22 सितंबर 2026 & मंगलवार विक्रमी संवत: 2083 शक संवत: 1948 (पराभव) मास: भाद्रपद
पक्ष: शुक्ल पक्ष तिथि: एकादशी तिथि (रात 09:44 PM तक, इसके पश्चात द्वादशी तिथि)
व्रत/पर्व: परिवर्तिनी एकादशी & सूर्योदय: सुबह 06:09 AM सूर्यास्त: शाम 06:10 PM & राहुकाल: दोपहर 03:10 PM से शाम 04:40 PM तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:46 AM से 12:34 PM तक
22 सितंबर 2026 को शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रात 9:44 PM तक रहेगी और मंगलवार का दिन है। आज परिवर्तिनी एकादशी का पर्व भी है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से दिन का महत्व बढ़ जाता है। पंचांग के अनुसार सुबह नक्षत्र और करण की स्थिति में बदलाव होगा, जबकि दोपहर और शाम के बीच योग भी परिवर्तित होगा।

मंगलवार को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट लेते हैं।
22 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और मंगलवार का दिन है। एकादशी तिथि मंगलवार को रात 9 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। 22 सितंबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के बुधवार सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक श्रवण नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत भी किया जायेगा।

22 सितंबर 2026 को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया जायेगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। मध्य प्रदेश में इसे दोल ग्यारस के नाम से जाना जाता है। कहते हैं इस दिन भगवान श्री विष्णु शयन शैय्या पर सोते हुए करवट लेते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान श्री विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है। इस एकादशी के विषय में ऐसा भी कहा गया है कि इस दिन माता यशोदा ने भगवान श्री विष्णु के वस्त्र धोएं थे इसलिए इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। कई जगहों पर इस दिन श्री विष्णु को पालकी में बिठाकर शोभा यात्रा निकाली जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के निमित्त व्रत करने का और विधिपूर्वक उनकी पूजा करने का विधान है।
- भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि- 22 सितंबर 2026 को रात 9 बजकर 44 मिनट तक
- श्रवण नक्षत्र- 22 सितंबर 2026 को पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक
- 22 सितंबर विशेष- परिवर्तिनी एकादशी का व्रत
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:52 ए एम से 05:40 ए एम
- प्रातः संध्या- 05:16 ए एम से 06:27 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:07 पी एम से 12:55 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:32 पी एम से 03:21 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:35 पी एम से 06:59 पी एम
- सायाह्न संध्या- 06:35 पी एम से 07:46 पी एम
- अमृत काल – 09:52 पी एम से 11:36 पी एम
- रवि योग- 06:27 ए एम से 07:06 ए एम
पंचांग की गणना के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 21 सितंबर को रात में 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 22 सितंबर को रात में 9 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 22 तारीख को ही व्रत का व्रत रखा जाएगा। एकादशी तिथि का व्रत 22 सितंबर को ही रखना शास्त्र सम्मत है क्योंकि, 22 सितंबर को एकादशी तिथि पूरे दिन रहेगी और सुबह में भी सूर्योदय के साथ ही आरंभ हो जाएगी। इस एकादशी का विष्णु पुराण में भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करने का विधान है। दोनों की एकसाथ पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और सोभाग्य की प्राप्ति होती है।

विष्णु पुराण के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी के दिन क्षीर सागर में सोए हुए भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इसलिए ही इसका नाम परिवर्तिनी एकादशी बताया गया है। जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत को करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं साथ ही जानें अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन जो व्यक्ति उपवास रखकर पूरे भक्ति भाव के साथ इस व्रत को करता है और भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल, फल पंचामृत अर्पित करता है उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आता है।

२२ सितंबर २०२६ को मंगलवार है। यह दिन भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष में आता है। २२ सितंबर २०२६ की तिथि शुक्ल पक्ष एकादशी है, जो ०९:४३ अपराह्न तक रहेगी; इसके बाद शुक्ल पक्ष द्वादशी प्रारंभ होगी। इस दिन का नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है, जो ०७:०६ पूर्वाह्न के बाद श्रवण में बदलेगा। राहु काल ०३:३५ PM से ०५:०६ PM तक रहेगा।
- शनि वक्री — इसका क्या अर्थ है — इस तिथि को शनि मीन राशि में वक्री है।
- मंगल की दुर्बलता — इसका क्या अर्थ है — इस तिथि को मंगल कर्क राशि में है, जो इसकी दुर्बलता का कारण है।
- मंगल-बृहस्पति युति — इस तिथि पर मंगल और बृहस्पति कर्क राशि में एक साथ होंगे।