शुभ और अशुभ समय के लिए पंचांग देखा जाता है, 22 Aug.2025 & बगला साधक 24 अगस्त को माता बाल सुंदरी काशीपुर और गर्जिया माता रामनगर को भेट चढ़ाने पहुंचेंगे

पंचांग का ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व है । पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। , पंचांग का ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व है । पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है।

तिथि : चतुर्दशी, 11:59 तक नक्षत्र आश्लेषा, 24:15 तक योग : वरीघा, 14:31 तक प्रथम करण : सकुना, 11:59 तक द्वितिय करण : चतुष्पदा, 23:45 तक वार : शुक्रवार

22 August Ka Panchang22 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। इस तिथि पर आश्लेषा नक्षत्र और वारीयन योग का संयोग रहेगा। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त 11:59-12:47 तक रहेगा। राहुकाल दोपहर 10:46-12:23 मिनट तक रहेगा।

22 अगस्त 2025 भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि & 22 अगस्त, शुक्रवार का दिन है. आज भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और शुक्रवार 

पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है। 

भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), श्रावण | चतुर्दशी तिथि 11:56 AM तक उपरांत अमावस्या | नक्षत्र आश्लेषा 12:16 AM तक उपरांत मघा | वरीयान योग 02:35 PM तक, उसके बाद परिघ योग | करण शकुनि 11:56 AM तक, बाद चतुष्पद 11:42 PM तक, बाद नाग |

अगस्त 22 शुक्रवार को राहु 10:54 AM से 12:29 PM तक है | 12:16 AM तक चन्द्रमा कर्क उपरांत सिंह राशि पर संचार करेगा |

सूर्योदय का समय : 06: 54 ए एम
सूर्यास्त का समय : 06: 53 पी एम
चंद्रोदय का समय: 05:43 ए एम, अगस्त 23
चंद्रास्त का समय : 06:32 पी एम

नक्षत्र :
अश्लेशा – 12:16 ए एम, अगस्त 23 तक

पक्ष-कृष्ण

ऋतु-शरद

वार-शुक्रवार

तिथि (सूर्योदयकालीन)-चतुर्दशी

नक्षत्र (सूर्योदयकालीन)-आश्लेषा

योग (सूर्योदयकालीन)-वरियान

करण (सूर्योदयकालीन)-शकुनि

लग्न (सूर्योदयकालीन)-कर्क

शुभ समय- 7:30 से 10:45, 12:20 से 2:00 तक

राहुकाल-प्रात: 10:30 से 12:00 बजे तक

दिशा शूल-वायव्य 

योगिनी वास-पश्चिम

गुरु तारा-उदित

शुक्र तारा-उदित

चंद्र स्थिति-सिंह

जयंती/त्योहार/व्रत/मुहूर्त-पितृकार्य अमावस्या/जातकर्म/नामकरण/शरद ऋतु प्रारंभ

यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।

आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।

आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में मखाने की खीर चढ़ाएं।

वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज का पंचांग दैनिक हिंदू कैलेंडर ही है जो आज की तिथि के बारे में बताता है, और इसके बीच शुभ और अशुभ समय की जानकारी देता है। यह विजय विश्व पंचांग पर आधारित है, जो पंचांग में सबसे दुर्लभ है, जिसका उपयोग विशेषज्ञ ज्योतिषियों द्वारा सैकड़ों वर्षों से किया जा रहा है। दैनिक पंचांग के माध्यम से, आप एक शुभ कार्य या एक नया उद्यम शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय निर्धारित करने के लिए समय, तिथि और दिन के बारे में सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और सभी नकारात्मक प्रभावों और अनावश्यक परेशानियों को दूर कर सकते हैं।

पंचांग या पंचागम् हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से 5 अवयवों का गठन होता है, अर्थात् तिथिवारनक्षत्रयोग एवं करण। पंचांग मुख्य रूप से सूर्य और चन्द्रमा की गति को दर्शाता है। हिन्दू धर्म में हिन्दी पंचांग के परामर्श के बिना शुभ कार्य जैसे शादी, नागरिक सम्बन्ध, महत्वपूर्ण कार्यक्रम, उद्घाटन समारोह, परीक्षा, साक्षात्कार, नया व्यवसाय या अन्य किसी तरह के शुभ कार्य नहीं किये जाते ।

दैनिक पंचांग और उसका महत्व

प्राचीन ऋषियों और वेदों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करता है, तो वह सकारात्मक तरीके से प्रतिक्रिया देता है और व्यक्ति को उसके कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद करता है। हिन्दू दैनिक पंचांग इस सौहार्द को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके उपयोग से व्यक्ति को तिथि, योग और शुभ-अशुभ समयों में ज्योतिषीय अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। जिससे हम सूक्ष्म संचार के आधार पर उपयुक्त समय के बारे में जान सकते हैं और अपने समय और कार्य का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।

ज्योतिषी लोगों को सुझाव देते हैं कि वे अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।

हिंदू तिथि

हिन्दू तिथि चंद्र दिवस या सूर्य और चंद्रमा के बीच अनुदैर्ध्य कोण द्वारा 12 डिग्री तक बढ़ने का समय है। ये चंद्र दिवस अवधि में भिन्न हो सकते हैं और 21.5 घंटे से 26 घंटे के बीच भिन्न-भिन्न हो सकते हैं।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, एक चंद्र माह में 30 तिथि या पूर्ण चंद्र दिवस होते हैं। इन्हें आगे इन्हें 2 पक्ष या चंद्र चरणों में विभाजित किया गया है, जिन्हें ‘कृष्ण पक्ष’ और ‘शुक्ल पक्ष’ कहा जाता है। प्रत्येक पक्ष में 15 तिथियां होती हैं।

