गुप्त नवरात्रि में सितारों की स्थिति ऐसी है कि & पहला मंगला गौरी व्रतः 4 जुलाई 2023

गुप्त नवरात्रि में सितारों की स्थिति ऐसी है कि… by chandra shekhar joshi editor mob. 94129320

छह जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत  भगवान विष्णु योगनिद्रा में     गुप्त नवरात्रि में सितारों की स्थिति ऐसी है कि बारिश के संयोग बन रहे हैं। इसके अलावा मां जगदंबा गुरुवार से धरती पर आ रही हैं यानी मां की सवारी पालकी (डोली) है। इससे गुप्त नवरात्रि के दौरान तेज बारिश के योग बनेंगे।

023 में कब-कब पड़े थे मंगला गौरी व्रत

पहला मंगला गौरी व्रतः 4 जुलाई 2023
दूसरा मंगला गौरी व्रतः 11 जुलाई 2023
तीसरा मंगला गौरी व्रतः 18 जुलाई 2023
चौथा मंगला गौरी व्रतः 25 जुलाई 2023
पांचवां मंगला गौरी व्रतः 1 अगस्त 2023
छठवां मंगला गौरी व्रतः 8 अगस्त 2023
सातवां मंगला गौरी व्रतः 15 अगस्त 2023
आठवां मंगला गौरी व्रतः 22 अगस्त 2023
नौवां मंगला गौरी व्रतः 29 अगस्त 2023

 आषाढ़ गुप्त नवरात्रि  मानसून की शुरुआत   4 जुलाई 2025 को 16:31 बजे समाप्त   ज्योतिषियों की मानें तो नवरात्रि में माता का पालकी से धरती पर आना लोगों के लिए शुभ नहीं होता है। यह आने वाले समय में (अगली नवरात्रि से पहले) महामारी आने का संकेत होता है। इससे अर्थव्यवस्था में गिरावट, मंदी आने का संकेत भी मिलता है। साथ ही हिंसा आदि देश दुनिया में बढ़ सकती है।

आध्यात्मिकता चाहने वालों और तांत्रिक साधकों द्वारा, जो गहन साधना और दिव्य आशीर्वाद 

“गुप्ता” नाम का अर्थ है छिपा हुआ या गुप्त, जो दर्शाता है कि यह नवरात्रि आंतरिक आध्यात्मिक अभ्यास, गहन ध्यान और देवी के प्रति व्यक्तिगत भक्ति के बारे में है।

इन नौ दिनों के दौरान, भक्त, योगी और तांत्रिक विशेष साधना करते हैं और दिव्य माँ का आशीर्वाद और आध्यात्मिक विकास प्राप्त करने के लिए ‘दुर्गा सप्तशती’, ‘देवी महात्म्य’ और ‘श्रीमद् देवी भागवत’ जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं।

इस त्योहार की पूजा और जश्न मनाने से, व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ देवी दुर्गा से शांति, समृद्धि और आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।

देवी सती के क्रोध से प्रकट हुईं दस महाविद्याएं तांत्रिक साधना, शक्ति उपासना और अध्यात्म के मार्ग में महत्वपूर्ण स्थान, 26 जून से 4 जुलाई तक यह अवधि देवी दुर्गा के दस महाविद्याओं की पूजा के लिए समर्पित है। यह आंतरिक आध्यात्मिक अभ्यास, ध्यान और व्यक्तिगत भक्ति के माध्यम से देवी का आह्वान करने का समय है। 

4 जुलाई को भड़ली नवमी पर देवी सती की दस महाविद्याओं की साधना का ये उत्सव खत्म, गुप्त नवरात्रि में देवी सती की दस महाविद्याओं की साधना गुप्त रूप से की जाती है। इन महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, षोडषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला देवी शामिल हैं।

नवरात्र के दौरान दान पुण्य करने का भी प्रावधान होता है जरूरतमंद लोगों को फल अनाज वस्त्र धन और दान दक्षिणा का दान करना चाहिए विशेष रूप से अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के बाद में छोटी कन्याओं को भोजन के बाद में दक्षिण देना चाहिए।  

