30 अक्टूबर गुरुवार का दिन है। तिथि-कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी, आज का पक्ष-शुक्ल पक्ष आज का वार-गुरुवार दुर्गाष्टमी व्रत, गोपाष्टमी & श्रावण नक्षत्र और शुला योग का संयोग & गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त 11:39 − 12:23 मिनट तक रहेगा। राहुकाल दोपहर 13:23 − 14:46 मिनट तक रहेगा। 30 अक्टूबर 2025 का दिन आस्था और उपासना के लिए शुभ अवसर लेकर आता है। इस दिन किए गए पूजा-पाठ, व्रत और दान के कार्यों से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। भक्तजन इस दिन ईश्वर की आराधना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI MOB.9412932030

30 अक्टूबर 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है। गोपाष्टमी और मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व मनाने से जीवन में शक्ति, भक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त होती है। साथ ही इस दिन किए गए दान और शुभ कार्य से जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है।
30 अक्टूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी. 30 अक्टूबर को श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा. साथ ही बव, बालव और कौरव करण का निर्माण होगा. सभी ग्रह, नक्षत्र और योग का प्रभाव राशियों के जीवन पर पड़ेगा. 30 अक्टूबर 2025 को कौन-सा व्रत और त्योहार है और यह दिन धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है? 30 अक्टूबर 2025, गुरुवार को शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से इस दिन गोपाष्टमी और मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन शक्ति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
कार्तिक माह (Kartik Month) की कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 10:06 AM तक उपरांत नवमी, नक्षत्र श्रवण 06:33 PM तक उपरांत नवमी, नक्षत्र श्रवण 06:33 PM तक उपरांत धनिष्ठा , शूल योग 07:20 AM तक, उसके बाद गण्ड योग 06:15 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग ,करण बव 10:07 AM तक, बाद बालव 10:11 PM तक, बाद कौलव
शुक्ल पक्ष अष्टमी – Oct 29 09:23 AM – Oct 30 10:06 AM शुक्ल पक्ष नवमी – Oct 30 10:06 AM – Oct 31 10:03 AM
पंचाग 30 अक्टूबर दिन गुरुवार 2025 को कार्तिक मास पंचाग 30 अक्टूबर गुरुवार 2025 पंचाग 30 अक्टूबर दिन गुरुवार कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10:06 AM तक रहेगी उसके उपरांत नवमी तिथि शुरू हो जाएगी । नक्षत्र श्रवण 06:33 PM तक उपरांत धनिष्ठा । शूल योग 07:20 AM तक, उसके बाद गण्ड योग 06:15 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग । करण बव 10:07 AM तक, बाद बालव 10:11 PM तक, बाद कौलव रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 11:48 AM से 12:32 PM तक रहेगा। अमृत काल सुबह 07:56 से 09:37 तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:59 से 05:47 तक रहेगा । सूर्य तुला राशि पर है और चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा (पूरा दिन-रात)। यम गण्ड – 6:35 AM – 7:58 AM, कुलिक – 9:22 AM – 10:46 AM. वर्ज्यम् – 10:36 PM – 12:13 AM ।9
मां बगलामुखी की साधना मुख्य रूप से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, विवादों में सफलता पाने और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति पाने के लिए की जाती है। त्र “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा” बहुत शक्तिशाली माना जाता है। मां बगलामुखी की पूजा करने से शत्रु निष्क्रिय हो जाते हैं और उनके बुरे प्रभाव खत्म होते हैं।
माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें माता पीताम्बरा भी कहते हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी तरंग है वो इन्हीं की वजह से है। यह भगवती पार्वती का उग्र स्वरूप है। ये भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाली देवी है इनकी आराधना के पूर्व हरिद्रा गणपती की आराधना अवश्य करनी चाहिये अन्यथा यह साधना पूर्ण रूप से फलीभूत नहीं हो पाती है | सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती. शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से शत्रुओं का स्तम्भन होता है तथा जातक का जीवन निष्कंटक हो जाता है। किसी छोटे कार्य के लिए १०००० तथा असाध्य से लगाने वाले कार्य के लिए मंत्र का जाप करना चाहिए। बगलामुखी मंत्र के जाप से पूर्व बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। स्वरुप : नवयौवना हैं और पीले रंग की साङी धारण करती हैं । सोने के सिंहासन पर विराजती हैं । तीन नेत्र और चार हाथ हैं । सिर पर सोने का मुकुट है । स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत हैं । शरीर पतला और सुंदर है । रंग गोरा और स्वर्ण जैसी कांति है । सुमुखी हैं । मुख मंडल अत्यंत सुंदर है जिस पर मुस्कान छाई रहती है जो मन को मोह लेता है ।