24 नवंबरः यह उपाय, शिवजी बना देंगे सारे काम

24 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि & पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और शुला योग का संयोग & सोमवार को अभिजीत मुहूर्त 11:43 − 12:25 मिनट तक रहेगा। सोमवार को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष, चतुर्थी  तिथि & सूर्योदय का समय: 06:59 ए एम सूर्यास्त का समय: 05:54 पी एम & ब्रह्म मुहूर्त: 05:14 ए एम से 06:07 ए एम & अभिजीत मुहूर्त: 12:04 पी एम से 12:48 पी एम & गोधूलि मुहूर्त: 05:51 पी एम से 06:17 पी एम & राहुकाल: 08:21 ए एम से 09:43 ए एम & भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमते BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI MOB. 9412932030

रविवार 24 नवंबरः प्रदोष काल में करें यह उपाय, शिवजी बना देंगे सारे काम & उत्तम व पवित्र समय प्रदोष काल बताया गया है, जो दिन का अंत और रात्रि के आगमन के बीच का समय होता है वही प्रदोष काल कहलाता है। इस काल में की गई शिव पूजा का फल अनंत गुना बड़ जाता है और इस समय की गई शिव जी की पूजा आराधना से साधक की हर इच्छा पूरी होने लगती है।

 सनातन परंपरा में प्रत्येक मास के दोनों पक्षों में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना जाता है क्योंकि इसी दिन देवों के देव महादेव यानि भगवान शिव के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है. धर्म शास्त्र में इस व्रत का प्रत्येक दिन के हिसाब से अपना अलग-अलग बताया गया है. मान्यता है कि जब यह व्रत शिव को समर्पित सोमवार के दिन पड़ता है तो इसका फल दोगुना हो जाता है. यह पावन संयोग आज मार्गशीर्ष यानि अगहन मास की त्रयोदशी तिथि पर बना है.

गुरु तेग बहादुर शहादत दिवस (शहीदी दिवस) सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है, जो मुगल काल के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए 1675 में गुरु के बलिदान को चिह्नित करता है।

24 नवंबर दिन सोमवार है और तिथि है मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थ। ऐसे में देवता रहेंगे भगवान शिव सहित गणेशजी। और कल चंद्रमा का गोचर धनु राशि में होगा। ऐसे में चंद्रमा से द्वादश भाव में मंगल और सूर्य का संयोग होगा जिससे अनफा योग बनैगा। जबकि सूर्य मंगल की युति की वजह से कल आदित्य मंगल योग भी बनेगा। साथ ही कल पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के संयोग में रवियोग भी बन रहा है। ऐसे में सप्ताह के पहले दिन भगवान गणेशजी की कृपा और आदित्य मंगल योग के प्रभाव से मेष, कर्क समेत 5 राशियो के जातको को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। 

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 24 नवंबर को है, जिसे विनायक चतुर्थी & मार्गशीर्ष मास की विनायक चतुर्थी को कृच्छ्र चतुर्थी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गणेश जी के निमित व्रत करने से सफलता व सिद्धि की प्राप्ति होती है. इस बार यह विनायक चतुर्थी 24 नवंबर को मनाई जाएगी. अगर आप इस दिन भगवान गणेश को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाना चाहते हैं, तो आपको कुछ आसान उपाय जरूर अपनाने चाहिए.

मोदक और लड्डू गणेश जी को सबसे प्रिय हैं. ऐसे में विनायक चतुर्थी पर उन्हें मोदक और लड्डू जरूर चढ़ाएं. इसके अलावा, आप उन्हें मौसमी फल, पान, सुपारी और इलायची भी अर्पित कर सकते हैं.

गणेश जी को लाल रंग के फूल, जैसे गुड़हल, विशेष रूप से प्रिय हैं. विनायक चतुर्थी पर बप्पा की आराधना करने के लिए उन्हें ये फूल जरूर अर्पित करें. विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा में उन्हें दूर्वा (दूब) अर्पित करें. इसके साथ ही, आप केसरिया चंदन, सिंदूर और चावल (टूटे हुए नहीं) भी चढ़ाएं. विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ जैसे मंत्रों का जाप करें. साथ ही, गणेश चालीसा या गणेश स्तोत्र का पाठ करना भी फलदायी माना गया है.

