं। जो लोग आध्यात्मिक क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं उनके लिए भी प्रदोष व्रत शुभ फलदायक होता है। शिव पुराण के अनुसार प्रदोष व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पाप कर्मों से भी आपको मुक्ति मिलती है। पारिवारिक जीवन में खुशियां भी प्रदोष व्रत करने से प्राप्त होती हैं। वहीं जो लोग संतान सुख पाना चाहते हैं उनको भी प्रदोष व्रत करने से संतान की प्राप्ति हो सकती है। आर्थिक लाभ और सौभाग्य की प्राप्ति भी प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजन करने से प्राप्त होती है। +

अप्रैल के महीने में मीन राशि में चतुर्ग्रही योग बनेगा। यह योग 11 अप्रैल को बुध के मीन राशि में प्रवेश के बाद बनने वाला है। सूर्य, मंगल, शनि और बुध इस योग का निर्माण मीन राशि में करेंगे। इस योग के बनने से कुछ राशियों को धन और सेहत को लेकर सतर्क रहना होगा।
सोमवार को प्रदोष व्रत के साथ ही अनंग त्रयोदशी का व्रत भी किया जाएगा। बता दें कि प्रत्येक चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को अनंग त्रयोदशी व्रत करने का विधान है। अनंग त्रयोदशी को प्रेम का दिन माना जाता है। कहते हैं इस व्रत का प्रारंभ सबसे पहले कामदेव और रति ने किया था । अपने दांपत्य जीवन में प्रेम और आपस में तालमेल बनाए रखने के लिए अनंग त्रयोदशी के दिन कामदेव और रति के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। माना जाता है की जो जातक अनंग त्रयोदशी का व्रत करता है, उसके दांपत्य जीवन में खुशियां हमेशा बनी रहती है। प्रदोष व्रत के दिन भी भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना की जाती है। ऐसे में प्रदोष और अनंग त्रयोदशी व्रत के शुभ संयोग में कुछ विशेष उपाय करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
जीवनसाथी का प्यार आपके प्रति कुछ कम हो गया है, तो अपने प्रति जीवनसाथी का प्यार बढ़ाने के लिए सोमवार के दिन आपको कामदेव के मंत्र का 21 बार जप करना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है क्लीं कामदेवाय नमः।
सोमवार सोम प्रदोष के दिन सवा किलो साबुत चावल लें और उनमें से कुछ चावल शिव मंदिर में चढ़ाएं और बाकी चावलों को किसी जरूरतमंद में बांट दें।
सोमवार की सुबह स्नान आदि के बाद शिव मंदिर जाकर सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल चढ़ाएं और धूप दीप आदि से भगवान की पूजा करें। शाम के समय फिर से संभव हो तो स्नान करके साफ कपड़े पहनकर शिव मंदिर जायें। अगर दोबारा स्नान नहीं कर सकते तो केवल हाथपैर धोकर, साफसुथरे कपड़े पहनकर मंदिर में जायें और वहां जाकर ठीक सुबह की तरह धूपदीप आदि से भगवान शंकर की पूजा करें। अगर दोनों समय पूजा करना आपके लिए संभव नहीं है तो केवल शाम के समय शिव पूजा करें और सुबह घर पर ही भगवान का आशीर्वाद ले लें।
अगर मानसिक रूप से शांति प्राप्त के लिए और अपने अन्दर पॉजिटिव ऊर्जा की बढ़ोतरी करना चाहते हैं तो सोमवार को सुबह के समय भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर के आगे आसन बिछाकर बैठ जायें। मूर्ति स्थापना और आसन बिछाते समय इस बात का ध्यान रखें कि आसन पर बैठते समय आपका मुंह पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए और भगवान की प्रतिमा ठीक आपके सामने होनी चाहिए। इस तरह सब अच्छे से व्यवस्थित होने के बाद केवल ‘ऊँ’ शब्द का तेज आवाज़ में गहरी सांस लेकर उच्चारण करें। ऐसा कम से कम 11 बार करना चाहिए।
परिवार के किसी भी सदस्य को कोई पुरानी बीमारी है और आप उससे जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सोमवार के दिन शाम के समय घर में किसी एकांत जगह पर आसन बिछाकर बैठ जायें और महामृत्युंजय मंत्र का 11 बार जाप करें। मंत्र है- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ मंत्र जाप करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपके सामने कोई न आए और जाप के बाद सबसे पहले भगवान शिव के दर्शन करने चाहिए।
सोमवार के दिन आपको स्नान आदि के बाद भगवान शिव और माता पार्वती के साथ ही कामदेव और रति की मूर्ति या तस्वीर पर पुष्प अर्पित करने चाहिए। अगर आपको कामदेव और रति की मूर्ति या तस्वीर न मिले, तो आप उन दोनों का ध्यान करके भगवान शिव और माता पार्वती को ही पुष्प चढ़ा दें।
शत्रुओं को परास्त करना चाहते हैं और मुकदमे में जीत हासिल करना चाहते हैं तो सोमवार के दिन शिवलिंग पर ‘….’ बोलते हुए धतूरा चढ़ाएं।
सोमवार के दिन दूध में थोड़ा सा केसर और कुछ फूल डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। सोमवार के दिन हाथ में जौ का आटा लेकर भगवान शंकर के चरणों में स्पर्श कराकर, बाद मेंउस जौ के आटे की रोटियां बना लें और गाय के बछड़े या बैल को खिला दें। बेल पत्र से भगवान शंकर का पूजन करें। शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाते समय ‘ऊँ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप जरूर करें।
सोमवार के दिन रंगोली वाले पांच अलग अलग रंग लें और शाम के समय शिव मंदिर में जाकर उन रंगों से एक छोटी सी गोल आकृति में रंगोली बनाएं। अब इस रंगोली के बीचो बीच घी का दीपक जलाएं और अपने बिजनेस की बढ़ोतरी के लिए भगवान से प्रार्थना करें।

FOR YR CONTRIBUTION;
सोमवार के दिन शाम के समय शिव जी की प्रतिमा के आगे दीपक जलाकर, आसन बिछाकर पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहिए और संभव हो तो रुद्राक्ष या चंदन की माला से ‘ऊँ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। अगर आपके पास रुद्राक्ष या चन्दन की माला उपलब्ध नहीं है तो करमाला पर गिनकर 108 बार मंत्र का जाप कर लें।