16 जनवरी को माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि & 16 जनवरी 2026 को माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस तिथि पर मूल नक्षत्र और ध्रुव योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो गुरुवार शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त 12:06 − 12:48 मिनट तक रहेगा। राहुकाल सुबह 11:09 − 12:27 मिनट तक रहेगा। by Chandra Shekhar Joshi Mob. 9412932030; Bagla Mukhi Peeth Dehradun
ग्रहों के गोचर आपकी जिंदगी की दिशा बदल सकते हैं। 16 जनवरी 2026, शुक्रवार को कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि है। इस दिन प्रदोष व्रत, मेरु त्रयोदशी और मासिक शिवरात्रि जैसे विशेष व्रत

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 विक्रम संवत 2082 के माघ मास, कृष्ण पक्ष की महत्वपूर्ण त्रयोदशी तिथि & इस दिन मासिक शिवरात्रि और शुक्र प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। ग्रह-नक्षत्रों की चाल आज कई राशियों के लिए सफलता, आर्थिक लाभ और पारिवारिक सुख के संकेत दे रही है।
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन सूर्यास्त के समय शिव पूजन करने से रोग, कष्ट और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है। शुक्रवार को होने के कारण यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाता है, जो विशेष फलदायी माना जाता है। 16 जनवरी 2026 का दिन शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदोष व्रत, मेरु त्रयोदशी और मासिक शिवरात्रि के कारण यह तिथि पूजा, व्रत और साधना के लिए विशेष शुभ मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा से की गई शिव आराधना जीवन में शांति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

ज्योतिष में, जब कोई ग्रह किसी भाव से गुजरता है, तो उसका असर हर किसी पर अलग पड़ता है वैदिक ज्योतिष में ये गोचर यानी Planets की मूवमेंट ही तय करती है कि आपके जीवन में कब कौन सी ऊर्जा आएगी और कौन सा वक्त शुभ है या थोड़ा संभलकर चलने वाला। ज्योतिषी इन्हीं गोचरों का अध्ययन करके बताते हैं कि कब क्या करना अच्छा रहेगा और कब किस बात से बचना चाहिए।
ज्योतिष की दुनिया में, ग्रहों का गोचर किसी भी इंसान की जिंदगी में बड़ा फर्क डाल सकता है। गोचर का मतलब है ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि में जाना। गोचर यानी मूवमेंट। ज्योतिष में ये तब होता है जब कोई ग्रह एक राशि छोड़कर दूसरी में जाता है। हर ग्रह की स्पीड अलग है, इसलिए हर कोई किसी राशि में अलग-अलग समय तक टिकता है। चंद्रमा सबसे तेज है, वहीं शनि सबसे धीमा। जब कोई ग्रह नई राशि में घुसता है, तो उसे राशि परिवर्तन कहते हैं। ये मूवमेंट आपकी जन्म कुंडली के हिसाब से सीधे आप पर असर डालता है।
वैदिक ज्योतिष में, ग्रहों का गोचर सिर्फ़ तारों की चाल नहीं है—ये ब्रह्मांड की ऊर्जा में बदलाव लाते हैं। नौ ग्रह—सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु—हर एक का अपना असर है। आपकी कुंडली में ये जहां बैठे हैं, वहां से ये या तो अच्छा फल देते हैं या थोड़ा मुश्किल वक्त लेकर आते हैं। ज्योतिषी इन्हीं गोचरों को देखकर बताते हैं कि किसकी जिंदगी में कब क्या बदलाव, मौका या चुनौती आने वाली है।