9 जुलाई 2026 (गुरुवार) & गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए: 10 जुलाई 2026, शुक्र & Not Forget 29 जुलाई 26 गुरु पूर्णिमा, गुरु की वाणी की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं & गुप्त नवरात्रि 15 JULY  दुर्लभ शुभ संयोग ;बगलामुखी की पूजा का विधान

9 जुलाई 2026 (गुरुवार) गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के साथ ^ घर से थोड़ा शुद्ध घी या जीरा खाकर निकलें।  गुप्त नवरात्रि साधना, पूजा और मनोकामना पूर्ण करने का पर्व माना जाता है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की भी विशेष आराधना की जाती है. इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई से हो रही है और पहले ही दिन गुरु और चंद्रमा की युति से लक्ष्मी नारायण योग बन रहा है, जो बेहद शुभ संयोग है. ऐसे योग बार-बार नहीं बनते.

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि (सुबह 10:37 बजे तक, फिर दशमी) है。 चंद्रमा मेष राशि में और सूर्य मिथुन राशि में रहेंगे。 इस दिन का शुभ अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:59 तक रहेगा, और राहुकाल दोपहर 02:10 से 03:54 तक रहेगा & सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह से दोपहर 02:56 तक रहेगा。 पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की नवमी पर विशेष धार्मिक कार्यों और प्रार्थनाओं के लिए यह समय अच्छा माना जाता है & 9 जुलाई को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। इस तिथि पर अश्विनी नक्षत्र और सुकर्माण योग का विशेष संयोग बनेगा। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर मेष राशि में होगा, जिसके स्वामी मंगल होते हैं। 

नवमी तिथि सुबह 10:44 तक है, इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो अगले दिन (10 जुलाई) सुबह 08:58 तक रहेगी। सूर्योदय: सुबह 05:30 सूर्यास्त: शाम 07:22

गुरु ही जीवन के अस्तित्व को स्थिरता दे सकता है & गुरु के आगमन से समस्त अनिष्ट का नाश होता है और मानव जीवन का भाग्योदय & गुरु की वाणी की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं। जीवन में कोई भी यज्ञ, अनुष्ठान, मांगलिक कार्य गुरु के आज्ञा से करना चाहिए, क्योंकि गुरु वाणी से और गुरु के आदेश से समस्त दोष-विघ्न समाप्त हो जाता है और गुरु की वाणी की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं। जिस मानव के जीवन में गुरु का सानिध्य रहता है, वह मानव जीवन धन्य हो जाता है।

गुरु ही जीवन चक्र के प्रत्येक बिंदु का धुरी है। गुरु मानव जीवन और सभ्य समाज का निर्माण करता है और जीवन को प्रारब्ध के बंधन से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाता है तथा आपके मन की गति को निर्धारित करता है। गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, दिन बुधवार और सूर्य के नक्षत्र उत्तराषाढ़ा में मनाया जायेगा, चूंकि चंद्रमा इस दिन मकर राशि में रहेंगे। सूर्य का नक्षत्र होने से गुरु पूर्णिमा का विशेष प्रभाव रहेगा। यह समय रहेगा कि गुरु के कृपा और आशीर्वाद से जीवन में सूर्य की प्रबलता प्राप्त होगी और जीवन तेजोमय रहेगा।

जीवन में गुरु के आगमन से समस्त अनिष्ट का नाश होता है और मानव जीवन का भाग्योदय प्रारम्भ होता है। जीवन में बिना गुरु के किया हुआ यज्ञ, दान, तीर्थ सब व्यर्थ जाता है। गुरुपूर्णिमा केवल गुरु वंदन का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में मार्गदर्शन देने वाले हर व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और आत्ममूल्यांकन का अवसर

गुरु के सानिध्य में किए हुए अनुष्ठान, शुभ कार्य तथा ईश्वर की भक्ति सफल होती है। गुरु का दिया हुआ मंत्र के जाप करने से आपकी समस्त मनोकामना पूर्ण करता है तथा गुरु मंत्र के प्रभाव से किसी भी अनिष्ट का प्रभाव जीवन में नहीं पड़ता है। ग्रह बाधा भी शांत होता है तथा ईश्वर की प्रसन्नता प्राप्त होती है तथा जीवन में सात्विकता प्रदान करता है।

  •  पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 18 मिनट पर होगी।
  • पूर्णिमा तिथि का समापन 29 जुलाई 2026 को रात 8 बजकर 5 मिनट पर माना जा रहा है।
  • उदया तिथि के आधार पर 29 जुलाई 2026 को ही गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। मार्गदर्शन देने वाले व्यक्ति का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें। गुरु की पूजा करें तथा उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार उपहार या दक्षिणा अर्पित करें। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, धन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
  •  व्यासपूजा की जाती है, वेद व्यास जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वैदिक परम्परा के अनुसार गुरु को जीवन में और ब्रह्माण्ड में सर्वोपरि माना गया है। गुरु प्रकाश की ओर ले जाने का कारक है और मानव जीवन तथा जीवन का अभिप्राय सार्थक सिद्ध करने वाला होता है।
  • जब जीवन में गुरु का आगमन होता है, गुरु अपने शिष्य को नीति और अनीति, धर्म और अधर्म, अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का बोध करवाता है। जीवन में अध्यात्म का बोध होता है। गुरु अपने शिष्य को प्रारब्ध और पश्चाताप के बंधन से मुक्त करता है तथा जीवन को प्रकाश की ओर ले जाता है, कार्मिक विषयों से मोक्ष देता है। गुरु को शिव का स्वरूप माना जाता है। आज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन किया जाता है।

