16 नवंबर 2025 ;सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग

 16 नवंबर को मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की द्वादशी है जिसे कृष्ण योगेश्वर द्वादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन उत्पन्ना एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। इसके अलावा इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश कर रहे हैं इसलिए वृश्चिक संक्रांति भी मनाई जाएगी। 16 नवम्बर 2025, रविवार मार्गशीर्ष कृष्ण तिथि द्वादशी (16-17 मध्य रात 4.36 तक) तथा तदोपरांत तिथि त्रयोदशी विक्रमी सम्वत् : 2082, मार्गशीर्ष प्रविष्टे 1, राष्ट्रीय शक सम्वत्: 1947, दिनांक: 25 (कार्तिक), हिजरी साल 1447

16 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस तिथि पर हस्त नक्षत्र और विष्कंभ योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें रविवार को अभिजीत मुहूर्त 11:41 − 12:23 मिनट तक रहेगा। राहुकाल शाम 16:01 − 17:20 मिनट तक रहेगा।

राहु ग्रह 23 नवंबर की सुबह शतभिषा नक्षत्र में गोचर कर जाएंगे। शतभिषा नक्षत्र के स्वामी ग्रह राहु ही हैं, ऐसे में यह परिवर्तन कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ और लाभदायक साबित हो सकता है। आपको बता दें कि वर्तमान समय में राहु कुंभ राशि में विराजमान हैं। राहु के नक्षत्र परिवर्तन से किन राशियों के अच्छे दिन शुरू; मेष राशि के जातकों के लिए राहु का यह गोचर अत्यंत शुभ रहेगा।  कन्या राशि के छठे भाव में राहु वर्तमान में स्थित हैं। वहीं जैसे ही राहु नक्षत्र बदलेंगे तो आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। आपको ऐसे लोगों से धन की प्राप्ति हो सकती है जिनसे धन मिलने की आपने कभी उम्मीद भी नहीं की होगी। आपके तृतीय भाव में राहु विराजमान हैं और इनका नक्षत्र परिवर्तन करना आपके भाग्य में सुधार करेगा। आपको विभिन्न स्रोतों से धन लाभ प्राप्त हो सकता है। सेहत में भी अच्छे बदलाव आएंगे। लंबे समय से जॉब बदलने का विचार बना रहे थे तो आपका ये सपना साकार हो सकता है। इस राशि के कुछ लोगों को जॉब बदलने पर मनाचाहा सैलरी पैकेज मिलने के योग हैं। आपके साहस और पराक्रम में भी वृद्धि देखने को मिलेगी। 

 16 नवंबर 2025 का दिन बेहद खास साबित होगा क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग रहेगा। ये दोनों ही योग शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माने जाते हैं। इसके अलावा इस दिन वृश्चिक संक्रांति भी मनाई जाएगी। सूर्य देव दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर जायेंगे। वहीं इस दिन उत्पन्ना एकादशी व्रत का पारण भी किया जाएगा।

  • वृश्चिक संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त – 08:02 AM से 01:45 PM
  • वृश्चिक संक्रान्ति महा पुण्य काल – 11:58 AM से 01:45 PM

उत्पन्ना एकादशी पारण मुहूर्त 2025 (Utpanna Ekadashi Paran Time 2025)

उत्पन्ना एकादशी व्रत का पारण समय दोपहर 01:10 से 03:18 बजे तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 09:09 बजे का है।

16 नवंबर 2025 शुभ मुहूर्त (16 November 2025 Shubh Muhurat)

  • ब्रह्म मुहूर्त 04:58 ए एम से 05:51 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या 05:25 ए एम से 06:45 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त 11:44 ए एम से 12:27 पी एम
  • विजय मुहूर्त 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त 05:27 पी एम से 05:54 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या 05:27 पी एम से 06:47 पी एम
  • अमृत काल 07:32 पी एम से 09:18 पी एम
  • निशिता मुहूर्त 11:40 पी एम से 12:33 ए एम, नवम्बर 17
  • द्विपुष्कर योग 02:11 ए एम, नवम्बर 17 से 04:47 ए एम, नवम्बर 17
  • सर्वार्थ सिद्धि योग 06:45 ए एम से 02:11 ए एम, नवम्बर 17
  • अमृत सिद्धि योग 06:45 ए एम से 02:11 ए एम, नवम्बर 17

16 नवंबर 2025 अशुभ समय (16 November 2025 Ashubh Time)

  • राहुकाल 04:07 पी एम से 05:27 पी एम
  • यमगण्ड 12:06 पी एम से 01:26 पी एम
  • गुलिक काल 02:46 पी एम से 04:07 पी एम
  • विडाल योग 02:11 ए एम, नवम्बर 17 से 06:45 ए एम, नवम्बर 17
  • वर्ज्य 08:53 ए एम से 10:39 ए एम
  • दुर्मुहूर्त 04:01 पी एम से 04:44 पी एम
  • बाण अग्नि – 01:45 पी एम तक
  • वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज का पंचांग दैनिक हिंदू कैलेंडर ही है जो आज की तिथि के बारे में बताता है, और इसके बीच शुभ और अशुभ समय की जानकारी देता है। यह विजय विश्व पंचांग पर आधारित है, जो पंचांग में सबसे दुर्लभ है, जिसका उपयोग विशेषज्ञ ज्योतिषियों द्वारा सैकड़ों वर्षों से किया जा रहा है। दैनिक पंचांग के माध्यम से, आप एक शुभ कार्य या एक नया उद्यम शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय निर्धारित करने के लिए समय, तिथि और दिन के बारे में सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और सभी नकारात्मक प्रभावों और अनावश्यक परेशानियों को दूर कर सकते हैं।
  • पंचांग या पंचागम् हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से 5 अवयवों का गठन होता है, अर्थात् तिथिवारनक्षत्रयोग एवं करण। पंचांग मुख्य रूप से सूर्य और चन्द्रमा की गति को दर्शाता है। हिन्दू धर्म में हिन्दी पंचांग के परामर्श के बिना शुभ कार्य जैसे शादी, नागरिक सम्बन्ध, महत्वपूर्ण कार्यक्रम, उद्घाटन समारोह, परीक्षा, साक्षात्कार, नया व्यवसाय या अन्य किसी तरह के शुभ कार्य नहीं किये जाते ।
  • दैनिक पंचांग और उसका महत्व
  • प्राचीन ऋषियों और वेदों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करता है, तो वह सकारात्मक तरीके से प्रतिक्रिया देता है और व्यक्ति को उसके कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद करता है। हिन्दू दैनिक पंचांग इस सौहार्द को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके उपयोग से व्यक्ति को तिथि, योग और शुभ-अशुभ समयों में ज्योतिषीय अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। जिससे हम सूक्ष्म संचार के आधार पर उपयुक्त समय के बारे में जान सकते हैं और अपने समय और कार्य का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।
  • ज्योतिषी लोगों को सुझाव देते हैं कि वे अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।

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