16 मार्च 2026, सोमवार के अनुसार आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि प्रातः 9:41 बजे तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। आज धनिष्ठा नक्षत्र अगले दिन सूर्योदय से पूर्व 6:22 बजे तक रहेगा और इसके बाद शतभिषा नक्षत्र लगेगा। 16 मार्च को चैत्र कृष्ण पक्ष की उदया तिथि द्वादशी और सोमवार का दिन है। द्वादशी तिथि सोमवार सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी, उसके त्रयोदशी तिथि लग जाएगी। 16 मार्च को चैत्र कृष्ण पक्ष की उदया तिथि द्वादशी और सोमवार का दिन है। द्वादशी तिथि सोमवार सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी, उसके त्रयोदशी तिथि लग जाएगी। 16 मार्च को सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक शिव योग रहेगा, उसके बाद सिद्ध योग लग जाएगा। साथ ही सोमवार पूरा दिन पूरी रात पार कर के मंगलवार को सुबह 6 बजकर 22 मिनट तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा आज पंचक और सोम प्रदोष व्रत है। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR; HIMALAYAUK NEWS (Leading Newsportal & youtube Channel & Daily Newspaper) Mob. 9412932030

पापमोचनी एकादशी व्रत पारण का समय- 16 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 46 मिनट से सुबह 9 बजकर 11 मिनट तक सूर्योदय-सुबह 6:29 am सूर्यास्त- शाम 6:29 pm
आकाश मंडल में ग्रहों की चाल अक्सर हमारे जीवन में बड़े उलटफेर लेकर आती है, लेकिन इस बार का बदलाव थोड़ा विस्फोटक नजर आ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ राशि में तीन शक्तिशाली और विपरीत स्वभाव वाले ग्रहों राहु, मंगल और बुध की युति हो चुकी है। यह जमावड़ा आगामी 11 अप्रैल तक कई राशियों के लिए कड़ी परीक्षा का समय लेकर आया है। ग्रहों की यह स्थिति अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं का संकेत देती है।

15 मार्च से शुरू मंगल-बुध-राहु का शक्तिशाली संयोग & ज्योतिष की दुनिया में जब भी बड़े और गरम ग्रह एक साथ बैठते हैं, तो हलचल मचनी तय होती है। साल 2026 में एक ऐसा ही दुर्लभ और बेहद शक्तिशाली संयोग & 15 मार्च 2026 से 2 अप्रैल 2026 के बीच, कुंभ राशि में मंगल, बुध और राहु की तिकड़ी जमने वाली है। ये 18 दिन ऐसे होंगे जब हवा में एक अजीब सी बेचैनी और कुछ कर गुजरने की छटपटाहट महसूस होगी। बिना सोचे-समझे बोला गया एक शब्द भी किसी बड़े विवाद की वजह बन सकता है। यहाँ ‘मौन’ ही आपका सबसे बड़ा हथियार साबित होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब भी मंगल और राहु की युति होती है, तो इसे अंगारक योग जैसा प्रभाव माना जाता है। 2026 में बुध का साथ मिलना इसे और भी रणनीतिक बना देता है। रात को सोने से 1 घंटा पहले मोबाइल छोड़ दें, वरना राहु आपकी नींद उड़ा सकता है। कुंभ राशि में राहु, मंगल और बुध की त्रिग्रही युति 11 अप्रैल तक कई राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब राहु (भ्रम का कारक), मंगल (क्रोध और ऊर्जा का प्रतीक) और बुध (बुद्धि के देवता) एक साथ मिलते हैं, तो इंसान की सोचने-समझने की शक्ति पर धुंध छाने लगती है। ग्रह अपना काम करेंगे, लेकिन आपकी सावधानी और संयम ही इस ज्योतिषीय तूफान से आपको सुरक्षित बाहर निकाल सकता है। 11 अप्रैल तक पहले तोलो फिर बोलो की नीति अपनाएं।
चैत्र कृष्ण पक्ष द्वादशी, सिद्धार्थि संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), फाल्गुन | द्वादशी तिथि 09:41 AM तक उपरांत त्रयोदशी | नक्षत्र धनिष्ठा 06:22 AM तक उपरांत शतभिषा | शिव योग 09:36 AM तक, उसके बाद सिद्ध योग | करण तैतिल 09:41 AM तक, बाद गर 09:37 PM तक, बाद वणिज | राहु 08:07 AM से 09:37 AM तक है | अभिजीत मुहूर्त – 12:11 PM – 12:59 PM अमृत काल – 07:46 PM – 09:23 PM ब्रह्म मुहूर्त – 05:01 AM – 05:49 AM
आज शिव योग प्रातः 9:37 बजे तक रहेगा, इसके बाद सिद्ध योग बनेगा। आज का दिन विशेष रूप से सोम प्रदोष व्रत, कैला देवी मेला (करौली, राजस्थान) का शुभारंभ और शाम 6:14 बजे से पंचक प्रारंभ होने के कारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है।
त्यौहार और व्रत सोम प्रदोष व्रत प्रदोष व्रत
: 15 मार्च से शुरू होगा मंगल-बुध-राहु का शक्तिशाली संयोग