तिथि: नवमी (सुबह 10:37 तक, फिर दशमी)
नक्षत्र: अश्विनी (दोपहर 02:56 तक, फिर भरणी)
योग: सुकर्मा (सुबह 10:12 तक, फिर धृति)

राहुकाल: दोपहर 02:10 से 03:54
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:59
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:11 से 07:32

योगिनी एकादशी शुक्रवार, जुलाई 10, 2026 को

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारम्भ- 10 जुलाई 2026 को 08:16 ए एम से,  एकादशी तिथि समाप्त- 11 जुलाई, 2026 को 05:22 ए एम पर।  पारण/ व्रत तोड़ने का समय- 11 जुलाई को 01:50 पी एम से 04:36 पी एम जो श्रद्धालु 10 जुलाई को व्रत रखेंगे, उनके लिए पारण (व्रत खोलने) का शुभ समय उपरोक्तानुसार रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय- 10:32 ए एम पर गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए: 10 जुलाई 2026, शुक्र * साधु-संतों के लिए: 11 जुलाई 2026, शनिवार को व्रत रखा जाएगा।

योगिनी एकादशी निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आती है तथा इस एकादशी का व्रत करने से समस्त पाप मिट जाते हैं और जीवन में समृद्धि और अनंत आनंद की प्राप्ति होती है।

चार बार नवरात्रि आती है, लेकिन आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि को सबसे खास माना जाता है. इसकी वजह यह है कि इस दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ दस महाविद्याओं की साधना भी की जाती है. ज्योतिषाचार्य की मानें, तो इस बार की गुप्त नवरात्रि कई मायनों में बेहद शुभ रहने वाली है. कई वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि नवरात्रि के पहले ही दिन एक शुभ युति का निर्माण होगा. यह योग धन, सुख, समृद्धि और उन्नति देने वाला माना जाता है. शुभ संयोग का असर खास तौर पर तीन राशियों पर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा

 15 जुलाई को सुबह 5 बजकर 33 मिनट से 10 बजकर 09 मिनट तक घटस्थापना का सबसे उत्तम समय रहेगा. इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापना कर नवरात्रि की शुरुआत करना फलदायी माना गया है. लक्ष्मी नारायण योग का प्रभाव तीन राशियों के ऊपर बेहद सकारात्मक पड़ने वाला है – कर्क, तुला और मकर.

सनातन परंपरा में शक्ति की साधना के लिए साल भर में चार बार पड़ने वाली नवरात्रि को अत्यंत ही शुभ और शीघ्र फलदायी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार इन चार नवरात्रि में से दो नवरात्रि चैत्र और आश्विन मास में पड़ती है, जिसमें देवी दुर्गा की प्रत्यक्ष रूप से साधना-आराधना बड़ी धूम-धाम से की जाती है तो वहीं माघ और आषाढ़ मास में पड़ने वाली नवरात्रि में देवी दुर्गा की गुप्त रूप से पूजा और आराधना करने का विधान है.

पंचांग के अनुसार इस साल आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का महापर्व 15 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 23 जुलाई तक मनाया जाएगा. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि कोई साधक इन पावन 9 दिनों में अपनी राशि के अनुसार देवी की साधना करता है तो उसकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होती है. आइए जानते हैं कि गुप्त नवरात्रि में किस राशि के व्यक्ति को देवी पूजा का क्या उपाय करना चाहिए. 

कन्या राशि के जातकों को देवी की पूजा में विशेष रूप से हरे रंग की चुनरी, पान और हरी चूड़ियां अर्पित करना चाहिए. कन्या राशि के जातकों को माता को शीघ्र ही प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन पूजा में दुर्गा चालीसा का पाठ और ‘ॐ शूल धारिणी देव्यै नम:’ का मंत्र जपना चाहिए. 

वृश्चिक राशि के जातकों को देवी दुर्गा की गुप्त साधना करते हुए पूजा में विशेष रूप से गुड़हल, गुलाब जैसे लाल रंग के पुष्प अर्पित करना चाहिए. साथ ही साथ माता (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)को लाल रंग की चुनरी, लाल फल और लाल रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए. शक्ति की साधना के दौरान वृश्चिक राशि के साधकों को ‘ॐ शक्तिरूपायै नम:’ मंत्र का जप कमलगट्टे की माला से जपना चाहिए. 

CA;LL US 9412932030

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