9 September 2025 ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 ए एम से 05:38 ए एम तक & अभिजित मुहूर्त: 12:11 पी एम से 01:00 पी एम तक & गोधूलि मुहूर्त: 06:46 पी एम से 07:09 पी एम तक & पितृपक्ष में मंगलवार के दिन जरूर करें ये 4 काम, पितरों के साथ बजरंगबली भी बरसाएंगे कृपा & पितृपक्ष में हनुमान चालीसा पढ़ने से पितृदोष से आप मुक्ति पाते हैं। बंदरों को गुड़ और चना देना चाहिए। ऐसा करने से भी पितृ और हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। यह उपाय आपके जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला साबित होता है। & पितृपक्ष के मंगलवार को चमेली का तेल और सिंदूर भी आप हनुमान जी को अवश्य अर्पित करें। & पितृपक्ष के मंगलवार को दान करने से भी आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन आप उड़द की दाल, तिल आदि का दान करके पितरों की कृपा प्राप्त करते हैं वहीं केले, अन्न, गुड़ का दान करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं।

आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि मंगलवार का दिन है। द्वितीया तिथि आज शाम 6 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। आज द्वितीया तिथि वालों का श्राद्ध किया जायेगा। आज शाम 6 बजकर 8 मिनट तक सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। साथ ही आज शाम 6 बजकर 7 मिनट उत्तरा तक भाद्रपद नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा आज अशून्य शयन व्रत किया जायेगा। इसके अलावा आज प्रतिपदा तिथि वालों का श्राद्ध किया जायेगा।
पितृपक्ष के दौरान पितृ चालीसा का पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति & पितृ चालीसा का पाठ करने से पितृदोष दूर होता है और आपके घर में सुख-समृद्धि आती है। पितृपक्ष वह समय है जब हमें सात्विक जीवन जीने की सलाह दी जाती है। इस दौरान कई ऐसे कार्य होते हैं जिनको करने की मनाही होती है। जैसे इस अवधि में मांस, मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए और साथ ही लहसुन-प्याज जैसी तामसिक प्रवृति की चीजों को भी नहीं खाना चाहिए। इसके साथ ही कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें पितृपक्ष के दौरान खरीदना नहीं चाहिए। इन चीजों को खरीदने से आपको पितृ रूठ सकते हैं।
इन चीजों को खरीदने से आपके पितरों की आत्मा प्रसन्न होती है

जौ, काले तिल, कुशा, चमेली का तेल, चावल आदि चीजें खरीदना शुभ होता है। इस काल में धूप दीप खरीदने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं। धार्मिक पुस्तकें खरीदना भी इस अवधि में शुभ माना जाता है। इन चीजों को खरीदने से आपके पितरों की आत्मा प्रसन्न होती है और उनको तृप्ति मिलती है। खरीदारी करने के साथ ही बताई गई चीजों को आप दान में दे सकते हैं।
9 सितंबर 2025 को द्वितीया तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. पितरों की शांति और मुक्ति के लिए विधि विधान से पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाएगा. श्राद्ध पक्ष में मृत्यु तिथि के अनुसार ही तर्पण करने का विधान है. इस तरह 9 सितंबर को जिन भी पितरों का तर्पण किया जाएगा उनकी मृत्यु तिथि द्वितीया होगी.
श्री पितृ चालीसा
॥ दोहा।।
हे पितरेश्वर नमन आपको, दे दो आशीर्वाद,
चरणाशीश नवा दियो, रख दो सिर पर हाथ।
सबसे पहले गणपत पाछे घर कर देन मनावा जी,
हे पितरेश्वर दया राखियो करियो मन की चाया जी।।
।। चौपाई।।
पितरेश्वर करो मार्ग उजागर। चरण रज की मुक्ति सागर ।।
परम उपकार पितरेश्वर कीन्हा। मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा ।।
मातृ-पितृ देव मनजो भावे। सोई अमित जीवन फल पावे ।।
जे जे जे पितर जी साईं। पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहि ।।
चारों ओर प्रताप तुम्हारा। संकट में तेरा ही सहारा ।।
नारायण आधार सृष्टि का। पितरजी अंश उसी दृष्टि का ।।
प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते। भाग्य द्वार आप ही खुलवाते ।।
झुंझुनू ने दरबार है साजे। सब देवो संग आप विराजे ।।
प्रसन्न होय मन वांछित फल दीन्हा। कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा ।।
पित्तर महिमा सबसे न्यारी। जिसका गुण गावे नर नारी ।।
तीन मंड में आप बिराजे। बसु रुद्र आदित्य में साजे ।।
नाथ सकल संपदा तुम्हारी। में सेवक समेत सुत नारी ।।
छप्पन भोग नहीं है भाते। शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते ।।
तुम्हारे भजन परम हितकारी। छोटे बड़े सभी अधिकारी ।।
भानु उदय संग आप पुजावै। पांच अंजुलि जल रिझाने ।।
ध्वज पताका मंड पे है साजे। अखंड ज्योति में आप विराजे ।।
सदियों पुरानी ज्योत्ति तुम्हारी। धन्य हुई जन्म भूमि हमारी ।।
शहीद हमारे यहाँ पुजाते। मातृ भक्ति संदेश सुनाते ।।
जगत पित्तरो सिद्धांत हमारा। धर्म जाति का नहीं है नारा ।।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई। सब पूजे पितर भाई।।
हिंदू वंश वृक्ष है हमारा। जान से ज्यादा हमको प्यारा ।।
गंगा ये मरूप्रदेश की। पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की ।।
बंधु छोड़कर इनके चरणां। इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा ।।
चौदस को जागरण करवाते। अमावस को हम धोक लगाते ।।
जात जडूला सभी मनाते। नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते ।।
धन्य जन्मभूमि का वो फूल है। जिसे पितृ मंडल की मिली धूल है।।
श्री पितर जी भक्त हितकारी। सुन लीजे प्रभु अरज हमारी ।।
निशदिन ध्यान धरे जो कोई। ता सम भक्त और नहीं कोई ।।
तुम अनाथ के नाथ सहाई। दीनन के हो तुम सदा सहाई ।।
चारिक वेद प्रभु के साक्षी। तुम भक्तन की लज्जा राखी ।।
नामा तुम्हारो लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहीं कोई ।।
जो तुम्हारे नित पांच पलोटत। नवों सिद्धि चरणा में लोटत ।।
सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी। जो तुम ये जावे बलिहारी ।।
जो तुम्हारे चरणा चित्त लाने। ताकी मुक्ति अवसी हो जावे ।।
सत्य भजन तुम्हारो जो गावे। सो निश्चय चारों फल पावे ।।
तुमहि देव कुलदेव हमारे। तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे ।।
सत्य आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावें कोई ।।॥
तुम्हारी महिमा बुद्धि बढ़ाई। शेष सहस्त्रमुख सके न गाई।।
में अतिदीन मतीन दुखारी। करहु कौन विधि विनय तुम्हारी ।।
अब पितर जी दया दीन पर कीजे। अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै ।।
।।दोहा।।
पित्तरों के स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम।
श्रद्धा सुमन चढ़े वहां, पूरण हो सब काम।।
झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान।
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान।।
जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम,
पित्तर चरण की धूल ले, जीवन सफल महान।।