चैत्र कृष्ण पक्ष तृतीया, सिद्धार्थि संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), फाल्गुन | तृतीया तिथि 05:53 PM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र हस्त 09:29 AM तक उपरांत चित्रा | गण्ड योग 07:05 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग | करण विष्टि 05:53 PM तक, बाद बव 06:31 AM तक, बाद बालव | मार्च 06 शुक्रवार को राहु 11:10 AM से 12:38 PM तक अभिजीत मुहूर्त – 12:14 PM – 01:01 PM अमृत काल – 04:22 AM – 06:05 AM ब्रह्म मुहूर्त – 05:11 AM – 05:59 AM
BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030

होलिका दहन, चंद्र ग्रहण सूर्य, मंगल और राहु की युति, रौद्र संवत्सर यह सब स्थितियां शुभ नहीं वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रंथ बृहत्संहिता के राहुचाराध्याय में लिखा है कि जब दो-दो ग्रहण एक साथ एक ही महीने में होते हैं तो तूफान, भूकंप, मानवीय भूल से बड़ी संख्या में जनहानि होने के योग बनते हैं। एक ही महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण होते हैं तो सेनाओं की हलचल बढ़ती है। सरकारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक आपदा आने के योग रहते हैं।
6 मार्च 2026, शुक्रवार हिंदू कैलेंडर के अनुसार कई महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योगों और धार्मिक महत्व से जुड़ा हुआ है। आज तृतीया तिथि सायं 5:54 तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। हस्त नक्षत्र प्रातः 9:30 तक रहेगा और उसके बाद चित्रा नक्षत्र लगेगा। दिन में वृद्धि योग और राजयोग का विशेष संयोग भी बन रहा है। आज राहु काल सुबह 10:30 से 12:00 तक रहेगा, इसलिए इस समय शुभ कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए।
राहु काल वेला – (मध्यमान से) दिन 10.30 से 12.00 तक रहेगा भद्रा सायं 5-54 तक, कल्पादि, चतुर्थी व्रत, चंद्रोदय रात्रि 9.19 पर, ग्रहण वेध, चन्द्रमा – आज रात्रि 10.19 तक कन्या राशि में होगा तदुपरान्त तुला राशि में प्रवेश होगा ।

साल 2026 में यह अजीब संयोग बन रहा है कि सिर्फ 15 दिन के अंतराल में ही दो ग्रहण लगे। साल 2026 का पहले सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा और साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन शुक्ल की पूर्णिमा तिथि पर 3 मार्च को लगा। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण, दोनों को भी अशुभ माना गया है।
साल 2025 की शुरुआत में भी 15 दिन के अंतराल में चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण लगा था। धुलंडी यानी होली के दिन 14 मार्च 2025 को चंद्र ग्रहण लगा था और ठीक 15 दिन बाद 29 मार्च 2025 को सूर्य ग्रहण लगा था। इससे पहले साल 2022 में 25 अक्टूबर 2022को सूर्य ग्रहण और 8 नवंबर 2022को चंद्र ग्रहण था। साल 1979 में 22 अगस्त 1979को सूर्य ग्रहण और 6 सितंबर 1979 को चंद्र ग्रहण हुआ था। ठीक ऐसा ही योग इस साल भी बना है।
बीती 17 फरवरी को साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगा था और इसके कुछ दिन बाद ही इजरायल, ईरान, अमेरिका और मिडिल ईस्ट के कई देशों में जंग छिड़ गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद अब मध्य पूर्व में इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब कई अन्य देशों की भागीदारी के कारण व्यापक रूप ले चुका है। रूस और यूक्रेन का युद्ध पहले से ही चल रहा है, वहीं यूरोप के कुछ देश और खाड़ी क्षेत्र भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस संघर्ष से जुड़े हुए हैं।
साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च 2026 को लगा। यह खण्डग्रास चंद्र ग्रहण था। यह ग्रहण भारत के साथ साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई देशों में इसको देखा गया। चूंकि भारत में यह ग्रहण दिखेगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य था। इसके बाद से मिसाइल हमले, सीमाई झड़पें या अचानक सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ गई।
2026 में 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण और 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ने से 15 दिन में दो ग्रहण का दुर्लभ संयोग बना
भूकंप, वायुयान दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा, महामारी और सबसे विशेष बात किसी महत्वपूर्ण राजनेता के जीवन पर अचानक संकट आम जनमानस को स्तब्ध कर देगा। भारत के पड़ोसी देशों द्वारा षड्यंत्र और किसी आतंकवादी हमले की प्रबल संभावना है। ऐसी विषम परिस्थितियों में आम जनमानस को अपने इष्ट से प्रार्थना करनी चाहिए कि सर्वत्र शांति बनी रही। भारत के धर्म की मूल भावना भी यही शिक्षा देती है कि विश्व का कल्याण हो प्राणियों में सद्भावना हो।
