24 फरवरी को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और मंगलवार का दिन है। होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी 2026 से हो रही है। हिंदू धर्म में होलाष्टक को अशुभ दिनों में से एक माना जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान असुरी शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं और ग्रह उग्र हो जाते हैं। होलाष्टक के प्रत्येक दिन कोई न कोई ग्रह उग्र अवस्था में रहता है। होलाष्टक के पहले दिन चंद्र ग्रह उग्र अवस्था में रहते हैं। होलाष्टक में हनुमान चालीसा का पाठ का करें। होलाष्टक में पूजा पाठ करना शुभकारी माना जाता है।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030
अष्टमी तिथि आज पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। आज पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 26 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। साथ ही आज दोपहर बाद 3 बजकर 7 मिनट तक कृतिका नक्षत्र & मंगलवार को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि
24 फरवरी को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और मंगलवार का दिन है। अष्टमी तिथि आज पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। आज पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 26 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। साथ ही आज दोपहर बाद 3 बजकर 7 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा आज स्वर्ग लोक की भद्रा है। आज दुर्गाष्टमी का व्रत किया जाएगा। इसके अलावा आज से होलाष्टक आरंभ
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक & सूर्योदय का समय: 07:01 ए.एम. सूर्यास्त का समय: 06:42 पी.एम.
24 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो रहा है, जो कि 3 मार्च तक चलेगा। हिंदू धर्म में होलाष्टक को अशुभ समय माना जाता है। इस समय में नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती है। यही वजह है कि होलाष्टक में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा होलाष्टक से पहले इन कामों को पूरा नहीं किया तो आपके घर में नकारात्मकता बढ़ सकती है।
आज से कई स्थानों पर होलाष्टक की शुरुआत के संकेत भी मिलते हैं। आज फाल्गुन शुक्ल अष्टमी है। आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी-अष्टमी है। आज से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं। राहुकाल: दोपहर 03:30 से 04:55 तक (इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं)
होलिका दहन के अगले दिन का पर्व होली/ धुलेंडी सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह वह शुभ समय है जब आप अपनी सोई हुई किस्मत को जगा सकते हैं। यह समय जीवन में नकारात्मकता को मिटाकर सुख-समृद्धि लाने का एक विशेष अवसर भी है।
धुलेंडी के दिन प्राकृतिक रंगों जैसे हल्दी, टेसू के फूल का प्रयोग करना स्वास्थ्य और ग्रहों की शांति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। यदि इस दिन कुछ विशेष कार्य किए जाएं, तो घर में खुशहाली बनी रहती है, चाहे वह रिश्तों में सुधार हो या आर्थिक तंगी से मुक्ति, धुलेंडी के दिन किए गए कार्य और सही कर्म ‘चमत्कारी’ परिणाम देने वाले माने जाते हैं।
दिन की शुरुआत अपने आराध्य देव और पूर्वजों के पूजन से करें। सबसे पहले मंदिर में देवी-देवताओं को गुलाल लगाएं। इसके बाद अपने पितरों का स्मरण करते हुए उनके चित्र के पास थोड़ा गुलाल रखें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
धुलेंडी मेल-मिलाप का त्योहार है। इस दिन अपने माता-पिता, गुरु और बड़े-बुजुर्गों के पैरों में गुलाल लगाकर उनका आशीर्वाद लें। माना जाता है कि ऐसा करने से कुंडली के दोष शांत होते हैं और जीवन के संघर्ष कम होते हैं।
होली की कथा भगवान नरसिंह और प्रह्लाद से जुड़ी है। इस दिन भगवान नरसिंह का स्मरण करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही, धुलेंडी के दिन गुड़, अनाज या अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।
नकारात्मकता को घर से बाहर रखने के लिए धुलेंडी की सुबह अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर थोड़ा-थोड़ा लाल गुलाल छिड़कें। यह एक प्रतीकात्मक तरीका है महालक्ष्मी के स्वागत का और बुरी शक्तियों को घर में प्रवेश करने से रोकने का।
होली ‘दुश्मनी भूलने’ का त्योहार है। यदि किसी से मनमुटाव चल रहा है, तो इस दिन उसे गुलाल लगाकर पुरानी बातें खत्म करें। रिश्तों में सुधार न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा और भाग्य में भी वृद्धि करता है।
- पितरों और इष्ट देव को गुलाल अर्पित करें
- बड़ों के चरणों में गुलाल लगाकर आशीर्वाद लें
- नरसिंह भगवान का ध्यान और दान
- घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़कें
- शत्रुता भुलाकर गले मिलें