03, 04 जुलाई जुलाई 2025 का पंचांग ; आषाढ़ गुप्त नवरात्रि गुप्त नवरात्रि ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिव्हा कीलय, बुद्धिं विनाश्य ह्लीं ॐ स्वाहा: CS JOSHI EDITOR MOB. 9412932030
गुप्त नवरात्रि यह समय आत्मिक शक्तियों को जागृत करने के लिए श्रेष्ठ
आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि 26 जून से प्रारंभ होकर 4 जुलाई तक रहेगी। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है

नवरात्रि के 9 दिन बेहद पवित्र होते हैं. गुप्त नवरात्रि के 9 दिन तंत्र-मंत्र साधना और 10 महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए विशेष होते हैं. अभी आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही हैं. जो कि 26 जून से प्रारंभ हुई हैं और 4 जुलाई तक चलेंगी. इस बीच 3 जुलाई को गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि है. नवरात्रि की अष्टमी तिथि मां दुर्गा को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने का खास दिन होता है. इस अष्टमी को कुछ खास काम कर लें, जो आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं.

Gupt Navratri 2025: नवरात्रि में राशि अनुसार करें इन चीजों का दान, जगतजननी की कृपा से हर इच्छा होगी पूरी

कोई मनोकामना है तो अष्टमी के दिन मां दुर्गा को पूजा में लौंग का जोड़ा या नारियल का जोड़ा अर्पित करें. ऐसा करने से जल्द ही आपकी मनोकामना पूरी होने के योग बनेंगे.
आषाढ़ और माघ महीने में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। साथ ही व्रत रखा जाता है। इस बार 26 जून 2025 से लेकर 4 जुलाई 2025 तक आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में सच्चे मन से दान करते हैं, उन्हें मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही घर में खुशियों का आगमन होता है। चलिए जानते हैं आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में किन-किन चीजों का दान करना शुभ रहता है।
लाल रंग के फलों, पीले रंग की मिठाई का दान , हरी मूंग की दाल का दान, दूध का दान लाल रंग के कपड़ों का दान करना हरी सब्जियों का दान मौसमी फलों का दान लाल रंग की वस्तुओं का दान पीले रंग की वस्तुओं का दान काले रंग की वस्तुओं का दान नीले रंग के कपड़ों का दान & आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में मीन राशिवालों के लिए पीले रंग की मिठाई का दान करना शुभ रहेगा। इससे आपको पुण्य और मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलेगा।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि 3 जुलाई 2025, वार गुरुवार नवमी तिथि की पूजा 4 जुलाई 2025, वार शुक्रवार
पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि 3 जुलाई 2025, वार गुरुवार को मनाई जाएगी। जबकि नवमी तिथि की पूजा 4 जुलाई 2025, वार शुक्रवार को होगी। इन दोनों दिन मां दुर्गा की पूजा करने के साथ-साथ व्रत भी रखा जाता है। पूजा-पाठ के अलावा कुछ लोग अष्टमी व नवमी तिथि पर कन्या पूजन भी करते हैं।
03 जुलाई 2025 का पंचांग
- सूर्योदय- प्रात: काल 05:28 मिनट पर
- चन्द्रोदय- दोपहर 12:54 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: काल में 04:07 से लेकर 04:47 मिनट तक
- अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:58 से लेकर दोपहर 12:53 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम में 07:22 से लेकर 07:42 मिनट तक
- अमृत काल- प्रात: काल 07:09 से लेकर सुबह 08:56 मिनट तक
- राहुकाल- दोपहर में 02:10 से लेकर 03:54 मिनट तक
- गुलिक काल- सुबह में 08:57 से लेकर 10:41 मिनट तक
04 जुलाई 2025 का पंचांग
- सूर्योदय- प्रात: काल 05:28 मिनट पर
- चन्द्रोदय- दोपहर 01:47 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: काल में 04:07 से लेकर 04:48 मिनट तक
- अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:58 से लेकर दोपहर 12:53 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम में 07:22 से लेकर 07:42 मिनट तक
- अमृत काल- सुबह में 09:38 से लेकर 11:26 मिनट तक
- राहुकाल- सुबह 10:41 से लेकर दोपहर 12:26 मिनट तक
- गुलिक काल- प्रात: काल 07:12 से लेकर सुबह 08:57 मिनट तक
अष्टमी और नवमी की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनें।
- मां दुर्गा का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
- मां दुर्गा को लाल वस्त्र, फल, फूल, मिठाई और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। इस दौरान मां दुर्गा को समर्पित मंत्रों का जाप करें।
- दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- संभव हो तो घर में हवन कराएं।
- देवी दुर्गा की आरती करें और परिवारवालों को प्रसाद बांटे।
- नौ कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें उपहार दें।
- कन्या पूजन करने के बाद घट विसर्जन (कलश विसर्जन) करें।
नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि के दिन हवन के बाद कन्या पूजन जरूर करें. कन्याओं को हलवा, पूरी आदि का सम्मानपूर्वक भोजन कराएं. भोजन के बाद उन्हें उपहार दें, पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें. ऐसा करने से देवी दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है.
गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याएँ:
- माँ काली
- ता
- त्रिपुर भैरवी
- छिन्नमस्ता
- धूमावती
- त्रिपुर सुंदरी (षोडशी)
- बगलामुखी
- मातंगी
- कमला
- भँवरी