पुण्यकाल में संक्रांति;  ग्रीष्म ऋतु से वर्षा ऋतु की ओर बढ़ने का संकेत  ; 15 जून का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास- कर्मों का फल कई गुना बढ़कर

15 जून का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है. इस दिन नक्षत्र जैसे महत्वपूर्ण ग्रह-नक्षत्र बन रहे हैं  मिथुन संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व तीर्थ जल से स्नान करने का विधान है. इस दिन पितरों का तर्पण करने पर पितृ दोष दूर होता है.  सूर्य संक्रांति के दिन देर तक नहीं सोना चाहिए.

 15 जून 2025 को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस दिन श्रावण नक्षत्र और इंद्र योग का संयोग रहेगा। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो रविवार को अभिजीत मुहूर्त 11:47 − 12:40 मिनट तक रहेगा। राहुकाल 17:14 − 18:54 मिनट तक रहेगा। 

15 जून को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है और रविवार का दिन है। चतुर्थी तिथि 15 जून को दोपहर बाद 3 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। साथ ही दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक इंद्र योग रहेगा। इन्द्र योग के दौरान राज्य पक्ष के कार्यों में अथवा सरकारी कामों में सफलता जरूर मिलती है। साथ ही देर रात 1 बजे तक श्रवण नक्षत्र रहेगा। आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से श्रवण 22वां नक्षत्र है। 

मिथुन संक्रांति वह दिन होता है जब सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करता है। यह संक्रांति खासतौर पर सूर्य उपासना, दान और शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह समय ग्रीष्म ऋतु से वर्षा ऋतु की ओर बढ़ने का संकेत देता है। धार्मिक दृष्टि से यह संक्रांति पुण्यकाल में आती है और इसमें स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व होता है। इस दिन किए गए कर्मों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

  • रविवार के उपाय – रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। इस दिन सूर्य देव को जल चढ़ाने, तांबे के बर्तन में जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से विशेष लाभ मिलता है। इसके अलावा रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने, सूर्य देव के मंत्र “ऊं सूर्याय नमः” या “ऊं घृणि सूर्याय नमः” का जप करने से भी विशेष लाभ मिलता है। रविवार के दिन गुड़ और तांबे के दान का भी विशेष महत्व है। इन उपायों को करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता मिलती है।
  • सूर्य जब मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे मिथुन संक्रांति कहते हैं. दान-पुण्य के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है. साथ ही पितरों के निमित्त पूजन भी करते हैं, ताकि वो प्रसन्न हों मिथुन संक्रांति पर पितरों के नाम जरुरतमंदों को अन्न, जल का दान करें.
  • इस दिन सूर्य की उपासना करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है.
  • मिथुन संक्रांति का योग

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