कैसे प्रकट हुईं दस महाविद्याएं

देवी सती के पिता प्रजापति दक्ष शिव जी को पसंद नहीं करते थे। वे शिव जी को अपमानित करने का एक भी अवसर नहीं छोड़ते थे। एक बार दक्ष ने एक यज्ञ आयोजित किया। इस यज्ञ में उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु सहित समस्त प्रमुख देवी-देवताओं, ऋषियों, तपस्वियों, मुनियों और कई राजाओं को आमंत्रित किया, लेकिन जानबूझकर उन्होंने भगवान शिव और अपनी पुत्री सती को उस यज्ञ में नहीं बुलाया।

जब देवी सती को ये मालूम हुआ कि उनके पिता यज्ञ कर रहे हैं और आमंत्रित नहीं किया है तो देवी को दुख तो हुआ, लेकिन पुत्री धर्म और भावनाओं से विवश होकर देवी ने यज्ञ में जाने का मन बना लिया। सती ने शिव जी से इस संबंध में चर्चा की और यज्ञ में जाने की इच्छा बताई।

शिव जी ने शांतिपूर्वक और स्नेहपूर्वक सती को समझाया कि किसी भी यज्ञ या आयोजन में बिना आमंत्रण के जाना उचित नहीं होता, विशेषकर जब आयोजक के हृदय में हमारे लिए अच्छे भाव न हो। हमें वहां अपमान का सामना करना पड़ सकता है।

शिव जी की बातें सुनकर सती ने तर्क दिया कि एक पुत्री को अपने पिता के घर जाने के लिए किसी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती, और ये पुत्री का अधिकार है कि वह यज्ञ में जा सकती है।

शिव जी ने उन्हें बार-बार विनम्रता से समझाने का प्रयास किया, लेकिन देवी सती का मन विचलित हो चुका था। जब शिव जी ने उन्हें रोकना जारी रखा तो देवी सती क्रोधित हो गईं। उसी क्षण देवी सती ने उग्र और भयंकर रूप धारण कर लिया। उनका तेज इतना प्रचंड हो गया कि सभी देवता डर गए थे।

शिव जी जब सती के इस भयंकर रूप को देखकर पीछे हटने लगे तो दसों दिशाओं से देवी सती के दस विभिन्न रूप प्रकट हो गए। ये दस रूप ही दस महाविद्याओं के नाम से प्रसिद्ध हुए हैं। ये महाशक्तियां थीं-

साल में चार बार नवरात्र होती हैं। चैत्र और आश्विन माह में शारदीय नवरात्र तथा आषाढ़ और माघ मास में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि के नौ दिन मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धुमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाएगी।

  • कालीजो काल का नाश करने वाली हैं।
  • ताराजो ज्ञान और तारक मंत्र की अधिष्ठात्री हैं।
  • त्रिपुरासुंदरी (षोडशी), जो सौंदर्य और ब्रह्मज्ञान की देवी हैं।
  • भुवनेश्वरीसमस्त जगत की अधिपति शक्ति।
  • छिन्नमस्ताजो आत्मबलिदान और चेतना की प्रतीक हैं।
  • त्रिपुराभैरवी, जो तंत्र मार्ग की रक्षक हैं।
  • धूमावती, जो त्याग और वैराग्य की मूर्ति हैं।
  • बगलामुखीजो शत्रुओं को वशीभूत करने वाली हैं।
  • मातंगीजो वाणी, संगीत और विद्या की देवी हैं।
  • कमलाजो समृद्धि और लक्ष्मी रूप में पूजनीय हैं।

इन दिव्य रूपों के प्रकट होने के बाद देवी सती का क्रोध शांत हुआ, देवी अपने पिता के यहां यज्ञ में पहुंच गईं। यज्ञ स्थल पर दक्ष ने सती को देखते ही शिव जी के लिए अपमानजनक बातें कहना शुरू कर दीं। ये बातें देवी सती के लिए असहनीय थीं।

इस अपमान को देवी सती सहन नहीं कर सकीं और उसी क्षण यज्ञ कुंड में कूदकर अपनी देह का त्याग कर दिया।

इस प्रकार, देवी सती के क्रोध से प्रकट हुईं दस महाविद्याएं तांत्रिक साधना, शक्ति उपासना और अध्यात्म के मार्ग में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR Mob 9412932030

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *