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अकबर एस. अहमद की किताब जिन्ना, पाकिस्तान एंड इस्लामिक आइडेंटिटी में उनकी जड़ों के बारे में विस्तार से जानकारी
पाकिस्तान धर्म के आधार पर पैदा हुआ हो और कितना भी टू नेशन थ्योरी का राग अलापता रहे लेकिन उसके संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना और तराना-ए-मिल्ली लिखने वाले अल्लामा इकबाल से लेकर भुट्टो परिवार तक इन सभी के पूर्वज हिंदू थे. जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग करके भारत का बंटवारा कराया और पाकिस्तान बनवाया.
पाकिस्तान के कुछ ऐसे ही बड़े नेताओं और हस्तियों की बात करेंगे जिन्होंने कभी न कभी कबूल किया है कि उनके पूर्वज हिंदू थे और बाद में इस्लाम धर्म अपनाया. हैरानी की बात तो ये है कि जिस जिन्ना की बात करके टू नेशन थ्योरी का ज्ञान पाकिस्तान देता रहता है, उसके पिता ने सिर्फ नाराजगी के कारण, गुस्से में अपना धर्म बदल लिया था.
मोहम्मद अली जिन्ना के पूर्वज ; जिन्ना के पिता हिंदू परिवार में पैदा हुए थे और उसका परिवार गुजरात के काठियावाड़ा के पनेली गांव में रहता था. जिन्ना के दादा का नाम प्रेमजीभाई मेघजी ठक्कर था और वो मछली के बहुत बड़े व्यापारी थे और ये कारोबार विदेशों तक फैला हुआ था. वो लोहना जाति से ताल्लुक रखते थे, जो मूल तौर पर वैश्य होते हैं और गुजरात, सिंध और कच्छ इलाके में होते हैं. उनकी जाति के लोगों को उनका कारोबार पसंद नहीं था. लोहना समुदाय के लो कट्टर शाकाहारी थे. इस वजह से उनका विरोध होने लगा.
अकबर एस. अहमद की किताब जिन्ना, पाकिस्तान एंड इस्लामिक आइडेंटिटी में उनकी जड़ों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. उसके मुताबिक, बहिष्कार के बाद प्रेमजी तो हिंदू बने रहे लेकिन उनके बेटे और जिन्ना के पिता पुंजालाल ठक्कर को ये चीज अपमानजनक लगी और उन्होंने अपनी पत्नी के साथ-सात तब तक हो चुके 4 बच्चों समेत अपनी धर्म बदल लिया. ये सभी लोग मुस्लिम बन गए. हालांकि प्रेमजी के बाकी बेटों ने अपना धर्म नहीं बदला वो हिंदू ही रहे. कहा तो ये भी जाता है कि जिन्ना के बहुत से रिश्तेदार अभी भी हिंदू हैं और गुजरात में ही रहते हैं. इतना ही नहीं जिन्ना ने पारसी लड़की से शादी की और उनकी बेटी ने भी पारसी से ही शादी की है, मौजूदा वक्त में जिन्ना के नाती पोते पारसी हैं.
अल्लामा इकबाल
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा… तराना-ए-हिंद लिखने वाले इकबाल के पूर्वज भी हिंदू ही थे. दरअसल, इकबाल का जन्म 1877 को पंजाब के सियालकोट में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है. उनका परिवार कश्मीरी हिंदू था लेकिन 17वीं शताब्दी में ही उनके परिवार ने मुस्लिम धर्म अपना लिया था. उन्होंने खुद अपनी एक कविता में जिक्र किया है, परिवार ब्राह्मण है लेकिन उनमें सूफी इस्लाम है. सारे जहां से अच्छा लिखने वाले इकबाल ऐसे बदले कि उन्होंने तराना-ए-मिल्ली लिख डाला- मुस्लिम हैं हम, वतन है सारा जहां हमारा.
भुट्टो परिवार
जो बिलावल भुट्टो पाकिस्तान में बैठकर बयान दे रहे कि सिंधु का पानी बंद किया तो खून की नदियां बहेंगीं उनका परिवार भी कभी हिंदू हुआ करता था. उनकी मां बेनजीर भुट्टो ने ही कहा था कि उनके पूर्वज राजपूत थे. हाल ही में एक न्यूज चैनल की डिबेट में बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि बेनजीर भुट्टो ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में लिखा है कि हमें अपने बचपन में बताया गया कि हम हिंदुओं के राजपूत वंश से हैं.
मौलाना तारिक जमील
पाकिस्तान के मशहूर मौलाना तारिक जमील ने खुद माना है कि उनके पूर्वज हिंदू थे और पृथ्वीराज चौहान के वंशज थे. उन्होंने एक बार कहा था, “पृथ्वीराज चौहान को मोहम्मद गौरी रहमतुल्लाह अलैह ने मार डाला. उसका एक बेटा था रामदेव चौहान जिसे ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह ने मुसलमान बनाया था. हम सभी उसी रामदेव चौहान के वंशज हैं.” हालांकि रामदेव चौहान पृथ्वीराज चौहान के बेटे नहीं बल्कि परपोते थे. रामदेव चौहान गोविंद राज चौहान के बेटे महाराव हम्मीरदेव हठी चौहान के बेटे थे.
पाकिस्तानी पूर्व क्रिकेटर सकलैन मुश्ताक
इतना ही नहीं पूर्व क्रिकेटर सकलैन मुश्ताक ने भी माना है कि उनके पूर्वज हिंदू थे. पाकिस्तानी टीवी चैनल पर चर्चा के दौरान उन्होंने इस बात का खुलासा किया था. उन्होंने कहा था, “उनका परिवार अमृतसर का रहने वाला है और उनके दादा का नाम रूड सिंह था. जो बाद में मुसलमान बन गए थे और फिर भारत से पाकिस्तान आ गए.” अपनी पीढ़ी को याद करते हुए उन्होंने कहा, “पहले रूड सिंह, फिर उमंगदीन, फिर लालदीन और फिर मुश्ताक अहमद और फिर हम लोग.”