अशुभ 1 अगस्त 2026 (शनिवार) ‘षडाष्टक योग’ का निर्माण , शुक्र ग्रह कन्या राशि में प्रवेश

1 अगस्त 2026 (शनिवार) के पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रात 11:07 तक रहेगी, तत्पश्चात चतुर्थी तिथि आरंभ होगी। आज का मुख्य नक्षत्र शतभिषा रात 08:45 तक है, और योग शोभन रात्रि 11:23 तक रहेगा

श्री हनुमान चालीसा का पाठ करना और हनुमानजी को सिंदूर लगाना शुभ रहेगा। दवी काली का ध्यान करें और- ओम ऐं ह्रीं क्लीं कालीकायै नमः मंत्र का जप करें। भगवान श्रीगणेशजी का पूजन करें, गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। किसी जरूरतमंद को चावल का दान देना शुभ रहेगा। श्रीहरि स्तोत्र का पाठ आपके लिए लाभदायक होगा।

1 अगस्त 2026 को शुक्र गोचर और षडाष्टक योग के प्रभाव से बचने के लिए शिव-शनिवार का विशेष उपाय करें, जिसमें शिवलिंग पर सरसों का तेल व काले तिल चढ़ाना, शिवलिंग पर थोड़ा सा सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें। महादेव और शनिदेव के मंत्रों का ध्यान व श्रवण करें।
 1 अगस्त है और दिन है शनिवार और दिन के स्वामी शनिदेव गुरु की राशि मीन में वक्री गति से चल रहे हैं जबकि नक्षत्र स्वामी चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र पर संचार करते हुए राहु से युति बना रहे हैं जिससे कई राशियों को तकनीकी ज्ञान का लाभ मिलेगा जबकि कुछ लोगों को मानसिक उलझन से परेशानी होगी। साथ ही कल शुक्र का गोचर कन्या राशि में होगा जो उनकी नीच राशि है। ऐसे में कल का दिन वृषभ, मिथुन और तुला समेत कई राशियों के लिए बहुत ही भाग्यशाली रहेगा।

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की इस तिथि को भगवान शिव और विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। आज शाम के समय गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी किया जाएगा।

1 अगस्त 2026 का दिन नए महीने की शुरुआत के साथ पंचांग की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण संकेत लेकर आया है। आज कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है और शनिवार का दिन कर्म, अनुशासन तथा धैर्य का प्रतीक माना जाता है। 

आज कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रात्रि 11:08 PM तक रहेगी। तृतीया तिथि को धैर्य, संतुलित निर्णय और नियमित कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त माना जाता है। अधूरे कार्यों को पूरा करने और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत के लिए भी यह तिथि अनुकूल मानी जाती है।

 01 अगस्त 2026, दिन: शनिवार तिथि- तृतीया (रात 11:07 बजे तक), इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ

आज शनिवार है, जो शनि देव से संबंधित माना जाता है। यह दिन अनुशासन, मेहनत, जिम्मेदारी और कर्म के महत्व की याद दिलाता है। अपने कार्यों में धैर्य और निरंतरता बनाए रखना आज विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। सुबह 10:53 बजे से लेकर रात 11:07 बजे तक भद्रा (विष्टि करण) का साया रहेगा। भद्रा काल में शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत नहीं की जाती है। अतः कोई भी नया कार्य या तो सुबह 10:53 से पहले करें या फिर रात को भद्रा समाप्त होने के बाद संपन्न करें।

ज्योतिष गणना के अनुसार, शुक्र 1 अगस्त 2026 को कन्या राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इस राशि के स्वामी बुध हैं और बुध-शुक्र के बीच मित्रता का भाव माना गया है। यही कारण है कि, शुक्र का यह राशि परिवर्तन कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ साबित हो सकता है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को वैभव, सुख-सौभाग्य, ऐश्वर्य और विलासिता का कारक ग्रह कहते है। मान्यता है कि, वह जब भी गोचर करते हैं, तो 12 राशियों पर इसका असर पड़ता है। 

कन्या राशि में शुक्र का यह गोचर बेहद खास और संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इस समय राहु ग्रह कुंभ राशि में विराजमान हैं. ऐसे में कन्या राशि के शुक्र और कुंभ राशि के राहु आपस में षडाष्टक योग का निर्माण करेंगे. वैदिक ज्योतिष में षडाष्टक योग को अत्यंत अशुभ और कष्टकारी योगों में गिना जाता है. कुछ राशि के जातकों को स्वास्थ्य, आर्थिक मामलों और रिश्तों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

जब दो ग्रह एक-दूसरे से छठवें और आठवें भाव में स्थित होते हैं, तो इसे ज्योतिष में षडाष्टक योग कहा जाता है. छठवां भाव रोग, ऋण और शत्रु का प्रतीक है, जबकि आठवां भाव आयु, संकट, मानसिक तनाव और अचानक आने वाली बाधाओं को दर्शाता है. शुक्र और राहु, दोनों का यह संबंध भौतिक सुख-सुविधाओं में कमी, भ्रम, और अचानक धन हानि के योग बनाता है.

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