श्री गणेशाय नम:

क्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

ऊं गं गणपतये सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा

ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

ऊ गं गणपतये नमः

नवंबर का अंतिम सप्ताह ग्रह-नक्षत्र के लिहाज से कई राशियों के लिए कल्याणकारी रहने वाला है, दरअसल इस सप्ताह बुध तुला राशि में गोचर करेंगे तो शुक्र वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे, जहां पहले से ही सूर्य और मंगल ग्रह विराजमान हैं. साथ ही इस सप्ताह शनि अपनी ही राशि में मार्गी होने जा रहे हैं. ग्रहों के गोचर के अलावा इस सप्ताह त्रिग्रही योग, शुक्रादित्य राजयोग, लक्ष्मी नारायण राजयोग समेत कई शुभ योग भी बन रहे हैं. ग्रहों के गोचर और शुभ योग के प्रभाव से इस सप्ताह मिथुन, सिंह, वृश्चिक समेत 6 राशियों के लिए शुभ फलदायी रहने वाला है. वहीं मकर, कुंभ समेत कई राशियों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. 

हिंदू मान्यता के अनुसार यदि आप चाहते हैं कि आपकी सोम प्रदोष व्रत की पूजा शीघ्र ही सफल हो तो आज आप विधि-विधान से महादेव की प्रिय चीजें जैसे दूध, गंगाजल, बेलपत्र, शमीपत्र, रुद्राक्ष, भस्म आदि अर्पित करते पूजन करें लेकिन इसके साथ आपको एक और उपाय करना होगा.

हिंदू मान्यता के अनुसार महादेव तक अपनी मनोकामना को पहुंचाने के लिए आपको आज उनकी सवारी नंदी जी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए. किसी भी शिवालय में प्रवेश करते ही सबसे पहले जिस नंदी के ही दर्शन होते हैं आज शिव पूजन के बाद उनके एक कान में हाथ लगाकर दूसरे कान में अपनी बात कहें. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा और अपनी कामना कहने से नंदी जी शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं उसे अपने स्वामी शिव के माध्यम से शीघ्र ही पूरा करवाते हैं.

दरिद्रता और ऋण के भार से दु:खी व संसार की पीड़ा से व्यथित मनुष्यों के लिए प्रदोष पूजा व व्रत पार लगाने वाली नौका के समान है। ‘प्रदोष स्तोत्र’ में कहा गया है- यदि दरिद्र व्यक्ति प्रदोष काल में भगवान गौरीशंकर की आराधना करता है तो वह धनी हो जाता है और यदि राजा प्रदोष काल में शिवजी की प्रार्थना करता है तो उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है, वह सदैव निरोग रहता है, एवं राजकोष की वृद्धि व सेना की बढ़ोत्तरी होती है।

प्रार्थना मन्त्र
भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमते।
रुद्राय नीलकण्ठाय शर्वाय शशिमौलिने।।
उग्रायोग्राघ नाशाय भीमाय भयहारिणे।
ईशानाय नमस्तुभ्यं पशूनां पतये नम:।।
पूजा करने के बाद 108 बार “ऊँ नमः शिवाय” का जप रुद्राक्ष की माला से जप करें।

  1. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि कोई कन्या मनचाहा वर पाने के लिए प्रदोष व्रत रख रही है तो आज उसे शिव के साथ माता पार्वती की चुनरी चढ़ाकर उनकी विशेष पूजा करनी चाहिए.
  2. हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी प्रकार के भय, दुख और शत्रु पर विजय पाने के लिए के लिए आज भगवान शिव को मदार का फल चढ़ाना चाहिए.
  3. हिंदू मान्यता के अनुसार त्रयोदशी तिथि यानि प्रदोष व्रत वाले दिन यदि कोई व्यक्ति भगवान शिव को रुद्राक्ष अर्पित करने के बाद उसे प्रसाद के रूप में धारण करता है तो उस पर हमेशा शिव कृपा बनी रहती है.
  4. यदि आप आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और तमाम प्रयासों के बाद भी धन और मन दोनों से परेशान हैं तो आज आपको स्फटिक के शिवलिंग की विशेष पूजा करनी चाहिए.
  5. यदि आप किसी रोग या पीड़ा से परेशान चल रहे हैं तो विशेष रूप से आपको मिश्री से बने शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए.
  6. शास्त्रों में शिव पूजा के अनेक विधान और समय के बारे में उल्लेख आता है लेकिन जो फल महाशिवरात्रि या सावन में पूजा करने से मिलता है वही फल रविवारीय प्रदोष का व्रत रखकर शिव पूजा करने से प्राप्त होता है।

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