महत्वपूर्ण हिंदू तिथि जो शुभ हैं, उन्हें जानकर, आप अपने हर काम में सफलता और खुशी को प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छा समय निर्धारित कर सकते हैं।

पंचांग के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने और ऐसे प्रश्न जो हमेशा उजागर होते हैं, इनके महत्व के बारे में गहराई से जानकारी प्राप्त करें।

आध्यात्मिक धन , और भौतिक धन

देवभूमि उत्तराखंड में राजनेता, नौकरशाह, पूंजीपति धन इकट्ठा करने में लगे हैं, इनको इतना ज्ञान नहीं है कि अपने लिए पृथ्वी पर धन इकट्ठा मत करो, जिसमें कीड़ा लगता है, जो सड़ जाता है, आपदा में नष्ट हो जाता है, जिसे चोर सेंध लगाते हैं; बल्कि अपने लिए स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, आत्मिक रूप से समृद्ध बनो, आध्यात्मिक धन अर्जित करो, जहाँ न कीड़ा, न आपदा और न ही कोई बिगाड़ सकता हैं और जहाँ चोर सेंध नहीं लगा सकते, न ही चुरा सकते है। क्योंकि जहाँ तुम्हारा धन है, वहाँ तुम्हारा मन भी लगा रहेगा, क्योंकि बेहिसाब भौतिक धन कमाया तो मन तो तुम्हारा हमेशा उसकी सुरक्षा में लगा रहेगा, इसलिए आध्यात्मिक रूप से तो कंगाल होते जाओगे और भौतिक धन कब उड़ जाए,, कब यह बेहिसाब भौतिक धन आपको संकटों में डाल दे, कुछ नहीं कहा जा सकता: चंद्रशेखर जोशी

मानव भौतिक धन के पीछे भाग रहा है, इस भागदौड़ में राजनेता, नौकरशाह और पूंजीपति अंधाधुंध दौड़ रहे है, जबकि आध्यात्मिक धन अर्जित करने हेतु तो विरले ही देवशक्तियां चुनती है

जब बहुत धन आ जाता है तो व्यक्ति धन संभालने और उसकी सुरक्षा को लेकर ही सदैव चिंतित रहता है। ईश्वर के लिए न तो उनके पास समय होता है और न भक्ति भावना। धन के अहंकार में व्यक्ति ईश्वरीय सत्ता को भी चुनौती देने लगता है। तीर्थस्थलों को पर्यटन स्थल मानकर उनका अपमान करता है। इसलिए ही कहा गया है कि अध्यात्मिक धन और सांसारिक धन एक साथ नहीं मिल सकता है।

इस का अर्थ यह नहीं है कि आपको भौतिक धन से दूर रहना है बल्कि, इसका अर्थ है कि आपको भौतिक धन को आध्यात्मिक धन के साथ संतुलित करना चाहिए।

जब आप आध्यात्मिक धन और भौतिक धन के बीच संतुलन पा लेते हैं, तो आसमानी शक्तियों आपको आरोग्यम और समृद्ध जीवन जीने के लिए सहायक बनती हैं।

आत्मिक रूप से समृद्ध होने से एक समृद्ध जीवनशैली बनती है। सकारात्मक आभामंडल बनाने के आध्यात्मिक धन ही आपको आपको संकट मुक्त करता है।

संसार में दो प्रकार का धन होता है भौतिक धन और दूसरा आध्यात्मिक धन। मनुष्य का स्वभाव है कि वह ज्यादा से ज्यादा धन कमाने की चाहत रखता है। कोई व्यक्ति सोना, चांदी, रूपये पैसे का अंबार लगाकर धनवान कहलाता है तो कोई भूखा, प्यासा रहकर भी धनवान कहलता है। वास्तव में धनवान दोनों हैं। एक भौतिक धन का धनी है तो दूसरा अध्यात्मिक धन का धनी है।

शास्त्र और पुराण कहते हैं कि दोनों धनों में से अध्यात्म रूपी धन ज्यादा श्रेष्ठ है क्योंकि इसे कोई छीन नहीं सकता। इसे कोई चुरा भी नहीं सकता है। जिसके पास अध्यात्म रूपी धन होता है वह निश्चिंत होता है। उसे किसी प्रकार की चिंता और भय नहीं रहता है। संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो एक साथ इन दोनों धनों का सुख प्राप्त कर सके।

अध्यात्म और भौतिक धन दोनों दो नाव के समान हैं। आप जानते हैं कि दो नाव की सवारी एक साथ नहीं की जा सकती, अगर ऐसा करेंगे तो डूबना तय है। मर्जी हमारी है कि हम अध्यात्मिक धन अर्जित करके ईश्वर का ऋण चुका दें और जीवन-मरण के चक्र को पार करके दुःख से मुक्ति प्राप्त कर लें। दूसरा रास्ता यह है भौतिक धन अर्जित करके सांसारिक सुख का आनंद लें और बार-बार जीवन-मरण के चक्र में उलझकर पाप का फल प्राप्त करें।

भागवत् कहता है कि ईश्वर जिसे प्यार करता है उससे उसका सब कुछ छीन लेता है। सब कुछ छीन लेने का अर्थ है सांसारिक सुख छीन लेना। कबीर दास, तुलसीदास, रहीम, मीराबाई, सूरदास, करमैती बाई इसके उदाहरण हैं। ईसा मसीह ने भी कहा है कि सूई के छिद्र से ऊंट भले ही पार कर जाए लेकिन एक अमीर आदमी स्वर्ग प्राप्त नहीं कर सकता। स्वर्ग नहीं मिलने का अर्थ है, ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं होना।

CALL US; 9412932030

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *