25 JUNE 2025 (WEDNESS) उत्तराखंड में केदारनाथ धाम की यात्रा को 4 घंटे के लिए रोक &केदारनाथ धाम पैदल मार्ग पर ग्लेशियर में फोटो खिंचवा रहे श्रद्धालु & गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम तक का सम्पूर्ण पैदल मार्ग चुनौतीपूर्ण & केदारनाथ हाईवे काकड़ा गाड़ में भी जानलेवा स्थिति & HIMALAYAUK (Leading Newsportal & youtube Channel & Daily Newspaper) Bureau Report

केदारनाथ यात्रा पर आ रहे श्रद्धालु एवं स्थानीय जनता काकड़ा गाड़ में जान हथेली पर रखकर सफर करने को मजबूर 6 किलोमीटर का अतिरिक्त पैदल सफर सहित करीबन 24 किलोमीटर का पैदल ट्रैक करेंगे केदारनाथ हाईवे मुनकटिया के पास मलबा-पत्थर आने से बार-बार हो रहा अवरुद्ध हो रहा है. आज सुबह 6:30 बजे के करीब केदारनाथ हाईवे के सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर करीब दो घंटे की मेहनत के बाद साढ़े 8 बजे राजमार्ग पर मलबा-बोल्डर हटाया गया तो सैकड़ों तीर्थंयात्रियों को केदारनाथ धाम के लिए भेजा गया मुनकटिया की पहाड़ी ने मौत बरसाना शुरू कर दिया
केदारनाथ धाम की यात्रा को 4 घंटे के लिए रोक दिया गया है. यात्रा मार्ग के मुनकटिया में पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण बोल्डर और मलबा आ रहा है. जिसकी वजह से यहां पर आवागमन करना मुश्किल हो गया है. फिलहाल तीर्थ यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है.
देर रात्रि से हो रही बारिश के चलते केदारनाथ हाईवे मुनकटिया के पास मलबा-पत्थर आने से बार-बार हो रहा अवरुद्ध हो रहा है. आज सुबह 6:30 बजे के करीब केदारनाथ हाईवे के सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आ गया, जिसे साफ करने को लेकर एनएच विभाग की मशीन जुट गई. करीब दो घंटे की मेहनत के बाद साढ़े 8 बजे राजमार्ग पर मलबा-बोल्डर हटाया गया तो सैकड़ों तीर्थंयात्रियों को केदारनाथ धाम के लिए भेजा गया, लेकिन कुछ समय बाद राजमार्ग के मुनकटिया की पहाड़ी ने मौत बरसाना शुरू कर दिया. जिसके बाद पुलिस की ओर यात्रा को 4 घंटे के लिए रोक दिया गया है.
इसके अलावा केदारनाथ हाईवे काकड़ा गाड़ में भी जानलेवा स्थिति बनृी है. यहां पर भी ऊपरी पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिस कारण यहां भी बार-बार राजमार्ग बाधित हो रहा है. इस स्थान पर भी लगातार खतरा बना हुआ है. देश-विदेश से केदारनाथ यात्रा पर आ रहे श्रद्धालु एवं स्थानीय जनता काकड़ा गाड़ में जान हथेली पर रखकर सफर करने को मजबूर है.
मार्ग के दुरुस्त होने के बाद बाबा के भक्त सोनप्रयाग से मुनकटिया स्लाइडिंग जोन से होते हुए गौरीकुण्ड तक पैदल चलकर जायेंगे. 6 किलोमीटर का अतिरिक्त पैदल सफर सहित करीबन 24 किलोमीटर का पैदल ट्रैक करेंगे. बारिश के कारण गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम तक का सम्पूर्ण पैदल मार्ग चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. उन्होंने केदारनाथ धाम आ रहे श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मौसम पूर्वानुमान के हिसाब से अपनी यात्रा प्लान करें व पुलिस प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के क्रम में अपनी यात्रा करें.
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य डॉ विनीत पोस्ती ने लगातार हो रही बारिश के बाद जिला आपदा प्रबंधन केंद्र का निरीक्षण क़र आपदा से निपटने की तैयारियों एवं केदारनाथ यात्रा मार्ग का सीसीटीवी कैमरों की मदद से जायजा लिया. उन्होंने डीडीआरएन केइंट्रानेट सिस्टम से पैदल मार्ग पर ग्लेशियर में फोटो खिंचवा रहे श्रद्धालुओं से निवेदन किया कि वे यात्रा मार्ग पर सावधानी बरतें और ग्लेशियर में चढ़कर फोटो ना खींचवाए, इससे उन्हें नुकसान भुगतना पड़ सकता है. इसके साथ ही उन्होंने सोनप्रयाग में अनाउंसमेंट किया कि तीर्थ यात्री केदारनाथ धाम जाते समय सावधानी बरतें. गर्म जूते और रेनकोट का उपयोग करें. अपने स्वास्थ्य की देखभाल करें. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार, मंदिर समिति और जिला प्रशासन तीर्थ यात्रियों की हर संभव मदद को लेकर तत्पर है.
30 जून को चारधाम यात्रा को दो माह पूरे हो जाएंगे। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री व हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 35 लाख पहुंच गया है। पर्यटन विभाग के रिपोर्ट के अनुसार 24 जून तक चारधाम यात्रा में 35 लाख तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। जबकि यात्रा के लिए पंजीकरण का आंकड़ा 46 लाख पार हो चुका है। यात्रा पंजीकरण के नोडल अधिकारी योगेंद्र गंगवार ने बताया कि यात्रा सुचारू रूप से चल रही है। हरिद्वार, ऋषिकेश, हरबर्टपुर, विकासनगर में बनाए गए केंद्रों में प्रतिदिन 8 से 10 हजार ऑफलाइन पंजीकरण किए जा रहे हैं।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गोविंदघाट के समीप पिनौला में चट्टान से बोल्डर गिरने के कारण हाईवे बाधित हो गया है। इससे बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं को मार्ग में ही रोक दिया गया है। रातभर की बारिश के कारण ज्योतिर्मठ क्षेत्र में चट्टानों से पत्थर छिटक कर हाईवे पर आ गिरे, जिससे हाईवे के दोनों ओर तीर्थयात्रियों के वाहनों की लंबी कतार लग गई है। यात्रा यात्रा मार्गों पर चट्टान गिरने व भूस्खलन की घटना के बाद भी चारधामों के साथ हेमकुंड साहिब में प्रतिदिन 50 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।