लाइलाज बीमारियों के प्राकृतिक इलाज में माहिर :

औषधीय जड़ी-बूटियों की मदद से लाइलाज बीमारियों के प्राकृतिक इलाज में माहिर : चन्द्रशेखर जोशी मुख्य संपादक हिमालयायूके न्यूज की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

जंगल की जड़ी-बूटियों से लोगों का इलाज करने वाली पद्म श्री यानुंग जामोह लेगो

उनका जन्म 9 जुलाई, 1963 (उम्र 62 वर्ष) सिका टोडके गांव, पूर्वी सियांग जिला , अरुणाचल प्रदेश भारत की निवासी है

यानुंग जामोह लेगो (Yanung Jamoh Lego) अरुणाचल प्रदेश की एक प्रसिद्ध हर्बलिस्ट और पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ हैं। आदि जनजाति से ताल्लुक रखने वालीं, उन्हें जड़ी-बूटियों के ज्ञान के माध्यम से मधुमेह और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को ठीक करने के लिए जाना जाता है। चिकित्सा और समाज सेवा में उनके योगदान के लिए उन्हें 2024 में ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था।

उन्हें “आदि क्वीन ऑफ हर्ब्स” भी कहा जाता है। आधुनिक चिकित्सा से निराश हुए हजारों मरीजों को उन्होंने अपनी हर्बल थेरेपी से नया जीवन दिया, जड़ी-बूटियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए उन्होंने 2009 में ‘इंडिजिनस हर्बल हेरिटेज’ (Indigenous Herbal Heritage) नाम की संस्था की शुरुआत की।

अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के सिका टोडे (Sika Tode) गांव से ताल्लुक रखने वाली एक प्रसिद्ध हर्बलिस्ट और पारंपरिक चिकित्सक हैं. उन्हें ‘जड़ी-बूटियों की रानी’ भी कहा जाता है. यानुंग जमोह लेगो को साल 2024 में राष्ट्रपति द्वारा पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यानुंग जमोह लेगो ने अपने अनुभव और ज्ञान के दम पर पिछले 29 वर्षों में लगभग 3 लाख से ज्यादा मरीजों की मदद की है. वह अपनी संस्कृति और पारंपरिक औषधीय ज्ञान को बचाने और आगे बढ़ाने का भी काम कर रही हैं.

पद्म श्री से सम्मानित होने से पहले भी यानुंग जमोह लेगो को सृष्टि सम्मान (2007), पारंपरिक वैद्य रत्न (2013) और अरुणाचल स्टेट अवॉर्ड (2019) जैसे कई सम्मान मिल चुके हैं.

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