13 जून 26: मासिक शिवरात्रि , बेहद शुभ संयोग & कालसर्प योग, ग्रहों की बड़ी हलचल, बदलेगा किस्मत का खेल, ग्रह की ऊर्जा , शनिवार और शिव चतुर्दशी का महासंयोग , शाम को शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर

13 जून, शनिवार को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि & 13 जून 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से काफी खास रहने वाला है। इस दिन चंद्रमा का गोचर कृतिका नक्षत्र में रहेगा और वृषभ राशि में स्थित होकर सूर्य के साथ युति बनाएंगे। खास बात यह है कि, चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में होने के कारण गौरी योग का निर्माण कर रहे हैं, जिससे दिन का प्रभाव और शुभ माना जा रहा है। ग्रहों की यह स्थिति कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।  BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & BAGLA MUKHI PEETH DDUN Mob. 9412932030

शनिवार और शिव चतुर्दशी का महासंयोग : शाम को शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर काले तिल और जल अर्पित करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें। इस उपाय से शनि देव और भोलेनाथ दोनों प्रसन्न होते हैं और जीवन के समस्त कष्टों का निवारण करते हैं

मासिक शिवरात्रि शिव जी की पूजा को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन महादेव की पूजा-अर्चना करने से कुंडली में चंद्र दोष दूर होता है। साथ ही राहु-केतु के बुरे प्रभाव, शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से भी राहत मिलती है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से अविवाहितों के विवाह का शीघ्र योग बनता है और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। 

 हिंदू पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। शिव चतुर्दशी व्रत भी आज रखा जाने के कारण यह दिन भगवान शिव और न्याय के देवता शनि देव की कृपा पाने के लिए परम फलदायी माना जाता है। 

 17 जून 2026, बुधवार को सुबह 08 बजकर 12 मिनट पर चंद्रमा कर्क राशि में गोचर करेंगे। यहां गुरु पहले से ही विराजमान हैं। गुरु और चंद्रमा की यह युति गजकेसरी राजयोग का निर्माण करेगी। इस शुभ संयोग का प्रभाव इन राशियों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। आइए इनके बारे में जानते हैं।

राहु और केतु : ये दोनों ग्रह व्यक्ति के जीवन में अचानक होने वाले बदलाव, भ्रम, मानसिक तनाव के कारक माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भी राहु-केतु अपनी राशि बदलते हैं, तो इसका प्रभाव सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में पड़ता है। विशेष बात यह है कि, राहु और केतु लगभग 18 महीने तक एक ही राशि में स्थित रहते हैं, इसलिए इनका गोचर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान समय में राहु कुंभ राशि में विराजमान हैं और 5 दिसंबर 2026 को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं केतु, जो अभी सिंह राशि में स्थित हैं, वह 5 दिसंबर 2026 को चंद्रमा की राशि कर्क में गोचर करेंगे। हालांकि, राहु-केतु के गोचर करने से पहले दिसंबर तक कई चुनौतियों को झेलना पड़ सकता है। साथ ही मानसिक तनाव बढ़ने की अधिक संभावनाएं हैं।

कालसर्प योग  जून 2026 में ग्रहों की विशेष चाल के कारण यह योग 9 जून से सक्रिय हो चुका है और 20 जून तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित हैं, जिससे कई राशियों के जीवन में उतार-चढ़ाव, निर्णय लेने में भ्रम, कार्यों में बाधाएं और मानसिक तनाव जैसी स्थितियां बन सकती हैं।

ग्रहों के सेनापति मंगल 16 जून 2026 को कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। मंगल इस नक्षत्र में लगभग 20 दिनों तक विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव हैं और सूर्य व मंगल के बीच मित्रता का संबंध माना जाता है। ऐसे में यह गोचर कुछ राशियों को साहस, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की शक्ति में सकारात्मक परिवर्तन लेकर आ सकता है।

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन और उनकी अन्य ग्रहों के साथ बनने वाली युतियां बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यह संयोग जून के मध्य में बनने जा रहा है, जो बेहद प्रभावशाली रहेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक, जून माह के मध्य में कई बड़े ग्रह गोचर होने जा रहे हैं, जिनका प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर देखने को मिल सकता है। इस दौरान सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, बुध कर्क राशि में गोचर करेंगे और मंगल वृषभ राशि में अपना स्थान लेंगे। इस दौरान बुधादित्य और शुक्रादित्य योग का निर्माण भी होगा। ऐसे में ग्रहों की यह बदलती चाल कुछ राशियों के लिए उन्नति, धन लाभ और सफलता लेकर आ सकती हैं, 

 वक्री अवस्था में ग्रह अपनी ऊर्जा को अलग ढंग से प्रभावित करते हैं, :  न्याय के कारक शनि 27 जुलाई 2026 से मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं। इसके बाद 11 दिसंबर 2026 को वह इसी राशि में मार्गी होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की वक्री चाल कई राशियों के लिए चुनौतियां लेकर आ सकती हैं। दरअसल, वक्री अवस्था में ग्रह अपनी ऊर्जा को अलग ढंग से प्रभावित करते हैं, जिसके कारण कार्यों में देरी, मानसिक दबाव और अपेक्षित परिणाम मिलने में कई बाधाएं आने लगती हैं। चूंकि शनि कर्म और अनुशासन के कारक ग्रह हैं, इसलिए इस अवधि में लोगों को सफलता पाने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।

अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि और शनिवार का दिन है। त्रयोदशी तिथि 13 जून को शाम 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। कल शाम 5 बजकर 29 मिनट तक सुकर्मा योग रहेगा। साथ ही कल देर रात 1 बजकर 17 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 13 जून को मास शिवरात्रि व्रत है। 

  • अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि- 13 जून को शाम 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगी
  • सुकर्मा योग- 13 जून को शाम 5 बजकर 29 मिनट तक
  • कृतिका नक्षत्र- 13 जून को देर रात 1 बजकर 17 मिनट तक
  • 13 जून 2026 विशेष- मासिक शिवरात्रि व्रत

13 जून 2026 शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:02 ए एम से 04:43 ए एम तक
  • प्रातः सन्ध्या: 04:22 ए एम से 05:23 ए एम तक
  • अभिजित मुहूर्त: 11:53 ए एम से 12:49 पी एम तक
  • विजय मुहूर्त: 02:41 पी एम से 03:37 पी एम तक
  • गोधूलि मुहूर्त: 07:18 पी एम से 07:39 पी एम तक
  • अमृत काल: 11:09 पी एम से 14 जून ka 12:34 ए एम तक 
  • सूर्योदय- सुबह 05:23 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 07:20 बजे

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