05 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि & 5 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। यह तृतीया तिथि दोपहर 12 बजकर 01 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद चतुर्थी तिथि & इस तिथि पर चंद्रमा तुला राशि और विशाखा नक्षत्र में रहेंगे। इस दिन कई तरह के शुभ योग का भी बनेगा जिसमें प्रमुख रूप से सर्वार्थि सिद्धि योग समेत व्रज योग BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030
संकष्टी” का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाला. मान्यता है कि विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन पूजा करने पर कुंडली में बुध और केतु के दोषों का प्रभाव कम होता है तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है.

संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं. भगवान को दूर्वा, मोदक, लड्डू और लाल-पीले फूल अर्पित करें. इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और आरती करें. फिर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें.
विकट संकष्टी चतुर्थी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है. साल 2026 में यह पर्व 5 अप्रैल को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है. हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है. मान्यता है कि उनकी आराधना से सभी दुख, बाधाएं और संकट दूर होते हैं, इसी कारण उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है.
मान्यता है कि भगवान गणेश को लाल रंग के फूल, विशेषकर गुड़हल और गेंदे के फूल अर्पित करना शुभ होता है.
5 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की तृतीया और तिथि रविवार का दिन है। तृतीया तिथि रविवार दोपहर 12 बजे तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। 5 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक वज्र योग रहेगा। साथ ही रविवार रात 12 बजकर 8 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 5 अप्रैल को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत किया जाएगा।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना जाता है. हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जोकि भगवान गणेश को समर्पित विशेष व्रत है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं रात में चंद्रोदय को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा होता है.

वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाता है. यह व्रत रखने से जीवन की बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं. लेकिन तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. दरअसल पंचांग में 5 और 6 अप्रैल दोनों ही दिन चतुर्थी तिथि पड़ रही है
पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रविवार, 5 अप्रैल 2026 को शुरू होकर 6 अप्रैल 2026 तक रहेगी. 5 अप्रैल को सुबह 11:59 पर चतुर्थी लग जाएगी और सोमवार, 6 अप्रैल को दोपहर 02:10 पर समाप्त होगा. वैसे तो आमतौर पर कई व्रत त्योहार उदयातिथि के आधार पर रखें जाते हैं, लेकिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है और इस दिन चंद्र पूजन का विशेष महत्व है, इसलिए विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा और इसी दिन भगवान गणेश की पूजा की जाएगी. इस दिन विशाखा नक्षत्र रहेगा. साथ ही वज्र योग और सिद्धि योग भी बन रहा है.
विकट संकष्टी पर 5 अप्रैल 2026 को पूजा के लिए सुबह 07:41 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक का मुहूर्त रहेगा. इसके बाद शाम में 06:20 से 8:06 का मुहूर्त भी शुभ है. विकट संकष्टी व्रत के दिन भद्रा भी लग रही है, लेकिन भद्रा का वास पाताल लोक में रहने से इसका प्रभाव पूजा-पाठ पर नहीं पड़ेगा. भद्रा सुबह 06 बजकर 07 मिनट से शुरू 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगी.
वहीं 5 अप्रैल 2026 को चंद्रोदय का समय (Vikata Sankashti Chaturthi 2026 Moon Rise Time) रात 09:58 पर रहेगा. इस समय आप चंद्रमा की पूजा करें और अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल सकते हैं.
भगवान गणेश जी के मंत्र
हीं श्रीं क्लीं नमो भगवते गजाननाय. ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ. निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
ॐ लम्बोदराय नमः॥
ॐ गं गणपतये नमः॥
ॐ श्री गणेशाय नमः॥
ॐ नमो भगवते गजाननाय. ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्नप्रशमनाय सर्वराज्यवश्यकरणाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा॥
ॐ हीं श्रीं क्लीं गौं गः श्री महागणधिपतये नमः॥
हीं श्रीं क्लीं गौं वरमूर्तये नमः. ॐ गं गणपतये नमः॥
- सूर्योदय-सुबह 6:06 AM
- सूर्यास्त- शाम 6:40 PM
- ब्रह्म मुहूर्त 04:56 ए एम से 05:43 ए एम
- प्रातः सन्ध्या 05:20 ए एम से 06:29 ए एम
- अभिजित मुहूर्त 12:16 पी एम से 01:06 पी एम
- विजय मुहूर्त 02:45 पी एम से 03:35 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त 06:52 पी एम से 07:15 पी एम

- वैशाख कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि – 5 अप्रैल 2026 को दोपहर 12 बजे तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी
- वज्र योग- 5 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक
- विशाखा नक्षत्र- 5 अप्रैल को रात 12 बजकर 8 मिनट तक
- 05 अप्रैल 2026 व्रत-त्यौहार- संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत