17 नवंबर 2025 सोम प्रदोष/मार्गी शनि गतिचार ; नवंबर की वो डरावनी तारीख जब कलियुग के दंडाधिकारी बदलेंगे चाल, मार्गी मतलब, न्याय का पहिया घूमेगा.उत्तराखण्ड: त्राहिमाम, त्राहिमाम

17 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस तिथि पर चित्रा नक्षत्र और प्रीति योग का संयोग बन रहा है। सोमवार को अभिजीत मुहूर्त 11:41 − 12:23 मिनट तक रहेगा। राहुकाल सुबह 08:04 − 09:23 मिनट तक रहेगा & यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें। & नवंबर की वो डरावनी तारीख जब कलियुग के दंडाधिकारी बदलेंगे चाल & शनि के मार्गी होने का अर्थ है , कर्म का लेखा-जोखा अब पूरा होगा. 138 दिनों की परीक्षा समाप्त, और परिणाम घोषित. यह समय है मेहनत का फल पाने और गलतियों से सबक लेने का. जो लोग सत्य, अनुशासन और जिम्मेदारी से जुड़े रहे, उनके लिए नवंबर का अंत एक नई शुरुआत साबित होगा.

बगला ब्रह्मास्त्र जाप: इस शब्द को तीन बार दोहराकर, भक्त पूरी तरह से माँ बगलामुखी की शरण में जाता है और उनसे तत्काल सुरक्षा का अनुरोध करता है। यह महामाई को जाग्रत कर देता है: त्राहिमाम त्राहिमाम त्राहिमाम 0 क्षमा,, रक्षा,, हे भगवती, अखिलेश्वरी राजराजेश्वरी , सर्वेश्वरी, विश्वेश्वरी, त्राहिमाम त्राहिमाम त्राहिमाम — यह जाप परम सुरक्षा और गंभीर संकटों से मुक्ति के लिए किया जाता है। यह शब्द देवी बगलामुखी से शरण और सहायता मांगने का एक अत्यंत भावपूर्ण और शक्तिशाली तरीका है। बगला मुखी के समक्ष यह आह्वान का उपयोग ज्ञात और अज्ञात शत्रुओं द्वारा उत्पन्न बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जाओं और काले जादू से सुरक्षा पाने के लिए किया जाता है। यह मंत्र भक्त के रास्ते में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। कुल मिलाकर यह ब्रह्मास्त्र है, जिसका संक्षिप्त वर्णन मेरे द्वारा बताया गया है सादर चन्द्रशेखर जोशी ( आचार्य तमगा शीघ्र ) बगला मुखी पीठ देहरादून MOB. 9412932030

सोम प्रदोष व्रत पर त्रयोदशी तिथि 17 नवंबर को सुबह 4 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 18 नवंबर को सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

17 नवंबर को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि & चित्रा नक्षत्र और प्रीति योग का संयोग &  17 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी. साथ ही चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, प्रीति योग, आयुष्मान योग, गर करण और वणिज करण का निर्माण हो रहा है. नवग्रहों के बारे में बात करें तो केवल चंद्र ग्रह का राशि गोचर होगा. देवों के देव महादेव को समर्पित सोमवार को चंद्र ग्रह तुला राशि में गोचर करेंगे.

शुभ समय- 6:00 से 7:30 तक, 9:00 से 10:30 तक, 3:31 से 6:41 तक ^ राहुकाल (अशुभ समय):प्रात: 7:30 से 9:00 बजे तक  & आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:। आज का उपाय-शिवजी का पंचामृत से अभिषेक करें। & वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।

17 नवंबर 2025, सोमवार को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत रखा जाएगा, जिसे सोम प्रदोष कहते हैं।  & त्रयोदशी तिथि 17 नवंबर को सुबह 04:47 बजे शुरू होगी और 18 नवंबर को सुबह 07:12 बजे समाप्त होगी। & प्रदोष व्रत में पूजा का विशेष महत्व सूर्यास्त के बाद के ‘प्रदोष काल’ में होता है। 17 नवंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:27 बजे से रात 08:07 बजे तक रहेगा।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। भक्त दिन भर व्रत या फलाहार करते हैं और शाम को स्नान के बाद पूजा स्थल को शुद्ध करते हैं। शिवलिंग का अभिषेक दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से किया जाता है, फिर बेलपत्र, धतूरा, और भस्म अर्पित किया जाता है। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप और प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। 

शनि देव 28 नवंबर 2025 को मीन राशि में रहते हुए वक्री (उलटी चाल) से मार्गी (सीधी चाल) होंगे।  शनि की चाल में यह परिवर्तन एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। जब शनि मार्गी होते हैं, तो कर्मों का फल थोड़ा जल्दी और स्पष्ट रूप से मिलने लगता है।

मार्गशीर्ष महीने का पहला प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ रहा है। सोमवार के दिन पड़ने से इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मार्गशीर्ष का महीना देवताओं का अत्यंत प्रिय महीना होता है ऐसे में सोम प्रदोष व्रत और अधिक फलदायी बन जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित होता है। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 17 नवंबर 2025, सोमवार की सुबह 4 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 18 नवंबर की सुबह 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 17 नवंबर को सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

इस व्रत को प्रदोष काल यानी शाम के समय किया जाता है। सूर्यास्त के बाद 1.5 घंटे के समय को प्रदोष काल माना जाता है। इसी अवधि में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और प्रदोष स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्त मिलती है और आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है

प्रदोष व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद सूर्यदेव को जल चढ़ाकर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन उपवास रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान को बेल पत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, और फूल अर्पित करें और शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इसके बाद पूजा भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और प्रसाद बांटें। पूजा संपन्न होने के बाद अपना उपवास खोलें।

 13 जुलाई 2025 से वक्री चल रहे शनि देव 28 नवंबर 2025 को मार्गी हो जाएंगे. यह बदलाव केवल ग्रहों की चाल नहीं, बल्कि कर्म-संतुलन का निर्णायक मोड़ है. जब शनि वक्री होते हैं, तो जीवन की प्रगति धीमी पड़ जाती है, काम रुकते हैं, योजनाएं अटकती हैं और निर्णय उलझ जाते हैं. लेकिन जब वे दोबारा सीधी चाल में आते हैं, तो कर्म-फल की गति तेज होती है. अब जो मेहनत से चलते रहे, उनके लिए यह इनाम का समय है, और जो कर्तव्य से भागे उनके लिए चेतावनी का.

उनका मार्गी होना मतलब है , न्याय का पहिया फिर घूमेगा. अब छिपी हुई सच्चाइयां सामने आएंगी, अधूरे फैसले पूरे होंगे, और हर व्यक्ति अपने कर्मों के परिणाम से साक्षात्कार करेगा. मीन राशि में उनका मार्गी होना समाज, अर्थव्यवस्था और व्यक्तिगत रिश्तों में नए संतुलन का संकेत है.

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