‘भद्रकाली जयंती’ , क्यों हुआ उनका धरती पर प्राकट्य
23 मई 2025, शुक्रवार एकादशी तिथि आरंभ: 01:12 सुबह , 23 मई 2025
भद्रकाली जयंती पर माता काली की पूजा करने पर दुखों का नाश होता है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। वैसे तो एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है लेकिन ज्येष्ठ की अपरा एकादशी के दिन मां भद्रकाली का भी व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि मां भद्रकाली की पूजा करने से तमाम रोग, दोष, शोक खत्म हो जाते हैं।
भद्रकाली जयंती हर साल ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन मनाई जाती है। इस बार यह जयंती 23 मई को भारत सहित दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, बंगाल और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में पूरी श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाई जा रही है। देवी भद्रकाली का जन्म भगवान शिव के क्रोध से हुआ था, जब माता सती ने यज्ञ में अपने प्राण त्यागे। इसलिए, मां भद्रकाली का प्राकट्य धरती पर धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और भक्तों की रक्षा हेतु हुआ।
वास्तव में, देवी का यह रूप भय, नकारात्मक ऊर्जा, और असुरी शक्तियों के विरुद्ध अडिग सुरक्षा का प्रतीक है। अंततः, उनका स्मरण करने मात्र से व्यक्ति के भीतर साहस, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
अब देवी के मस्तक पर हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत चढाएं. पुष्पहार पहनायें। प्रसाद में मिठाई और ताजे फल अर्पित करें। अनामिका उंगली से देवी को चंदन, कुमकुम एवं अक्षत का तिलक लगाएं। देवी की आरती उतारें और प्रसाद का वितरण करें। अगले दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर व्रत का पारण करें।
चांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी अपरा एकादशी के दिन भद्रकाली जयंती मनाई जाती है. यह उत्सव भारत के हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर राज्यों में बहुत प्रसिद्ध है. आइए जानते हैं भद्रकाली जयंती 2025 की डेट, मुहूर्त और इस दिन का महत्व.
भद्रकाली जयंती 2025
भद्रकाली जयंती 23 मई 2025 को मनाई जाएगी. भद्रकाली जयंती हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस शुभ दिन पर देवी भद्रकाली भगवान शिव के बालों से प्रकट हुई थीं, जब वे देवी सती की मृत्यु के बारे में सुनकर क्रोधित हो गए थे. देवी शक्ति के ‘अवतार’ का मुख्य कारण पृथ्वी से सभी राक्षसों का नाश करना था.
भद्रकाली जयंती 2025 मुहूर्त
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 मई 2025 को प्रात: 1 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर 23 मई की रात 10 बजकर 29 मिनट तक रहेगी. इस दिन भ भद्रकाली जयंती
भद्रकाली जयंती क्यों मनाई जाती है ?
भद्रकाली जयंती पर माता काली की पूजा करने पर दुखों का नाश होता है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है.वैसे तो एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है लेकिन ज्येष्ठ की अपरा एकादशी के दिन मां भद्रकाली का भी व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि मां भद्रकाली की पूजा करने से तमाम रोग, दोष, शोक खत्म हो जाते हैं.