2026 में ग्रहों की चाल एक बड़ा उलटफेर करने वाली है। जब ‘ठंडा लोहा’ (शनि) और ‘दहकते अंगारे’ (मंगल) मीन राशि के जल तत्व में मिलेंगे, तो ब्रह्मांड में एक अद्भुत ‘द्वंद्व योग’ बनेगा। लाल किताब की मानें तो यह मेल ‘नीच के राहु’ जैसी स्थिति पैदा करता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यही संघर्ष कुछ राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोल देता है।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR ; HIMALAYAUK NEWS ( LEADING NEWSPORTAL & YOUTUBE CHENNAL & DAILY NEWSPAPER) & FOUNDER PRESIDENT ; BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN MOB. 9412932030
31 मार्च 2026, मंगलवार : विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी) और शक संवत 1948 (पराभव) है। इस दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 06:56 तक रहेगी, फिर चतुर्दशी होगी। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 15:19 तक, फिर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। राहुकाल दोपहर 03:49 PM से 05:21 PM तक सूर्योदय-सुबह 6:12 am सूर्यास्त- शाम 6:38 pm अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 से 12:45 तक (दिन का सबसे शुभ समय) ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:38 से 05:28 तक
2 अप्रैल 2026 से 11 मई 2026 के बीच मंगल, बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे, जहाँ शनि पहले से ही विराजमान हैं। शनि और मंगल की इस युति को ज्योतिष शास्त्र में ‘ज्वालामुखी’ या ‘विस्फोटक योग’ & इस खगोलीय घटना में तत्वों का एक जटिल मिश्रण & मंगल (अग्नि तत्व): यह विस्फोट और युद्ध का कारक है। & शनि (वायु तत्व): शनि की हवा मंगल की आग को और भयंकर बनाने का कार्य करेगी। & मीन राशि (जल तत्व): चूँकि यह युति गुरु की जल प्रधान राशि में हो रही है, इसलिए यहाँ आग, पानी, तेल और हवा का एक दुर्लभ संयोग बनेगा।& ग्रह युद्ध योग: मीन राशि में मंगल और शनि एक ही डिग्री पर आ जाएंगे। जब दो शत्रु ग्रह एक ही राशि और एक ही डिग्री पर होते हैं, तो इसे ‘ग्रह युद्ध’ कहा जाता है, जो सत्ता और जनता के बीच भारी टकराव का संकेत है। सरकार की नीतियों के विरुद्ध जनता में भारी आक्रोश देखने को मिलेगा, जिससे कई देशों में आंतरिक विद्रोह या उपद्रव जैसी स्थितियां बनेंगी। कीमतें बेकाबू हो सकती हैं, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ेंगी। कर्मचारियों की नौकरियों पर भी संकट आ सकता है, जिससे आर्थिक ढांचा कमजोर होगा।
31 मार्च को चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि और मंगलवार का दिन है। चतुर्दशी तिथि मंगलवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के बुधवार सुबह 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। 31 मार्च को दोपहर 3 बजकर 21 मिनट तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा।
31 मार्च 2026 व्रत-त्यौहार- महावीर जयंती
31 मार्च को महावीर जयंती मनाई जाएगी। महावीर जयंती जैन धर्म का सबसे प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व सत्य, अहिंसा और प्रेम का संदेश देता है। जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में इस दिन को बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। महावीर जी का जन्म ईसा पूर्व 599 में, वैशाली (वर्तमान बिहार) के कुंडलपुर में एक क्षत्रिय राजघराने में हुआ था। भगवान महावीर ने 30 साल की आयु में संन्यास लेने के बाद अपने जीवन काल में कई ऐसी शिक्षाएं दी हैं जो आज के समय में भी प्रासंगिक हैं।
ब्रह्मांड में एक नया हलचलकारी समीकरण बनने जा रहा है
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मंगल और राहु के अंगारक योग की विदाई के बाद अब ब्रह्मांड में एक नया हलचलकारी समीकरण बनने जा रहा है। 02 अप्रैल से 11 मई 2026 तक शनि और मंगल की मीन राशि में युति होगी, जिसे ज्योतिष शास्त्र में ‘ज्वालामुखी’ या ‘विस्फोटक योग’ के नाम से जाना जाता है। हालांकि विस्फोटक योग मंगल और केतु के संयोग से भी बनना है। ऊर्जा और अनुशासन के इन दो धुर विरोधी ग्रहों का मिलन सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव लेकर आएगा।
6 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच स्थिति और भी संवेदनशील हो जाएगी। इस दौरान मंगल और शनि दोनों एक ही ‘उत्तराभाद्रपद’ नक्षत्र में गोचर करेंगे। दो क्रूर और परस्पर शत्रु ग्रहों का एक ही राशि, एक ही नक्षत्र और एक ही डिग्री में होना वैश्विक शांति के लिए शुभ नहीं माना जाता।
नकारात्मक प्रभाव कम करने के 5 अचूक उपाय:
यदि आपकी राशि पर इस योग का अशुभ प्रभाव दिख रहा है, तो ये सरल उपाय आपको सुरक्षा कवच प्रदान करेंगे:
1. हनुमान जी की शरण: घर या दुकान की उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में हनुमान जी का चित्र लगाएं।
2. शमी का सानिध्य: घर की पश्चिम दिशा में शमी का पौधा रोपें, यह शनि और मंगल दोनों को शांत रखता है।
3. केसर का प्रताप: बृहस्पति की कृपा पाने के लिए रोज माथे पर केसर का तिलक लगाएं।
4. ईश्वर की चौखट: नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए प्रतिदिन मंदिर जाने का नियम बनाएं।
5. सेवा भाव: जरूरतमंदों, मजदूरों और बेजुबान पशु-पक्षियों (गाय, कुत्ता, कौआ, मछली) की सेवा करें और उन्हें अन्न-जल दें।
मीन, कन्या और मिथुन राशि के जातकों को 11 मई तक वाहन चलाने और वाद-विवाद से बचने की सलाह दी जाती है।

ज्योतिष जगत में 26 मार्च, 2026 ऊर्जा और साहस के कारक मंगल देव शनि की राशि कुंभ में उदित होकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन यह ‘मंगलोदय’ कुछ राशियों के लिए सुनहरे अवसर लाएगा, वहीं मिथुन, कर्क और कन्या राशि के जातकों को अपनी चाल थोड़ी संभलकर चलनी होगी।