13 अक्टूबर सोमवार, राधा कुंड स्नान,  कालाष्टमी, अहोई अष्टमी ; आध्यात्मिक समाचार; पंचदिवसीय दीवाली (दीपोस्तव) 6 दिन 

13 अक्तूबर 2025 – राधा कुंड स्नान, अहोई अष्टमी, कालाष्टमी- कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस तिथि पर आर्द्रा नक्षत्र और परिघा योग का संयोग बन रहा है। सोमवार को अभिजीत मुहूर्त 11:40− 12:26 मिनट तक रहेगा। राहुकाल सुबह 07:46 − 09:12 मिनट तक रहेगा। सूर्योदय 6:26 AM और सूर्यास्त 5:59 PM पर ; आज का दिन हर दृष्टि से शुभ फलदायी है। अगर किसी शुभ काम को शुरू करना हो, BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR; HIMALAYAUK NEWS : Leading Newsportal & youtube Channel & Daily Newspaper

सोमवार को ग्रहों के सेनापति ‘मंगल’ नक्षत्र गोचर करेंगे. मंगल के इस नक्षत्र गोचर का प्रभाव &  13 अक्टूबर 2025 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि रहेगी. साथ ही आद्रा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, परिघ योग, शिव योग, सिद्ध योग, बव करण, बालव करण और कौलव करण का निर्माण हो रहा है. इसके अलावा सोमवार को सुबह 9 बजकर 29 मिनट पर ग्रहों के सेनापति मंगल विशाखा नक्षत्र में गोचर करेंगे, जिसका प्रभाव सभी राशियों 

पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। इसकी मदद से हम दिन के हर बेला के शुभ और अशुभ समय का पता लगाते हैं।

 13 अक्टूबर सोमवार का दिन है।कार्तिक माह (Kartik Month) की कार्तिक कृष्ण पक्षसप्तमी तिथि 12:24 PM तक उपरांत अष्टमी ,नक्षत्र आद्रा 12:26 PM तक उपरांत   अष्टमी ,नक्षत्र आद्रा 12:26 PM तक उपरांत पुनर्वसु , परिघ योग 08:10 AM तक, उसके बाद शिव योग 05:55 AM त आद्रा – Oct 12 01:36 PM – Oct 13 12:26 PM पुनर्वसु – Oct 13 12:27 PM – Oct 14 11:54 AM  

पंचदिवसीय दीवाली (दीपोस्तव) 6 दिन 

 पंचदिवसीय दीवाली (दीपोस्तव) 6 दिन  ; 18 अक्टूबर के दोपहर 12:19 तक द्वादशी तिथि ही रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि लग जाएगी। 18 अक्टूबर को दिन से लेकर रात तक त्रयोदशी तिथि रहेगी, इसलिए इसी दिन धनतेरस का त्योहार मनाना शुभ रहेगा। फिर 19 अक्टूबर को भी त्रयोदशी तिथि दोपहर 01 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसलिए आप त्रयोदशी की पूजा और खरीदारी इस दिन भी कर सकेंगे। 19 अक्टूबर का दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए भी शुभ है।  कार्तिक कृष्ण की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली मनाई जाती है और कार्तिक कृष्ण की चतुर्दशी 20 अक्टूबर 2025 को रहेगी। इस दिन चतुर्दशी तिथि दोपहर 3:45 तक रहेगी। इसके बाद अमावस्य तिथि लग रही है। अमावस्या तिथि के प्रदोष काल में ही लक्ष्मी पूजन का विधान है। इसलिए 20 अक्टूबर को ही सुबह नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी और फिर शाम के समय प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। यानी 20 को ही दिवाली मनेगी।

दिवाली, हिंदुओं के सबसे बड़े व खास त्योहारों में से एक है. इस दिन लोग भगवान गणेश और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. साथ ही रातभर पटाखे जलाते हैं. इस बार 20 अक्टूबर 2025, वार सोमवार को दिवाली का पर्व मनाया जाएगा. ज्योतिष दृष्टि से देखें तो दिवाली से पहले और बाद का समय बेहद खास है क्योंकि इस दौरान कई शुभ योग, युति और महायुति का निर्माण हो रहा है. द्रिक पंचांग के अनुसार, दिवाली के एक दिन बाद यानी 21 अक्टूबर 2025 को तुला राशि में बुध ग्रह, सूर्य ग्रह और चंद्र देव मौजूद होंगे, जिससे महायुति बन रही है.

17 अक्टूबर को ग्रहों के राजा सूर्य तुला राशि में गोचर करेंगे, जिसके बाद 21 अक्टूबर 2025 को चंद्र देव भी तुला राशि में कदम रखेंगे. वहीं, बुध देव इस समय तुला राशि में ही मौजूद हैं. 3 अक्टूबर से लेकर 24 अक्टूबर तक बुध देव तुला राशि में ही रहेंगे. ऐसे में दिवाली के एक दिन बाद यानी 21 अक्टूबर 2025 को तुला राशि में बुध ग्रह, सूर्य ग्रह और चंद्र देव की महायुति बनेगी.

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