14 अक्टूबर 2026 बुधवार & आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि & शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन, मां कूष्मांडा की पूजा & सूर्योदय: सुबह 06:21 AM सूर्यास्त: शाम 05:53 PM & राहुकाल: दोपहर 12:07 PM से 01:33 PM & गजकेसरी योग बेहद शुभ योग :नवरात्रि में दो बार ये शुभ योग : यह योग 18 से 21 अक्टूबर तक के लिए बनेगा; 18 अक्टूबर 2026, रविवार सप्तमी (सुबह 08:28 AM तक, उपरांत अष्टमी) 19 अक्टूबर 2026- अष्टमी पूजा- कुमारी पूजा संधि पूजा 20 अक्टूबर 2026- नवमी पूजा- बंगाल महा नवमी, दुर्गा बलिदान 21 अक्टूबर 2026- बंगाल विजयादशमी, बंगाल दुर्गा विसर्जन, सिंदूर उत्सव

14 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और बुधवार का दिन है। कल चतुर्थी तिथि देर रात 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। नवरात्र का चौथा दिन है, जो मां कूष्मांडा को समर्पित है। वहीं, कल रात 8 बजकर 39 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा। साथ ही कल 14 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 3 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत
नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। अपनी मंद हंसी से ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। संस्कृत भाषा में कुष्माण्डा कुम्हड़े को कहा जाता है और कुम्हड़े की बलि इन्हें बहुत प्रिय है, जिसके कारण भी इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। माता का वाहन सिंह है | मां कुष्माण्डा की आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है । इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा नजर आता है तो आठवें हाथ में जप की माला। कहते हैं इस जप की माला में सभी सिद्धियों और निधियों का संग्रह है।

शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा में अंतर
नवरात्रि का यह उत्सव आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होकर नवमी तक यानी पूरे 9 दिनों तक चलता है। इसके बाद दशमी के दिन दशहरा मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर से हुआ है और समाप्त 19 अक्टूबर 2026 को होगा। वहीं दुर्गा पूजा षष्ठी दिन से शुरू होता और विजयादशमी तक यानी मुख्य रूप से 5 दिनों तक चलता है। हालांकि दुर्गा पूजा तैयारी महालया से शुरू हो जाती है।
मां दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी की आराधना और पृथ्वी पर आगमन की परंपरा
नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा जाती है। वहीं दुर्गा पूजा में मां दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी की आराधना और पृथ्वी पर आगमन की परंपरा से जुड़ा होता है। दुर्गा पूजा में माता दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और पूजा पंडाल सजाए जाते हैं। दोनों पर्व शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं।
नवरात्रि
नवरात्रि में 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों (नवदुर्गा) शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक की पूजा की जाती है। नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक चलती है।
दुर्गा पूजा
दुर्गा पूजा में मुख्य रूप से महिषासुरमर्दिनी रूप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा में मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिक, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती भी विराजमान होते हैं। बंगाल की परंपरा में षष्ठी के दिन देवी का बोधन और आमंत्रण किया जाता है। इसी दिन से दुर्गा पूजा का मुख्य चरण आरंभ होता है।
- 16 अक्टूबर 2026- षष्ठी पूजा, बिल्व निमंत्रण, कल्पारंभ अकाल बोधन, आमंत्रण और अधिवास
- 17 अक्टूबर 2026 – सप्तमी पूजा- नवपत्रिका पूजा, कोलाबोऊ पूजा
- 19 अक्टूबर 2026- अष्टमी पूजा- कुमारी पूजा संधि पूजा
- 20 अक्टूबर 2026- नवमी पूजा- बंगाल महा नवमी, दुर्गा बलिदान
- 21 अक्टूबर 2026- बंगाल विजयादशमी, बंगाल दुर्गा विसर्जन, सिंदूर उत्सव
आरती दुर्गा जी की॥
जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
मांग सिंदूर विराजत,
टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना,
चंद्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला,
कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
केहरि वाहन राजत,
खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर,
सम राजत ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे,
महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,
निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी,
तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा,
अरू बाजत डमरू॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
तुम ही जग की माता,
तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता।
सुख संपति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
भुजा चार अति शोभित,वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत,
सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत,
कोटि रतन ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
श्री अंबेजी की आरती,
जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी,
सुख-संपति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी।