11 फरवरी 2026, बुधवार ,आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है जो कि सुबह 9 बजकर 58 मिनट तक रहेगी. आज सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है जिन्हें बहुत ही शुभ माना गया है. इन योगों में पूजा-पाठ या शुभ काम करना फलदायी होता है. 11 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि & फिर इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। फाल्गुन माह के इस तिथि पर अनुराधा नक्षत्र और व्याघात योग का संयोग & महाशिवरात्रि पर मंदिर में अभिषेक करने के बाद वहां से कुछ पवित्र वस्तुएं घर लाना भी बेहद शुभ माना गया है। CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030

शिवलिंग का अभिषेक कैसे करें सबसे पहले शिवलिंग पर एक लोटा दूध, दही चढ़ाएं शहद अर्पित घी से भगवान शिव का अभिषेक काले तिल से अभिषेक बेलपत्र अंत में माता पार्वती और भगवान शिव की विधिवत पूजा
फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। इसलिए महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मान्य होगी। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इस शुभ तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन हुआ था। इसलिए इस दिन की गई उपासना का फल कई गुना बढ़कर साधक को प्राप्त होता है।
सूर्योदय का समय : 07: 03 ए एम सूर्यास्त का समय : 06: 09 पी एम &
नक्षत्र : अनुराधा – 10:53 ए एम तक & आज अभिजित मुहूर्त कोई नहीं. विजय मुहूर्त 02:27 पी एम से 03:12 पी एम तक रहेगा. ब्रह्म मुहूर्त 05:20 ए एम से 06:12 ए एम तक रहेगा. आज निशिता मुहूर्त 12:10 ए एम, फरवरी 12 से 01:02 ए एम, फरवरी 12 तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त 06:07 पी एम से 06:33 पी एम तक रहेगा. अमृत काल 03:52 ए एम, फरवरी 12 से 05:39 ए एम, फरवरी 12 तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि योग 07:03 ए एम से 10:53 ए एम तक रहेगा. अमृत सिद्धि योग 07:03 ए एम से 10:53 ए एम तक रहेगा.

महाशिवरात्रि पर उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का विशेष युग्म संयोग बन रहा है, जो एक दुर्लभ और अत्यंत फलदायी योग
15 फरवरी 2026 रविवार को महाशिवरात्रि पर उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का विशेष युग्म संयोग बन रहा है, जो एक दुर्लभ और अत्यंत फलदायी योग है। इस दिन शाम 07:48 तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और उसके बाद श्रवण नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि व अन्य शुभ योग (व्यतीपात, वरियान) रहेंगे, जो पूजा-साधना के लिए उत्तम माने गए हैं। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी को शाम में 5 बजकर 4 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 16 फरवरी को शाम में 5 बजकर 34 मिनट पर तिथि समाप्त होगी। शास्त्रों के नियम के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व जब मनाया जाता है जब चतुर्दशी तिथि निशीथ काल का समय भी लग रही हो। ऐसे में 15 फरवरी को चतुर्दशी तिथि निशीथ काल के समय होने के कारण 15 फरवरी रविवार को ही महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।
पंचांग के अनुसार, इस साल महाशिवरात्रि पर भद्रा काल का समय 15 फरवरी की शाम 05:04 बजे से शुरू होगा और 16 फरवरी की सुबह 05:23 बजे तक रहेगा। यानी इस बार महाशिवरात्रि के दौरान करीब 12 घंटे और 19 मिनट तक भद्रा काल बना रहेगा। भले ही भद्रा काल सुनने में थोड़ा अनिश्चित या अशुभ लग सकता है, लेकिन पंडितों और ज्योतिषियों के अनुसार इस बार भद्रा काल पाताल लोक में रहेगा। शास्त्रों में बताया गया है कि जब भद्रा का प्रभाव पाताल लोक में होता है, तो उसका असर धरती पर नहीं पड़ता। सालभर में कुल 12 शिवरात्रि आती हैं, लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इसे शिव जी के वैराग्य छोड़कर सांसारिक जीवन में प्रवेश करने वाले दिन के रूप में देखा जाता है।
महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यह दिन साधना, तप, जप और आराधना के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बनने जा रहा है। महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा मुहूर्त
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – सुबह 03:59 से 07:06 रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 06:39 से 09:45
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -शाम 09:45 से 12:52 रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – सुबह 12:52 से 03:59
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कई शुभ मुहूर्त निर्धारित हैं। सुबह का पहला मुहूर्त 08:24 बजे से 09:48 बजे तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 09:48 बजे से 11:11 बजे तक है।
सबसे महत्वपूर्ण और अमृत मुहूर्त सुबह 11:11 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा। इस समय में शिवलिंग पर जलाभिषेक करना सबसे फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, शाम को भी एक शुभ-उत्तम मुहूर्त 06:11 बजे से 07:47 बजे तक रहेगा।
इन सभी समयों में भक्त भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक कर सकते हैं। यह समय विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, और इन मुहूर्तों में की गई भक्ति का विशेष फल मिलता है। जल की धारा पतली और धीरे-धीरे गिरे। कभी भी तेजी से जलाभिषेक न करें, क्योंकि शास्त्रों में इसे उचित नहीं माना गया है। इसके बाद गंगाजल में काले तिल मिलाकर 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और इस जल को शिवलिंग पर अर्पित कर दें।
इसके पश्चात भोलेनाथ को फल और फूल अर्पित करें। महादेव के समक्ष आटे का चौमुखी दीपक जला दें और धूपबत्ती भी प्रज्वलित करें। पूजा के क्रम में शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
पवित्र वस्तुएं
बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, मदार पुष्प या फूलों की माला, कमल के फूल और सफेद फूल
अभिषेक एवं भोग सामग्री
गाय का दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, मौसमी फल, बेर, मिठाई, हलवा, ठंडाई और लस्सी वस्त्र, अन्न, गुड़, घी आदि दीपक, गाय का घी, कपूर, इत्र, लौंग, छोटी इलायची, पान और सुपारी अक्षत (अखंडित चावल), मौली, रक्षा सूत्र, भस्म, खस, अभ्रक शिव चालीसा और शिव कथा की पुस्तक
पंचामृत को शिव पूजा में सबसे शुभ भोग माना गया है। यह दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बनाया जाता है। भगवान शिव को दूध अति प्रिय है। कई स्थानों पर दूध के साथ गुड़ का भोग लगाया जाता है। भांग और धतूरा शिव जी के विशेष प्रिय माने जाते हैं। खीर भी महाशिवरात्रि के शुभ भोगों में शामिल है।