By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor Mob. 9412932030 Bagla Mukhi Peeth… Banjara wala Dehradun
12 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि (प्रदोष व्रत) है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र और वृद्धि योग रहेगा。सूर्य देव उत्तरायण और वर्षा ऋतु में रहेंगे。रविवार होने के कारण इस दिन सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व

12 जुलाई 2026, रविवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास रहेगा। इस दिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। पंचांग के अनुसार आज रोहिणी नक्षत्र और वृद्धि योग का प्रभाव रहेगा। ग्रहों की स्थिति में सूर्य मिथुन राशि में, चंद्रमा और मंगल… चंद्रमा और मंगल वृष राशि में, जबकि गुरु कर्क राशि में स्थित रहेंगे। दिन की शुरुआत सूर्योदय के साथ ग्रहों की विशेष स्थिति से होगी, जिसका असर ज्योतिषीय गणनाओं में महत्वपूर्ण माना जाता है।.
आज दिन की शुरुआत वृषभ राशि के चंद्रदेव के साथ होगी, जिससे काम और पैसों के मामलों में एक स्थिर दृष्टिकोण बना रहेगा। इसके बाद शाम के समय चंद्रदेव मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जिससे बातचीत, नेटवर्किंग और नए विचारों का महत्व अचानक बढ़ जाएगा। सूर्यदेव और उल्टी चाल से चल रहे बुध देव दोनों ही मिथुन राशि में बने हुए हैं, जो यह इशारा करते हैं कि अपनी पुरानी योजनाओं को दोबारा देखना आपके लिए बहुत जरूरी रहेगा। इस समय किसी भी नए वादे पर तुरंत आगे बढ़ने से बचें। वृषभ राशि के मंगल देव लगातार प्रयास करने की शक्ति देंगे, वहीं कर्क राशि के बृहस्पतिदेव दूर की सोच रखकर आगे बढ़ने के मौकों को सहारा दे रहे हैं। मीन राशि के शनिदेव यह याद दिलाते हैं कि धीरज रखने से ही आपको सबसे बेहतरीन परिणाम मिलेंगे।

कैलास का क्या अर्थ है? . तीर्थ केवल धार्मिक स्थल नहीं रहे, बल्कि सांस्कृतिक एकात्मता के केंद्र भी रहे हैं। उत्तर में अमरनाथ और बदरीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम्, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारका—इन सभी तीर्थों ने भारत को भौगोलिक नहीं, सांस्कृतिक रूप से जोड़ा है। कैलास-मानसरोवर इस व्यापक तीर्थ-परंपरा का सर्वोच्च शिखर है।. संस्कृत ग्रंथों का तिब्बती भाषा में अनुवाद हुआ। इस प्रकार हिमालय ने दो सभ्यताओं के बीच संवाद का कार्य किया।.
12 जुलाई को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस तिथि पर रोहिणी नक्षत्र और वृद्धि योग का विशेष संयोग बनेगा। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर वृषभ राशि में होगा, जिसके स्वामी शुक्रदेव होते हैं। सावन में ग्रहों का बनेगा कई संयोग, इन राशियों के ऊपर रहेगी भगवान शिव की विशेष कृपा

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बहुत ही खास और पवित्र मान जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं और हर तरह की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। इस वर्ष सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होने वाला है ,जिसमें कई ग्रहों के संयोग के कारण योग का निर्माण हुआ है। ऐसे में सावन का महीना कुछ राशि वालों के लिए बहुत ही खास और पवित्र माना जाएगा।