12 दिसंबर 25 पौष माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि & आपके पोशाक का ग्रहों से है संबंध & ऐसी भविष्‍यवाणी जो पूरे ब्रह्मंड का निजाम बदल देंगी.  भगवान विष्णु अपनी शक्ति से वर्तमान सूर्य और चंद्रमा पुनः उन्हें स्थापित करेंगे.

12 DEC 25 आज का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास है। ग्रहों की स्थिति संकेत दे रही है कि आज उठाए गए छोटे फैसले भविष्य में बड़े लाभ दे सकते हैं। 12 दिसंबर 2025 को शुक्रवार है. शुक्रवार के दिन पर शुक्र ग्रह और माता लक्ष्मी का अमल होता है.

बाब वेंगा की भविष्यवाणी के अनुसार साल 2026 में प्राकृतिक आपदाएं 7 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगी. दुनिया के कई हिस्सें में भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट के संकेत देखने को मिलेंगे. जिससे काफी नुकसान होगा इसका सीधा असर इकोसिस्टम पर पड़ेगा.

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो अगर व्यक्ति अपनी दिनचर्या से जुड़ी और अपने रहन-सहन से जुड़ी कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखे तो उसकी कुंडली में मौजूद ग्रह के अशुभ प्रभावों से बच सकते हैं. इसी तरह अपने कपड़ों को लेकर विशेष ध्यान रखने से जैसे कपड़े कैसे रखे और किस तरह के कपड़े पहनें, इसका ध्यान रखते हुए हम एक साथ शुक्र, बृहस्पति और शनि ग्रह को खराब होने से बचा सकते हैं. 

12 दिसंबर 2025 को अमृत काल- रात 10:03 बजे से लेकर रात 11:47 बजे तक. 12 दिसंबर 2025 को ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:27 से लेकर सुबह 06:15 बजे तक. 12 दिसंबर 2025 को यम गण्ड- दोपहर 02:59 से लेकर शाम 04:18 बजे तक. 12 दिसंबर 2025 को कुलिक- सुबह 08:22 से लेकर सुबह 09:41 बजे तक

2026 की शुरुआत एक बेहद शुभ राजयोग में होगी. यह योग है धनु राशि में बन रहा मंगलादित्‍य राजयोग, जो कि सूर्य और मंगल की युति से बनेगा. दरअसल, 7 दिसंबर 2025 को ग्रहों के सेनापति मंगल गोचर कर चुके हैं और अब 16 दिसंबर 2025 को सूर्य गोचर भी हो रहा है. 

कौन से 3 चमत्कारी इत्र ;दैवीय ऊर्जा बढ़ेगी और घर में पवित्रता और खुशहाली आएगी.

घर में छिड़काव करें कि धन और समृद्धि का आकर्षण बढ़ सके. चंदन का इत्र घर के लिए अति शुभ होता है. चंदन पवित्रता का प्रतीक है. चंदन के इत्र को पूजाघर में छिड़कने से देवता प्रसन्न होते हैं और घर पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं. घर में शांति आती है और धन बढ़ता है. चंदन का इत्र से आध्यात्मिक ऊर्जा का विस्तार होता है. चमेली का इत्र वास्तु अनुसार घर के लिए भाग्यशाली होता है जिसका सुगंध लगभग हर कोई पसंद करता है. घर में चमेली का इत्र छिड़कने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. ऐसे घर में धन की कमी नहीं होती है गुलाब का इत्र प्रेम को बढ़ाता है और घर में पवित्रता बनाए रखता है. ऐसा घर जहां सुबह शाम गुलाब का इत्र छड़का जाए वहां देवी लक्ष्मी का वास होता है. गुलाब का इत्र बेडरूम में छिड़के और इसे ड्राइंग रूम या गेस्ट रूम में भी छिड़क सकते हैं. यह इत्र मानसिक शांति देता है.

भविष्य मालिका में 600 वर्ष पूर्व जो भविष्यवाणियां की गई हैं, उसके अनुसार जब कलियुग का अंत होगा और उसके बाद सतयुग की शुरुआत होगी. तब इस बीच एक समय ऐसा आएगा, जब सूरज लगातार 7 दिन तक आसमान में चमकेगा और फिर 7 दिन तक लगातार रात रहेगी. पूरी धरती पर कई आश्चर्यजनक घटनाएं घटित होंगी. बिजली के सारे उपकरण काम करना बंद कर देंगे. हर तरफ घनघोर अंधेरा होगा. 

भविष्य मालिका में अच्युतानंद दास जी लिखते हैं कि चारों तरफ खून ही खून होगा. भूत, पिशाचिनियाँ और चामुंडा जैसी शक्तियाँ अपने सभी अस्त्र-शस्त्रों के साथ प्रकट होंगी. असंख्य लोगों की मृत्यु होगी.

