9 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को वैशाख कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि (शाम 09:18 तक, फिर अष्टमी) है। इस दिन मूल नक्षत्र और परिघ योग है। मुख्य समय: सूर्योदय 06:05 AM, सूर्यास्त 06:38 PM, और राहुकाल 01:56 PM – 03:30 PM तक रहेगा। यह कालाष्टमी का समय है & सूर्योदय/सूर्यास्त: 06:05 AM / 06:38 PM & 09 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि & 9 अप्रैल 2026, गुरुवार का पंचांग ^ 2026 में सीता नवमी 25 अप्रैल को है। ये पर्व हर साल वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है। देवी सीता को लोग भूमि पुत्री यानी धरती की बेटी मानते हैं क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक उनका जन्म गर्भ से नहीं बल्कि धरती से हुआ था। कहते हैं कि जिस नक्षत्र में राम नवमी होती है, उसी में सीता नवमी भी आती है, इसलिए इसकी पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। ^ तिथि: सप्तमी – दोपहर 11:42 एएम तक, उसके बाद अष्टमी।

by Chandra Shekhar Joshi Mob. 9412932030
आज के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, चने की दाल और गुड़ अर्पित करना चाहिए। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। केले के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। इससे गुरु दोष शांत होता है और विवाह या करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030
9 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। यह सप्तमी तिथि शाम 09 बजकर 18 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद सप्तमी तिथि लग जाएगी। इस तिथि पर चंद्रमा धनु राशि और मूल नक्षत्र में रहेंगे। वहीं इस तिथि पर परीघा योग और दूसरे शुभ योगों का संयोग

खरमास 15 मार्च से शुरू हुआ था, जो करीब एक महीने तक रहता है। 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही इसका समापन & वैशाख माह में आने वाली यह तिथि भगवान कालभैरव की उपासना के लिए विशेष & कालभैरव, भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप हैं, जिनकी पूजा करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। मान्यता है कि सच्चे मन से कालभैरव की आराधना करने पर व्यक्ति को भय, संकट और दुखों से राहत मिलती है।

वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 9 अप्रैल की रात 9 बजकर 19 मिनट से होगी और इसका समापन 10 अप्रैल की रात 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। उदया तिथि को मानते हुए कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल को रखा जाएगा। हालांकि, कालभैरव की पूजा के लिए विशेष रूप से निशा काल का महत्व होता है, जो 9 अप्रैल की रात में पड़ रहा है। इसलिए जो श्रद्धालु निशा काल में पूजा करना चाहते हैं, वे 9 अप्रैल की रात को भी भैरव पूजा कर सकते हैं।
2026 में सीता नवमी 25 अप्रैल को है। ये पर्व हर साल वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है। देवी सीता को लोग भूमि पुत्री यानी धरती की बेटी मानते हैं क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक उनका जन्म गर्भ से नहीं बल्कि धरती से हुआ था। कहते हैं कि जिस नक्षत्र में राम नवमी होती है, उसी में सीता नवमी भी आती है, इसलिए इसकी पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
- कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि कुत्ता कालभैरव का वाहन माना जाता है।
- भगवान कालभैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जप करें। ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
हल्दी वाले भोजन से परहेज करना। लेकिन आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? हल्दी को हिंदू धर्म में बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है। इसका उपयोग पूजा-पाठ, शादी-विवाह, मंगल कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। हल्दी को सौभाग्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इसे “मंगलकारी” चीजों में गिना जाता है।