24 अप्रैल 2026 शुक्रवार,  बगलामुखी जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी, धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व, यह जयंती तंत्र-साधकों और भक्तों, दोनों के लिए बेहद खास,  बगलामुखी जयंती एक वरदान की तरह,गुप्त साधना देवी 

24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (शाम 7:22 तक, फिर नवमी) है। इस दिन बगलामुखी जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाएगी। मुख्य नक्षत्र पुष्य (रात 8:15 तक) रहेगा। राहुकाल का समय सुबह 10:41 से 12:19 बजे तक है,  अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:43 तक by Chandra Shekhar Joshi Chief Editor HIMALAYAUK NEWS & Founder President Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob. 9412932030

 बगलामुखी जयंती एक वरदान की तरह ; जीवन में कभी-कभी ऐसी स्थितियां बन जाती हैं, जब हमारे दुश्मन हमें चारों तरफ से घेर लेते हैं या बिना वजह के विवाद पीछा नहीं छोड़ते। ऐसे में बगलामुखी जयंती एक वरदान की तरह आती है। मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है और इन्हें ‘शत्रु नाशिनी’ भी कहते हैं। पूजा करने से न केवल शत्रुओं का नाश होता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, कोर्ट-कचहरी के मामले और मानसिक तनाव भी दूर हो जाते हैं। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में ‘दश महाविद्याओं’ की उत्पत्ति की कथा मिलती है, जिसमें मां बगलामुखी के महत्व को बताया गया है।

पीले रंग का भोग अर्पित किया जाता है। इसमें बेसन के लड्डू, पीले रंग की बर्फी, बूंदी, पीले फल जैसे केला और आम, तथा पीली खिचड़ी आदि शामिल किए जा सकते हैं। भोग अर्पित करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में जरूर बांटना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र में ‘सप्तांक योग’ एक अत्यंत प्रभावशाली और दुर्लभ स्थिति मानी जाती है। खासतौर से तब जब यह शुक्र और शनि के संयोग से बनता है। इस साल 24 अप्रैल को शुक्र और शनि के संयोग से यह विशेष सप्तांक योग बनने जा रहा है। सप्तांक योग तब बनता है जब शुक्र और शनि की युति या दृष्टि संबंध एक विशिष्ट गणितीय कोण पर होता है। 24 अप्रैल 2026 को बनने वाला यह योग कई राशियों के जीवन में बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। इनमें 3 राशियों के लिए सप्तांक योग अत्यंत ही शुभ और लाभकारी रहने वाला है। सप्तांक योग के शुभ प्रभाव से इन 3 राशियों के जीवन में अत्यंत ही महत्वपूर्ण बदलाव होंगे। इन राशि के जातकों को धन का लाभ मिलेगा। इसके साथ करियर में भी आगे बढ़ने के अच्छे अवसर मिलेंगे। 

  • तिथि: अष्टमी (शाम 7:22 तक, फिर नवमी)
  • दिन: शुक्रवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: वैशाख
  • नक्षत्र: पुष्य (रात 8:15 तक)
  • योग: धृति योग (सुबह 7:42 तक, फिर शूल योग)
  • सूर्योदय: 05:47 AM
  • सूर्यास्त: 06:52 PM
  • चंद्रोदय: 12:05 PM
  • राहुकाल: 10:41 AM से 12:19 PM

 24 अप्रैल को वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और शुक्रवार का दिन है। अष्टमी तिथि शुक्रवार शाम 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। 24 अप्रैल को रात 8 बजकर 15 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा शुक्रवार को श्री बगलामुखी जयंती है। साथ ही 24 अप्रैल को दुर्गाष्टमी का व्रत भी किया जाएगा। 

  • वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि-24 अप्रैल 2026 को शाम 7 बजकर 22 मिनट तक
  • पुष्य नक्षत्र- 24 अप्रैल 2026 को रात 8 बजकर 15 मिनट तक
  • रवि योग-  24 अप्रैल 2026 को रात 8 बजकर 14 मिनट से 25 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 14 मिनट तक
  • 24 अप्रैल 2026 व्रत-त्यौहार- बगलामुखी जयंती, दुर्गाष्टमी व्रत
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:45 ए एम से 05:30 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:11 पी एम से 01:02 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:44 पी एम से 03:35 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:57 पी एम से 07:20 पी एम
  • अमृत काल – 02:01 पी एम से 03:35 पी एम
  • सूर्योदय-सुबह 5:46 AM
  • सूर्यास्त- शाम 6:51 PM

वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को देवी बगलामुखी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। देवी बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं। इनकी उत्पत्ति सौराष्ट्र के हरिद्रा नामक सरोवर से मानी जाती है और इन्हें पीताम्बरा के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल पीताम्बरा का अर्थ होता है पीले हैं वस्त्र जिसके, यानि जिसने पीले वस्त्र धारण किये हों और देवी बगलामुखी को पीला रंग बहुत ही प्रिय है। देवी मां पीले रंग के वस्त्र धारण करती हैं और इनकी पूजा करने वाले व्यक्ति को भी कोशिश करके पीले रंग के ही वस्त्र धारण करने चाहिए। साथ ही देवी मां की पूजा में अधिक से अधिक पीले रंग की चीज़ों का ही इस्तेमाल किया जाता है। मां बगलामुखी को शत्रुनाश की देवी भी कहा जाता है। इनकी नजरों से कोई शत्रु नहीं बच सकता। आज का दिन मां बगलामुखी की उपासना के लिए बहुत ही श्रेष्ठ है।

वैदिक ज्योतिष में पंचांग को समय का प्रतिनिधि माना जाता है। जहाँ आधुनिक युग में लोग समय जानने के लिए कैलेंडर और घड़ी का सहारा लेते हैं, वहीं हिंदू धर्म के अनुयायी समय की गणना और शुभ-अशुभ मुहूर्त जानने के लिए पंचांग का प्रयोग करते हैं। पंचांग के माध्यम से केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि दिनभर के सभी शुभ और अशुभ मुहूर्तों का भी विवरण प्राप्त होता है।

पंचांग के पांच प्रमुख अंग होते हैं:

  • तिथि
  • नक्षत्र
  • योग
  • करण
  • वार (सप्ताह का दिन)
  • राहु काल
  • शुभ मुहूर्त

उपाय 

शत्रुओं को शांत करने के लिए: स्नान के बाद पीले सरसों के दानों (पीली सरसों) से हवन करें। यह दुश्मनों को शांत करने का सबसे प्रभावी और सरल तरीका माना जाता है।

कोर्ट केस में जीत के लिए: अगर आप किसी कानूनी विवाद में फंसे हैं, तो इस दिन बगलामुखी कवच का पाठ करें। इससे बड़े से बड़े विरोधी भी आपके सामने झुक सकते हैं।

अच्छी सेहत के लिए: अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, तो शहद, घी और शक्कर के साथ दूब (दुर्वा), गुरुच और लावा मिलाकर हवन करें।

पारिवारिक क्लेश दूर करने के लिए: घर की कोई भी महिला अपने ही घर की थोड़ी सी धूल लेकर उसे कत्थई रंग के कपड़े में बांधे और फिर उसे सुनसान जगह पर मिट्टी में दबा दें।

बिजनेस में तरक्की के लिए: अगर पार्टनर से अनबन है या घाटा हो रहा है, तो सफेद फूलों का एक गमला मंदिर में दान करें और वैसा ही एक दूसरा गमला अपने बिजनेस पार्टनर को तोहफे में दें।

मानसिक शांति के लिए: पके हुए बासमती चावल में पिसी चीनी मिलाकर सफेद गाय को खिलाएं और गौ माता का आशीर्वाद लें।

प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकलने के लिए: इस दिन अपने भांजे या भतीजे को नए कपड़े उपहार में दें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए: पति-पत्नी के बीच तनाव है तो माता का ध्यान करें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

बगलामुखी तंत्र-मंत्र यानी गुप्त साधना की देवी 

हिंदू धर्म में मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से आठवीं विद्या माना गया है। इन्हें ‘पीतांबरा’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इन्हें पीला रंग बहुत प्रिय है। मां बगलामुखी तंत्र-मंत्र यानी गुप्त साधना की देवी माना जाता है, जो व्यक्ति की गुप्त शत्रुओं से रक्षा करती हैं। साथ ही सुख-शांति का वरदान मिलता है। अगर आप जीवन में कई तरह की मुश्किलों से घिरे हुए हैं, तो मां बगलामुखी की पूजा के दौरान उनके 108 नामों का जप करें। इससे माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मां बगलामुखी के 108 नाम।।

  • ॐ बगलायै नमः
  • ॐ विष्णुवनितायै नमः
  • ॐ विष्णुशङ्करभामिन्यै नमः
  • ॐ बहुलायै नमः
  • ॐ वेदमात्रे नमः
  • ॐ महाविष्णुप्रस्वै नमः
  • ॐ महामत्स्यायै नमः
  • ॐ महाकूर्मायै नमः
  • ॐ महावाराहरूपिण्यै नमः
  • ॐ नरसिंहप्रियायै नमः
  • ॐ रम्यायै नमः
  • ॐ वामनायै नमः
  • ॐ बटुरूपिण्यै नमः
  • ॐ जामदग्न्यस्वरूपायै नमः
  • ॐ रामायै नमः
  • ॐ रामप्रपूजितायै नमः
  • ॐ कृष्णायै नमः
  • ॐ कपर्दिन्यै नमः
  • ॐ कृत्यायै नमः
  • ॐ कलहायै नमः
  • ॐ कलकारिण्यै नमः
  • ॐ बुद्धिरूपायै नमः
  • ॐ बुद्धभार्यायै नमः
  • ॐ बौद्धपाखण्डखण्डिन्यै नमः
  • ॐ कल्किरूपायै नमः
  • ॐ कलिहरायै नमः
  • ॐ कलिदुर्गतिनाशिन्यै नमः
  • ॐ कोटिसूर्यप्रतीकाशायै नमः
  • ॐ कोटिकन्दर्पमोहिन्यै नमः
  • ॐ केवलायै नमः
  • ॐ कठिनायै नमः
  • ॐ काल्यै नमः
  • ॐ कलायै नमः
  • ॐ कैवल्यदायिन्यै नमः
  • ॐ केशव्यै नमः
  • ॐ केशवाराध्यायै नमः
  • ॐ किशोर्यै नमः
  • ॐ केशवस्तुतायै नमः
  • ॐ रूद्ररूपायै नमः
  • ॐ रूद्रमूर्त्यै नमः
  • ॐ रूद्राण्यै नमः
  • ॐ रूद्रदेवतायै नमः
  • ॐ नक्षत्ररूपायै नमः
  • ॐ नक्षत्रायै नमः
  • ॐ नक्षत्रेशप्रपूजितायै नमः
  • ॐ नक्षत्रेशप्रियायै नमः
  • ॐ नित्यायै नमः
  • ॐ नक्षत्रपतिवन्दितायै नमः
  • ॐ नागिन्यै नमः
  • ॐ नागजनन्यै नमः
  • ॐ नागराजप्रवन्दितायै नमः
  • ॐ नागेश्वर्यै नमः
  • ॐ नागकन्यायै नमः
  • ॐ नागर्यै नमः
  • ॐ नगात्मजायै नमः
  • ॐ नगाधिराजतनयायै नमः
  • ॐ नगराजप्रपूजितायै नमः
  • ॐ नवीननीरदायै नमः
  • ॐ पीतायै नमः
  • ॐ श्यामायै नमः
  • ॐ सौन्दर्यकारिण्यै नमः
  • ॐ रक्तायै नमः
  • ॐ नीलायै नमः
  • ॐ घनायै नमः
  • ॐ शुभ्रायै नमः
  • ॐ श्वेतायै नमः
  • ॐ सौभाग्यदायिन्यै नमः
  • ॐ सुन्दर्यै नमः
  • ॐ सौभगायै नमः
  • ॐ सौम्यायै नमः
  • ॐ स्वर्णभायै नमः
  • ॐ स्वर्गतिप्रदायै नमः
  • ॐ रिपुत्रासकर्यै नमः
  • ॐ रेखायै नमः
  • ॐ शत्रुसंहारकारिण्यै नमः
  • ॐ भामिन्यै नमः
  • ॐ मायायै नमः
  • ॐ स्तम्भिन्यै नमः
  • ॐ मोहिन्यै नमः
  • ॐ शुभायै नमः
  • ॐ रागद्वेषकर्यै नमः
  • ॐ रात्र्यै नमः
  • ॐ रौरवध्वंसकारिणयै नमः
  • ॐ यक्षिण्यै नमः
  • ॐ सिद्धनिवहायै नमः
  • ॐ सिद्धेशायै नमः
  • ॐ सिद्धिरूपिण्यै नमः
  • ॐ लङ्कापतिध्वंसकर्यै नमः
  • ॐ लङ्केशरिपुवन्दितायै नमः
  • ॐ लङ्कानाथकुलहरायै नमः
  • ॐ महारावणहारिण्यै नमः
  • ॐ देवदानवसिद्धोघपूजितायै नमः
  • ॐ परमेश्वर्यै नमः
  • ॐ पराणुरूपायै नमः
  • ॐ परमायै नमः
  • ॐ परतन्त्रविनाशिन्यै नमः
  • ॐ वरदायै नमः
  • ॐ वरदाराध्यायै नमः
  • ॐ वरदानपरायणायै नमः
  • ॐ वरदेशप्रियायै नमः
  • ॐ वीरायै नमः
  • ॐ वीरभूषणभूषितायै नमः
  • ॐ वसुदायै नमः
  • ॐ बहुदायै नमः
  • ॐ वाण्यै नमः
  • ॐ ब्रह्मरूपायै नमः
  • ॐ वराननायै नमः
  • ॐ बलदायै नमः।

 मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं और उन्हें शत्रु नाशक, विजय प्रदायिनी तथा नकारात्मक ऊर्जा का विनाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। इस दिन  मां की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है,

मां बगलामुखी को पीताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग बहुत प्रिय है। वे शक्ति और तेज का स्वरूप हैं और अपने भक्तों को हर तरह की बाधाओं और संकटों से रक्षा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि मां बगलामुखी की उपासना से वाक् सिद्धि प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति अपने शब्दों से दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

कानूनी मामलों, वाद-विवादों और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए मां बगलामुखी की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। बगलामुखी चालीसा का पाठ करें। इस दिन मां बगलामुखी की कथा का पाठ भी जरूर करना चाहिए। पूजा का समापन आरती से करें। तामसिक चीजों से परहेज करें।

by Chandra Shekhar Joshi Chief Editor HIMALAYAUK NEWS & Founder President Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob. 9412932030

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