होली के पहले कुंभ राशि में 23 फरवरी 2026 से सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु की युति से एक शक्तिशाली पंचग्रही योग बना है। सूर्य, मंगल और राहु की युति कभी शुभ फल नहीं देती। दिसंबर 2019 में दिसंबर में धनु राशि में छ: ग्रह एक साथ आये थे,और सूर्य ग्रहण भी था। इसके बाद भारत सहित दुनिया ने कोविड का कठिन दौर झेला था।
इस वर्ष भी एक पखवाड़े में दो ग्रहण और कुंभ राशि में बन रही ग्रहों की यह स्थितियां पूरे विश्व में हलचल पैदा कर गई। विश्व में युद्ध की स्थिति बनेगी जिसमें कई देश प्रभावित होंगे। कुंभ राशि में राहु, मंगल और सूर्य की युति विध्वंसकारी योग बनाएगा, कई देशों की सत्ता और शासन हिल जायेगा, वैश्विक स्तर पर यह योग विनाशकारी साबित होगा।
इस समय राहु और मंगल का प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंगल सेना, अग्नि, युद्ध और आक्रामकता का कारक है, जबकि राहु विस्फोट, भ्रम, अचानक घटनाओं और रणनीतिक छल का प्रतीक है। 23 फरवरी से सक्रिय यह योग 2 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा। यह योग युद्ध को सीमित रखने के बजाय विस्तार देने की प्रवृत्ति रखता है। इजरायल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष टकराव और अमेरिका की भागीदारी इस योग के अनुरूप दिखाई देती है। इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के युद्ध में भी अचानक तेज गतिविधि देखी जा सकती है। यह समय सत्ता संघर्ष को और तेज कर सकता है।
वर्तमान में मंगल और राहु का प्रभाव भारत के लिए सीमाई गतिविधियों को बढ़ा सकता है। पूर्वी सीमा, विशेषकर बांग्लादेश की दिशा में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। आसाम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राजनीतिक तनाव और जनआक्रोश की स्थिति बन सकती है। हालांकि वे स्पष्ट करती हैं कि भारत पूर्ण युद्ध में शामिल नहीं होगा। भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अधिक संतुलित रहेगी और कूटनीतिक स्तर पर भारत मजबूत भूमिका निभा सकता है।
ग्रहण और युद्ध की संयुक्त स्थिति का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहेगा। सोना और धातु क्षेत्र मजबूत हो सकते हैं। तेल की कीमतों में वृद्धि संभव है, जिससे महंगाई बढ़ेगी। अनाज और आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 5 जून के बाद गुरु का गोचर भारत के लिए सकारात्मक रह सकता है। इस समय भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और मजबूत हो सकती है।
19 मार्च को रौद्र नामक संवत्सर शुरू हो रहा है, 19 मार्च को अमावस्या में प्रतिपदा के क्षय होने से संवत् का प्रथम दिन क्षय को प्राप्त है ,संवत् रौद्र नाम का है l यह दोनों स्थितियां शासन सत्ता और आम जनमानस में टकराव की स्थिति बनायेगा। सूर्य,मंगल, राहु की युति जब कभी होती है तब तब सत्ता की श्रेष्ठता का शिखर झुकता है। सत्ता और शासन का विकृत रूप दिखता है।
यदि इसी योग के साथ साथ बृहस्पति एक संवत के भीतर त्रिराशि (तीन राशियों में गोचर) स्पर्श करते हैं तब धर्म जगत में विप्लव उठता है l संत ही एक दूसरे के विरुद्ध जहर उगलने लगते हैं l एक संत दूसरे संत को प्रताड़ित करने लगता है, मर्यादा कलंकित होने लगती है। जब तक बृहस्पति कन्या राशि में नहीं चले जाते तब तक यह दुर्योग अपना असर दिखाएगा।
ससे पहले साल 2022 में 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण और 8 नवंबर को चंद्र ग्रहण था। साल 1979 में 22 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 6 सितंबर को चंद्र ग्रहण हुआ था। ठीक ऐसा ही योग इस साल भी बना है। रविवार 30 अक्टूबर 2022 को गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना सस्पेंशन ब्रिज टूट गया। उस समय पुल पर करीब 500 लोग थे, जो नदी में जा गिरे। इस हादसे में 190 लोगों की मौत हो गई ।
साल 2022 से पहले 1979 में भी मच्छु नदी का डैम टूटने से हादसा हुआ था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। 2022 और 1979 के इन दोनों हादसों में एक बात कॉमन है कि उस समय भी सूर्य और चंद्र ग्रहण हुए थे। ज्योतिष के ग्रंथ बृहत्संहिता में ग्रहण के बारे में भविष्यवाणियां की गई हैं। इस ग्रंथ में लिखा है कि जब-जब एक ही महीने में दो ग्रहण एक साथ होते हैं, तब-तब दुनिया में के हादसों की वजह से जनहानि होती है।
विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा। पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा। खाने की चीजों की कीमतें सामान्य रहेंगी। दुर्घटनाएं आगजनी आतंक और तनाव होने की संभावना। आंदोलन धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, वायुयान दुर्घटना, विमान में खराबी, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे। सत्ता संगठन में बदलाव होंगे। मनोरंजन फिल्म खेलकूद एवं गायन क्षेत्र से बुरी खबर मिलेगी। बड़े नेताओं का दुखद समाचार मिलने की संभावना।