गुरुवार के दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। कल सूर्य षष्ठी का व्रत रखा जाएगा। इसके साथ ही विश्वकर्मा जयंती & 17 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और गुरुवार का दिन है। कल षष्ठी तिथि सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसके बाद उसके बाद सप्तमी तिथि लग जाएगी। इसके अलावा कल सूर्य षष्ठी व्रत किया जायेगा। वहीं, कल शाम 7 बजकर 53 मिनट तक रवि योग रहेगा। साथ ही कल 17 सितंबर को शाम 7 बजकर 54 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। कल भगवान विश्वकर्मा जयंती भी है। इसके अलावा कल सुबह 7 बजकर 52 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में गोचर करेगा। सूर्योदय- सुबह 06:07 बजे सूर्यास्त- शाम 06:24 बजे & घर से निकलने से पहले पीली सरसों, दही या जीरा खाकर निकलें। साथ ही भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का ध्यान करें।
भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत से परिपूर्ण हो! कल्याण हो! BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR ; MY PROFILE; ATTACH;

श्री राधा रानी की सबसे प्रिय सखी ललिता देवी का प्राकट्य दिवस & माताएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए ललिता षष्ठी और संतान सातें का व्रत रखती हैं। कन्या संक्रांति पर तांबे के बर्तन, गेहूं, गुड़ और पीले वस्त्रों का दान करें।
भगवान विश्वकर्मा का जन्म सूर्य संक्रांति के दिन हुआ था। विश्वकर्मा जी को धरती के प्रथम इंजीनियर और देवताओं का शिल्पकार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही सतयुग में स्वर्ग, त्रेतायुग में लंका, द्वापर में द्वारिका और कलियुग में जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों का निर्माण किया
- भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि – 17 सितंबर को सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक
- रवि योग- 17 सितंबर को शाम 7 बजकर 53 मिनट तक
- अनुराधा नक्षत्र- 17 सितंबर को शाम 7 बजकर 54 मिनट तक
- 17 सितंबर 2026 विशेष- सूर्य षष्ठी व्रत, विश्वकर्मा जयंती, सूर्य का कन्या राशि में गोचर
विक्रमी संवत: 2083
शक संवत: 1948 (पराभव)
मास: भाद्रपद
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: षष्ठी तिथि (सुबह 10:48 बजे तक, इसके बाद सप्तमी तिथि आरंभ)
नक्षत्र: अनुराधा नक्षत्र (शाम 07:53 बजे तक, इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र)
योग: विष्कुम्भ योग (दोपहर 12:49 बजे तक, उसके बाद प्रीति योग)
करण: तैतिल करण (सुबह 10:48 बजे तक, फिर गर करण)
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:33 बजे से सुबह 05:20 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:18 बजे से दोपहर 03:07 बजे तक
अमृत काल: सुबह 08:24 बजे से सुबह 10:10 बजे तक
रवि योग: शाम 07:53 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 01:48 बजे से दोपहर 03:20 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:33 ए एम से 05:20 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 04:57 ए एम से 06:07 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:51 ए एम से 12:40 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:18 पी एम से 03:07 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:24 पी एम से 06:47 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 06:24 पी एम से 07:34 पी एम
- अमृत काल- 08:24 ए एम से 10:10 ए एम
गुरु और चंद्रमा दोनों ही ज्योतिष के शुभ ग्रह हैं। इन दोनों के बीच जब भी कोई योग बनता है तो शुभ फल कुछ राशियों को प्राप्त हो सकते हैं। ऐसा ही शुभ योग 18 सितंबर की रात में भी बनेगा। रात्रि 10 बजकर 45 मिनट पर चंद्रमा गुरु की राशि धनु में गोचर करेंगे वहीं इस दौरान गुरु, चंद्र ग्रह की राशि कर्क में हैं। ऐसे में दोनों ग्रह एक दूसरे की राशियों में होंगे और राशि परिवर्तन योग बनेगा।
कर्क राशि
चंद्रमा आपकी ही राशि के स्वामी हैं, इसलिए गुरु और चंद्रमा के बीच बनने वाले राशि परिवर्तन योग से आप अपने शत्रुओं को परास्त कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में अधूरे काम भी इस दौरान पूरे हो सकते हैं। माता के पक्ष के लोगों से धन लाभ मिल सकता है। प्रथम भाव में बैठे गुरु आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएंगे जिसके चलते आपका प्रदर्शन जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर हो सकता है।
कन्या राशि
राशि परिवर्तन योग के दौरान गुरु आपके एकादश भाव यानि कि लाभ के भाव में होंगे और चंद्रमा सुख के चतुर्थ भाव में। इसलिए आपके लिए गुरु-चंद्र का यह योग बेहद लाभदायक साबित हो सकता है। इस राशि के कारोबारियों को अच्छी डील मिल सकती है, वहीं कुछ लोग अपना काम शुरू कर पाने में भी कामयाब हो सकते हैं। पारिवारिक जीवन में भाई-बहनों का भी आपको भरपूर सहयोग प्राप्त हो सकता है। माता के स्वास्थ्य में अच्छे बदलाव आ सकते हैं।
धनु राशि
गुरु आपकी राशि के स्वामी हैं और 18 सितंबर को चंद्रमा के साथ राशि परिवर्तन योग बनाएंगे। इस योग के चलते आपको अचानक से धन लाभ मिलने के योग हैं। आपके व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। अपनी वाणी से आप लोगों को सामाजिक स्तर पर प्रभावित कर सकते हैं। आर्थिक रूप से भी उन्नति के मार्ग पर आप अग्रसर हो सकते हैं। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलने के योग हैं।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के पंचम भाव में गुरु और दसवें भाव में चंद्रमा, राशि परिवर्तन योग के दौरान विराजमान रहेंगे। इस योग के चलते आपकी बौद्धिक क्षमता बढ़ सकती है। आप सही समय पर सही फैसले ले पाने में कामयाब हो सकते हैं। आपके अटके हुए कार्यों को भी गति मिलने के योग हैं। बेरोजगार लोगों को मनचाही जगह पर रोजगार मिल सकता है। उधार दिया धन वापस मिलने से आपकी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है।

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 3 अक्तूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि का समापन 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, जितिया का व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। जितिया व्रत के दिन जीमूतवाहन भगवान की पूजा की जाती है। हर साल आश्विन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन महिलाएं जितिया यानी जीवित्पुत्रिका का व्रत रखती हैं। इस दिन व्रती महिलाएं पूरा दिन और रात निर्जला उपवास रखती हैं। जितिया व्रत का पारण मुहूर्त देखकर ही किया जाता है। मुहूर्त से पहले पारण करने से व्रत का फल प्राप्त नहीं होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जितिया का व्रत करने से संतान दीर्घायु और निरोगी होती है। संतान पर आने वाला हर संकट दूर हो जाता है और उन्हें सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
- by ; CHANDRA SHEKHAR JOSHI ;
- Award : Sanatan Dharma Journalist of The Year 2026 अवॉर्ड: सनातन धर्म जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर , नई दिल्ली में सम्मानित
- Awardy : Aadi Guru shankaracharya Sanatani Sewa Puruskar आदि गुरु शंकराचार्य सनातनी सेवा पुरस्कार, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक जी द्वारा सम्मानित &
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