– जो स्त्रियां अपने पति के अतिरिक्त अन्य पुरुषों का चिंतन करती हैं, वे योगमाया के प्रभाव में आकर अपने पति की हत्‍या कर देंगी. उनका खून चूस लेंगी. वहीं जो स्त्रियां धर्म में स्थित, पवित्र और अपने पति को समर्पित होती हैं, वे और उनके पति सुरक्षित रहेंगी.

– जिस तरह इंसान जानवरों पर अत्‍याचार कर रहे हैं, वैसे ही प्रकृति इंसान से बदला लेगी. जब चारों तरफ अंधकार होगा तब उस समय खूंखार और मांसाहारी जंगली जानवर लोगों के घरों में घुस आएंगे और लोगों को मारकर खा जाएंगे. .

– ना खाने के लिए अन्‍न होगा और ना पीने का पानी, लिहाजा बड़ी संख्‍या में लोग भूख-प्‍यास से व्‍याकुल होकर ही मर जाएंगे. 

इस दौरान धरती पर जो हा-हाहाकार मचेगा, उसमें असंख्‍य लोग मारे जाएंगे और धरती की बमुश्किल एक चौथाई आबादी के लोग ही जीवित बचेंगे. भगवान कल्कि उनकी रक्षा करेंगे. ये वो लोग होंगे प्रभु के सच्चे भक्त होंगे. उन्‍हें अंधेरे में भी सबकुछ स्‍पष्‍ट नजर आएगा. वे ऐसे मुश्किल समय में भी नाम जप और भगवान का कीर्तन करते रहेंगे. इन लोगों को ना भूख लगेगी ना प्‍यास, वे महीनों तक बिना कुछ खाए-पिए जीवित रहेंगे. फिर भी स्‍वस्‍थ रहेंगे. 

सतयुग के अनुरूप पर्यावरण को निर्मल और संतुलित बनाने के लिए नए सूर्य और चंद्रमा की स्थापना आवश्यक होगी. इसलिए भगवान विष्णु अपनी शक्ति से वर्तमान सूर्य और चंद्रमा का नाश करके पुनः उन्हें स्थापित करेंगे. इस कार्य को पूरा करने के लिए सात दिन और सात रात का समय लगेगा. इसलिए इस दौरान धरती पर भयंकर विध्‍वंस होगा और केवल भगवान के भक्‍त ही जीवित बचेंगे. 

 ग्रहों में शुक्र का स्थान मानवी जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. शुक्र द्वारा बने ज्योतिष योग क्या क्या है, यह इस विषय में देखेंगे मानवी जीवन में मनोरंजन का दुसरा नाम शुक्र है. शुक्र ही जीवन के सारे दुःख भुलाने की दवा है. संसार के सभी प्रकार के सुख कारक ग्रह शुक्र है.

ज्योतिष में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और सारे प्रकार के डिजाइनिंग आदि का कारक माना गया है. शुक्र की स्वयं की दो राशियाँ है, वृषभ और तुला राशि, तथा मीन राशि शुक्र की उच्चतम राशि है, और कन्या राशि शुक्र की नीच राशि मानी गयी है. शुक्र 27 नक्षत्रों में से भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामि है. शुक्र बुध का मित्र तथा शनि परम मित्र ग्रह है. सूर्य और चन्द्रमा शुक्र के शत्रु माने जाते है.

शुक्र ग्रह से संबंधित योग

लग्न भाव पर प्रभाव डालने वाला शुक्र जातक को नृत्य, चित्र, गायन, वादन, कला के प्रति रूचि और आकर्षण पैदा कराता है. शुक्र के प्रभाव से जातक काम भाव, भोग विलास संबंधी चीज़ों को अधिक प्राथमिकता देता है. जातक की कुंडली में शुक्र का प्रभाव होने से वह चित्रकार, गायक, नर्तक, कलाकार, अभिनेता आदि बनता है.

शुक्र द्वारा बने ज्योतिष योग : पत्नी योग, किसी भी प्रकार की कलाकारी, संगीत, यौन समस्या, किसी भी शौक से सबंधित कार्य, मनोरंजन सबंधित कार्य आदि सबंधित योग शुक्र से देखे जाते है.

शुक्र ग्रह से संबंधित व्यवसाय

सिनेमा, शयन गृह, बगीचा, बैंकेट हॉल, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, बंदरगाह, हवाई हड्डा, खादानें, देह व्यापार क्षेत्र आदि शुक्र के स्थान है.

शुक्र का वैदिक मंत्र

ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:।
ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।

शुक्र का तांत्रिक मंत्र

ॐ शुं शुक्राय नमः

शुक्र का बीज मंत्र

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

शुक्र का रत्न – हीरा

रुद्राक्ष – छः मुखी रुद्राक्ष

शुक्र का रंग – गुलाबी

शुक्र का यंत्र – शुक्र यंत्र

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