पौष पुत्रदा एकादशी व्रत 30 दिसंबर & विष्णु जी को चढ़ाएं ये चीजें & विष्णु के चरणों में तुलसी अर्पित & मनोकामना पूर्ति के लिए चढ़ाएं ये चीज

 TOP HIGH LIGHT & 30 दिसंबर 2025 को प्रात: काल से लेकर सुबह करीब 8 बजे तक पौष माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रहेगी. दशमी तिथि के बाद पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी. & 30 दिसंबर को पौष माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि & भरणी नक्षत्र और सिद्ध योग का संयोग by Chandra Shekhar Joshi Chief Editor Himalayauk News; Leading Newsportal & youtube Channel & Daily Newspaper & Bagula Mukhi Sevak Dehradun Mob. 9412932030

30 दिसंबर, मंगलवार का दिन है. आज पौष माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है और सुबह 7 बजकर 50 मिनट के बाद एकादशी शुरू होगी. पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी कहते हैं और इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं. पंचांग के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. इसके साथ ही त्रिपुष्कर और रवि योग का भी निर्माण हो रहा है. इसके अलावा आज भद्रा का भी साया रहेगा जो कि 06:28 पी एम से 05:00 ए एम, दिसम्बर 31 तक रहेगा. भद्रा को अशुभ मुहूर्त माना गया है. 

यह व्रत संतान प्राप्ति की कामना से भी बहुत ही फलदायी माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय कुछ चीजें अर्पित करना बेहद ही शुभ होता है. संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं तो पौष पुत्रदा एकदाशी के दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें. इसके अलावा विष्णु जी के चरणों में पीले फूल, पीला चंदन, मखाने की खीर और केसर अर्पित करना चाहिए. पूजा के बाद मंदिर में ही बैठकर संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से भगवान विष्णु के आशीर्वाद से घर में बच्चे की किलकारियां गूंजती हैं.

धार्मिक दृष्टि से 30 दिसंबर 2025 का दिन महत्वपूर्ण & साल की आखिरी एकादशी है. कल 30 दिसंबर 2025 को भगवान विष्णु को समर्पित पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि जो लोग सच्चे मन से पौष पुत्रदा एकादशी का उपवास रखते हैं और श्रीहरि की पूजा करते हैं, उन्हें बड़े से बड़े पाप से मुक्ति मिल सकती है. साथ ही जीवन की तमाम समस्याएं दूर होती हैं. & सूर्योदय: सुबह 7 बजकर 13 मिनट पर सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 35 मिनट पर

30 दिसंबर 2025 को पौष माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। इस तिथि पर भरणी नक्षत्र और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त 12:03 − 12:44 मिनट तक रहेगा & 30 दिसम्बर 2025, मंगलवार पौष शुक्ल तिथि दशमी (प्रात: 7.52 तक) तथा तदोपरांत तिथि एकादशी (जो क्षय हो गई है) विक्रमी सम्वत् : 2082, पौष प्रविष्टे 16, राष्ट्रीय शक सम्वत्: 1947, दिनांक: 9 (पौष), हिजरी साल 1

विक्रमी सम्वत् : 2082, पौष प्रविष्टे 16, राष्ट्रीय शक सम्वत्: 1947, दिनांक: 9 (पौष), हिजरी साल 1447, महीना रज्जब, तारीख 9, सूर्योदय: प्रात: 7.30 बजे, सूर्यास्त: सायं 5.30 बजे (जालंधर टाइम), नक्षत्र: भरणी (30-31 मध्य रात 3.59 तक) तथा तदोपरांत नक्षत्र कृतिका, योग: सिद्ध (30-31 मध्य रात 1.02 तक) तथा तदोपरांत योग साध्य, चंद्रमा: मेष राशि पर (पूरा दिन-रात), भद्रा रहेगी (सायं 6.27 से लेकर 30-31 मध्य रात 5.01 तक)। दिशा शूल: उत्तर एवं वायव्य दिशा के लिए, राहूकाल: बाद दोपहर तीन से साढ़े चार बजे तक। पर्व, दिवस तथा त्यौहार: पुत्रदा एकादशी व्रत (स्मार्त)।

ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है और यह व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है. वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा जो कि साल का आखिरी एकादशी व्रत होगा. पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से ही स्पष्ट है कि यह व्रत संतान के लिए रखा जाता है. इस दिन माताएं अपने बच्चों की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना से उपवास रखती हैं. इसके अलावा यह व्रत संतान प्राप्ति की कामना से भी बहुत ही फलदायी माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय कुछ चीजें अर्पित करना बेहद ही शुभ होता है.

अगर कोई व्यक्ति धन-दौलत और सुख-समृद्धि की कामना रखता है तो उसे पौष पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चरणों में तुलसी अर्पित करनी चाहिए. कहते हैं कि विष्णु जी को तुलसी को बेहद प्रिय है और इससे वह प्रसन्न होते हैं. साथ ही विष्णु जी के भोग में भी तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें. लेकिन ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी को हाथ लगाना वर्जित होता है और इसलिए एकादशी व्रत से एक दिन पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए.

मनोकामना पूर्ति के लिए चढ़ाएं ये चीज

पौष पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को केले का भोग अवश्य लगाएं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और रुके हुए कामों में भी सफलता मिलने लगती है. इसके अलावा भगवान विष्णु को केले का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और खुशियां बनी रहती है. विष्णु जी की पूजा पंचामृत का भी विशेष महत्व माना गया है और पंचामृत का भोग लगाने से भगवान विष्णु से प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद देते हैं. ध्यान रखें कि पंचामृत में तुलसी दल अवश्य डालें.

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