ज्योतिष शास्त्र में खप्पर योग एक अत्यंत अशुभ और उग्र प्रभाव वाला खगोलीय योग है जो मुख्य रूप से मंगल, शनि, राहु और सूर्य जैसे क्रूर ग्रहों के अशुभ स्थान परिवर्तन या एक ही राशि में युति से बनता है इसके नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए हनुमान जी और महादेव की पूजा करना तथा संयम बरतना लाभकारी

पुष्य नक्षत्र: आज शाम 07:16 पीएम से ‘नक्षत्रों का राजा’ पुष्य नक्षत्र शुरू हो रहा है। गुरुवार और पुष्य नक्षत्र का संयोग “गुरु-पुष्य योग” बनाता है, आज भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें। पीले वस्त्र पहनें और चने की दाल का दान करें। शाम को पुष्य नक्षत्र शुरू होने के बाद सोना या कीमती वस्तुएं खरीदना अत्यंत शुभ रहेगा। ग्रहों की स्थिति: इस दौरान सूर्य, मंगल, शनि और राहु जैसे उग्र ग्रहों की विशेष स्थितियां और गोचर भी इस योग को बढ़ावा दे रहे हैं। अमावस्या और संक्रांति: 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या के ही दिन मिथुन संक्रांति (सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश) हो रही है, जिसे ज्योतिष में खप्पर योग को और मजबूत करने वाला माना गया है।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & G.S.; STATE PRESS CLUB UTTRAKHAND Mob 9412932030
ज्योतिष शास्त्र में खप्पर योग को एक अत्यंत उग्र और अशुभ योग माना जाता है। इस साल इसके बनने के मुख्य कारण ये हैं: महीनों में दिनों का संयोग: मई 2026 के महीने में 5 शनिवार और 5 रविवार पड़ रहे हैं, वहीं जून 2026 में 5 मंगलवार आ रहे हैं। जब किसी महीने में ऐसे क्रूर या उग्र दिनों की संख्या 5 हो जाती है, तो खप्पर योग का निर्माण होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में ज्यादा बड़े आकार का शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। सामान्यतः अंगूठे के आकार या उससे थोड़ा बड़ा शिवलिंग शुभ माना जाता है। छोटे आकार का शिवलिंग घर के मंदिर के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर स्कंद षष्ठी मनाई जाती है। इस दिन शिव परिवार के संग भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंद षष्ठी के दिन साधना करने से संतान की प्राप्ति होती है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही शुभ फल मिलता है।
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 05 मिनट से 04 बजकर 46 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से 03 बजकर 29 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 07 मिनट से 07 बजकर 28 मिनट तक
निशिता मुहूर्त – रात 11 बजकर 57 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक
अमृत काल- रात 08 बजकर 47 मिनट से 10 बजकर 18 मिनट तक
पूजा का शुभ समय
हिंदू धर्म में उदया तिथि को बेहद महत्व दिया जाता है। स्कंद षष्ठी व्रत 21 मई को किया जाएगा। इस दिन सुबह 08 बजकर 26 मिनट के बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी। इसके बाद भगवान कार्तिकेय की पूजा कर सकते हैं।
स्कंद षष्ठी का धार्मिक महत्व
जिन लोगों को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है, तो ऐसे में स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा और व्रत करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत को संतान की लंबी उम्र और जीवन में सफलता की कामना के लिए किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में ज्यादा बड़े आकार का शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। सामान्यतः अंगूठे के आकार या उससे थोड़ा बड़ा शिवलिंग शुभ माना जाता है। छोटे आकार का शिवलिंग घर के मंदिर के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोनों प्रकार के शिवलिंग का अपना अलग महत्व और प्रभाव बताया गया है। शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। यह सृष्टि, ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का संकेत देता है। धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से शिवलिंग की पूजा करने से मानसिक सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता प्राप्त होती है। यही कारण है कि अक्सर लोग घर के मंदिर में भी शिवलिंग की स्थापना करना चाहते हैं। काला शिवलिंग आमतौर पर पत्थर या नर्मदा नदी से प्राप्त शिवलिंग के रूप में देखा जाता है। नर्मदा से प्राप्त शिवलिंग को नर्मदेश्वर कहा जाता है। इसे शक्ति, गंभीरता और तप का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काला शिवलिंग नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक माना जाता है। काला शिवलिंग रखने के फायदे घर में आध्यात्मिक वातावरण मजबूत होता है मन को स्थिरता और शांति मिलती है नकारात्मक सोच और तनाव कम करने में मदद मिलती है शिव भक्ति में गहराई आती है हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि काला शिवलिंग घर के मंदिर में स्थापित नहीं करना चाहिए। इसका सबसे उचित स्थान मंदिर होता है। सफेद शिवलिंग को शांति, सौम्यता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह अक्सर संगमरमर या सफेद पत्थर से बना होता है। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सफेद शिवलिंग घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है। सफेद शिवलिंग रखने के फायदे घर में सुख-शांति का माहौल बनता है परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है मानसिक तनाव कम होता है पूजा स्थल आकर्षक और शांतिपूर्ण लगता है जो लोग पहली बार घर में शिवलिंग स्थापित कर रहे हैं, उनके लिए सफेद शिवलिंग को आसान और शुभ विकल्प माना जाता है। घर में पूजन के लिए सफेद शिवलिंग सबसे अच्छा माना जाता है।
ज्योतिष गणना के अनुसार, साल 2026 में खप्पर योग 1 मई 2026 से शुरू हो चुका है और यह 29 जून 2026 तक रहेगा। यानी मई और जून के इन दो महीनों में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। हालांकि मई के मध्य में इसका असर ज्यादा माना जाता रहा है। ज्योतिषियों का यह भी मानना है कि अमावस्या के दिन संक्रांति होने के दौरान भी यह योग बनेगा जो ज्यादा नकारात्मक रहेगा।