21 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। शनिवार, 21 फरवरी 2026 : फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आज विनायक चतुर्थी का पावन पर्व & अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस & ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 5 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक & अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से 1 बजकर 15 मिनट तक & गोधूलि मुहूर्त – शाम 6 बजकर 39 मिनट से 7 बजकर 04 मिनट तक & सूर्योदय का समय: 07:03 ए.एम. सूर्यास्त का समय: 06:41 पी.एम. & फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी 20 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और 21 फरवरी को दोपहर 1 बजे समाप्त & विनायक चतुर्थी व्रत 21 फरवरी 2026, शनिवार के दिन & विनायक चतुर्थी के दिन कभी भी पूजा-पाठ किया जा सकता है. & वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जल्द ही कुछ राशियों की जिंदगी में बदलाव

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस प्रतिवर्ष 21 फरवरी को दुनिया भर में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता, बहुभाषिकता और मातृभाषा के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। UNESCO ने 1999 में इसकी घोषणा की थी, जो बांग्लादेश के 1952 के भाषा आंदोलन की याद दिलाता है। यह दिन अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम और अन्य भाषाओं के प्रति सम्मान को बढ़ावा देता है।
21 फरवरी 1952 को, बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के छात्रों ने अपनी मातृभाषा ‘बांग्ला’ को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष किया और इस दौरान पुलिस फायरिंग में छात्रों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस शहादत की याद में यह दिन मनाया जाता है। UNESCO ने 17 नवंबर, 1999 को आधिकारिक तौर पर इस दिवस को मान्यता दी। वर्ष 2008 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष घोषित किया गया था। मातृभाषा किसी व्यक्ति की पहचान, संस्कृति और विरासत का आधार होती है। शिक्षा में मातृभाषा का उपयोग करने से सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और समावेशी बनती है। विश्वभर में लगभग 40 प्रतिशत आबादी को उस भाषा में शिक्षा नहीं मिलती जो वे बोलते हैं, इसलिए इस दिन का महत्व बहुत अधिक है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह एक समय अंतराल के दौरान राशि परिवर्तन करता है और कुछ ग्रहों की युति ऐसा संयोग बनता है जो कि राशियों के जीवन को प्रभावित करता है. बता दें कि 23 फरवरी को ग्रहों के ऐसे ही शुभ संयोग से नवपंचम राजयोग का निर्माण हो रहा है.
वैदिक ज्योतिष में जब गुरु ग्रह और शुक्र ग्रह एक-दूसरे 120 डिग्री की दूरी पर होते हैं तो इस कोणीय स्थिति को नवपंचम राजयोग कहते हैं. बता दें कि 23 फरवरी को सुबह 1 बजकर 29 मिनट पर शुक्र और गुरु एक—दूसरे से 120 डिग्री पर होंगे. जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा जो कि कुछ राशियों के लिए बहुत ही शुभ
नवपंचम राजयोग मीन राशि वालों के लिए शुभ साबित होगा. इस राशि के जातकों को धन से जुड़े लाभ होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. वहीं भौतिक सुखों में वृद्धि होगी और समाज में भी मान-सम्मान बढ़ेगा.

इस तिथि पर रेवती नक्षत्र और शुभा योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो शनिवार को अभिजीत मुहूर्त 12:04− 12:50 मिनट तक रहेगा। शनिवार, 21 फरवरी 2026 : फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आज विनायक चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। आज का दिन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत विशेष है, क्योंकि आज ही ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ भी है। पंचांग के अनुसार, आज पंचक और भद्रा का साया
उड़द अथवा तैल से बनी वस्तु अथवा तिल सेवन & गायों को चारा ,& 21 फरवरी को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और शनिवार का दिन है। चतुर्थी तिथि 21 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। शनिवार को दोपहर बाद 3 बजकर 51 मिनट तक शुभ योग रहेगा। साथ ही 21 फरवरी को शाम 7 बजकर 7 मिनट तक रेवती नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा शनिवार को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत
21 फरवरी 2026, शनिवार है. आज फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है जिसे ढुण्ढिराज चतुर्थी या विनायक चतुर्थी तिथि कहा जाता है. यह दिन गणेश जी को समर्पित है और इस दिन व्रत रखने का विधान है. पंचांग के अनुसार आज रवि योग बन रहा है जो कि लगभगर पूरे दिन रहेगा. इसके अलावा आज भद्रा व पंचक का साया रहेगा जो कि अशुभ मुहूर्त माने जाते हैं.
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन विनायक चतुर्थी व्रत रखा जाता है और यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है. इस दिन गणेश जी का पूजन करना बहुत ही शुभ व फलदायी माना गया है. हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहते हैं और मान्यता है कि जिस पर उनकी कृपा होती है उसके जीवन में आ रहे सभी विघ्न दूर हो जाते हैं. गणेश जी की कृपा से जातको सफलता हासिल होती हैं और सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं
हिंदू धर्म में अधिकतर व्रत व उपवास चंद्रमा के दर्शन के बाद ही खोले जाते हैं. लेकिन विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्र दर्शन करना कलंक लगने के बराबर होता है. इसलिए इस दिन गलती से भी चंद्रमा के दर्शन न करें.
विनायक चतुर्थी का व्रत बहुत ही फलदायी माना गया है और कहते हैं कि यह व्रत संकटों को हरने वाला है. इस दिन व्रत रखने व गणेश जी का पूजन करने से कार्यों में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के रास्ते खुलते हैं. इस दिन व्रत रखने वाले जातक को ज्ञान, बुद्धि, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होता है. साथ ही मानसिक शांति मिलती है और कार्यों में गणेश जी का आशीर्वाद बना रहता है. करियर में यदि बाधाएं आ रही हैं तो विनायक चतुर्थी व्रत बहुत ही फलदायी साबित होता है.