23 मई 2026 शनिवार,हनुमान चालीसा का पाठ शनि दोषों को शांत करता है,25 मई से 2 जून तक नौतपा में बड़े मांगलिक कार्य नहीं

23 मई 2026 (शनिवार) के पंचांग के अनुसार, इस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और मघा नक्षत्र का संयोग रहेगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक और राहुकाल दोपहर के समय रहेगा, इसलिए शुभ कार्यों के लिए राहुकाल से बचने की सलाह दी जाती है

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से Saturday का दिन भगवान वेंकटेश्वर और शनिदेव की पूजा के लिए उत्तम & शनिवार होने के कारण आज मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाना और हनुमान चालीसा का पाठ करना शनि दोषों को शांत करता है।

नौतपा में पूजा-पाठ वर्जित नहीं है, लेकिन अत्यधिक गर्मी और सूर्य के उग्र स्वभाव के कारण इन दिनों में बड़े मांगलिक कार्य या लंबी यात्राएं टालने की सलाह दी जाती है। सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तभी से नौतपा की शुरुआत मानी जाती है। ऐसे में इस बार 25 मई से नौपता शुरू हो रहे हैं, जो 2 जून तक चलेंगे। यह घटना ज्योतिषीय रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

साल 2026 में 25 मई से 2 जून तक रहने वाला नौतपा इस बार बेहद खास होने वाला है। जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में गोचर करते हैं, तो पृथ्वी पर गर्मी अपने चरम पर होती है। इस भीषण तपन के दौरान खुद को सुरक्षित रखने और कुंडली में सूर्य-चंद्रमा की स्थिति को मजबूत करने के लिए शास्त्रों और आयुर्वेद में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो नौतपा की शुरुआत होती है। रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का नक्षत्र माना जाता है, जो शीतलता का प्रतीक है। जब ब्रह्मांड का सबसे गर्म ग्रह (सूर्य), शीतलता के प्रतीक (रोहिणी) के घर में आता है, तो वह उसकी ठंडक को पूरी तरह सोख लेता है। इसके कारण पृथ्वी का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी, इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी के इस हिस्से (भारतीय उपमहाद्वीप) पर बिल्कुल सीधी और लंबवत (Vertical) पड़ती हैं, जिससे गर्मी अपने चरम पर होती है। नौतपा के दौरान प्यासे इंसानों और पशु-पक्षियों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाएं या मटके का दान करें।  सत्तू, आम, तरबूज, खरबूजा, दूध, दही, छाछ, और सूती कपड़ों का दान करने से सूर्य और चंद्रमा दोनों ग्रहों के दोष शांत होते हैं। सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल (अर्घ्य) अर्पित करें। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। पानी के साथ-साथ नींबू पानी, ओआरएस (ORS), छाछ, लस्सी, नारियल पानी और पना का सेवन करें।

“ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” मंत्र का नियमित रूप से जप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसके साथ ही आप सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए नौतपा के इन 9 दिनों में रोजाना आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। इससे जातक के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और कार्यक्षेत्र से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

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