16 जुलाई 2026 (गुरुवार) को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस दिन आश्लेषा नक्षत्र रहेगा और चंद्रमा कर्क राशि में गोचर करेंगे。 दिन के शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:33 से 12:21 तक श्रेष्ठ रहेगा。 राहुकाल दोपहर 02:10 से 03:53 तक रहेगा & सूर्योदय: सुबह 05:34 बजे सूर्यास्त: शाम 07:20 बजे ^ अभिजीत मुहूर्त: 11:33 AM से 12:21 PM & 16 जुलाई 2026 को जगन्नाथ रथयात्रा और कर्क संक्रान्ति का विशेष महत्व है। रथयात्रा भगवान जगन्नाथ की भक्ति और उत्सव का प्रतीक मानी जाती है, जबकि कर्क संक्रान्ति सूर्य के राशि परिवर्तन का महत्वपूर्ण अवसर है।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN 9412932030
आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई, 2026, दिन बुधवार से शुरू होकर 23 जुलाई, 2026, दिन गुरुवार तक रहेगी। नवरात्रि का समापन (नवमी): 23 जुलाई, 2026 को व्रत के पारण के साथ होगा। गुप्त नवरात्रि में मुख्य रूप से तंत्र साधना और मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ-साथ ‘दस महाविद्याओं’ की गुप्त रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। 16 जुलाई, 2026 को दूसरा नवरात्र है, जो मां ब्रह्मचारिणी की पूजा को समर्पित
गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से गुप्त सिद्धियों, तंत्र साधना और दस महाविद्याओं की पूजा के लिए जानी जाती है。 आषाढ़ माह में पड़ने वाली इस नवरात्रि का सावन (श्रावण) के महीने से गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव माना जाता है, क्योंकि यह ठीक सावन के आरंभ से कुछ समय पहले या सावन के पावन महीने के दौरान ही पड़ती है, जो शिव और शक्ति (मां दुर्गा) की संयुक्त आराधना का उत्तम समय है गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं में से देवी त्रिपुर सुंदरी या अन्य महाविद्याओं की गुप्त आराधना की जाती है。 गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं: मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है.

दोनों वक्त की पूजा में माता रानी को लौंग और बताशे का भोग लगाएं.
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के इस पावन दिन भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) के लिए रथ पर सवार होकर निकलते हैं। इस दिन रथयात्रा के दर्शन या भगवान विष्णु/कृष्ण की पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
जुलाई 2026 महीने की 16वीं, 17वीं, 23वीं और 24वीं तिथियां शुभ हैं, क्योंकि ये धन, सद्भाव और दीर्घकालिक समृद्धि ला सकती हैं । भारतीय परंपरा में किसी संख्या का सबसे व्यापक सांस्कृतिक प्रयोग हुआ है, तो वह संख्या 9 है। नवरात्रि के नौ दिन, नवदुर्गा, नवग्रह, नवरस, नवधा भक्ति, शरीर के नौ द्वार, नवनिधि और नौ प्रकार की साधनाएं सभी केवल धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भारतीय चिंतन में पूर्णता (Completion), ऊर्जा (Energy) और रूपांतरण (Transformation) के द्योतक हैं। भारतीय संस्कृति में त्रिदेव, त्रिगुण, पंचमहाभूत, षड्दर्शन, सप्तऋषि, अष्टांग योग और नवदुर्गा जैसी अवधारणाएं विकसित हुईं।
16 जुलाई 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ जगन्नाथ रथयात्रा और कर्क संक्रान्ति जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी मनाए जा रहे हैं। शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि सुबह 8:54 AM तक प्रभावी रहेगी। द्वितीया को संतुलन, सहयोग और नए संबंधों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। इसके बाद अगली तिथि आरंभ होगी, जिससे दिन के उत्तरार्ध में पंचांगीय प्रभाव में परिवर्तन आएगा।
गुरुवार है, जो देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। यह दिन ज्ञान, आध्यात्मिक चिंतन, गुरु सम्मान, धार्मिक कार्यों और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए शुभ माना जाता है। अध्ययन, सलाह-मशविरा और पारिवारिक चर्चाओं के लिए भी यह दिन उपयोगी समझा जाता है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों परंपराओं के अनुसार आषाढ़ मास चल रहा है। यह धार्मिक अनुष्ठानों, व्रत और आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण महीनों में से एक माना जाता है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) तथा शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। भारतीय पंचांग में इन संवतों का उपयोग धार्मिक तिथियों, पर्वों और शुभ मुहूर्तों के निर्धारण में किया जाता है। वर्तमान में ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव बना हुआ है, हालांकि मौसम में धीरे-धीरे परिवर्तन के संकेत भी दिखाई देने लगते हैं। इस समय वातावरण में गर्मी और वर्षा ऋतु की तैयारी दोनों का मिश्रित प्रभाव देखने को मिल सकता है।
आज उत्तरायण का काल जारी है। पारंपरिक मान्यताओं में यह अवधि शुभ कार्यों और धार्मिक आयोजनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। सूर्योदय 5:18 AM पर और सूर्यास्त 6:51 PM पर होगा।
संख्या 9 भारतीय सभ्यता में पूर्णता और समग्रता का प्रतीक
नवदुर्गा – शक्ति के नौ स्वरूप। नवग्रह – काल और कर्म के प्रतीक।
• नवरस – मानव भावनाओं की पूर्ण अभिव्यक्ति।
• नवधा भक्ति – ईश्वर तक पहुंचने के नौ मार्ग।
• शरीर के नौ द्वार – आत्मा के निवास की उपनिषदिक अवधारणा।
• नवनिधि – समृद्धि के नौ प्रतीक।
• नौ माह का गर्भकाल – सृष्टि के विकास का जैविक चक्र।
16 जुलाई 2026, गुरुवार – दूसरा नवरात्र – मां ब्रह्मचारिणी पूजा
17 जुलाई 2026, शुक्रवार – तीसरा और चौथा नवरात्र – मां चन्द्रघण्टा और मां कूष्माण्डा की पूजा
18 जुलाई 2026, शनिवार – पांचवां नवरात्र – मां स्कन्दमाता पूजा
19 जुलाई 2026, रविवार – छठा नवरात्र – मां कात्यायनी पूजा
20 जुलाई 2026, सोमवार – सातवां नवरात्र – मां कालरात्रि पूजा
21 जुलाई 2026, मंगलवार – आठवां नवरात्र – दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी पूजा
22 जुलाई 2026, बुधवार – नौवां नवरात्र – मां सिद्धिदात्री पूजा, महा नवमी
23 जुलाई 2026, गुरुवार – नवरात्रि व्रत का पारण
27 जुलाई 2026 को शनि देव मीन राशि में वक्री (Retrograde) होने जा रहे हैं. शनि की यह उल्टी चाल ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस साल की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जा रही है. जहां एक तरफ शनि की वक्री चाल से कई राशियों के जीवन में उथल-पुथल मचेगी,
शनिवार के दिन: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
दान करें: शनिवार को काले तिल, काली उड़द या छाते का दान किसी जरूरतमंद को करें.
मंत्र जाप: रोज़ाना ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें.
फ्रांस की घंटी जगन्नाथ धाम की सबसे रोचक ऐतिहासिक धरोहर

समुद्र के तूफान से जगन्नाथ धाम तक पहुंची फ्रांस की घंटी
18वीं शताब्दी में फ्रांस का एक विशाल जहाज, जिसकी कमान कैप्टन अलबेक बिटो( के हाथों में थी, भारत के पुडुचेरी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था. जहाज पर कई मूल्यवान सामान के साथ एक बड़ी घंटी भी रखी हुई थी, जिसे मूल रूप से एक चर्च में स्थापित किया जाना था.
यात्रा के दौरान अचानक समुद्र का jagan nath ji बिगड़ गया, देखते ही देखते जहाज एक भीषण तूफान की चपेट में आ गया. ऊंची-ऊंची लहरें जहाज को इधर-उधर पटक रही थीं और ऐसा लग रहा था मानो किसी भी पल जहाज समुद्र में समा जाएगा. जहाज पर मौजूद यात्री और नाविक भयभीत हो उठे.
उसी जहाज पर एक उड़िया नाविक भी सवार था, जो भगवान जगन्नाथ का बहुत बड़ा भक्त था. जब उसने कप्तान और अन्य लोगों को निराश देखा, तो उसने भगवान जगन्नाथ की महिमा बताई किया. उसने कप्तान से कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभु जगन्नाथ से प्रार्थना करें, क्योंकि वे अपने भक्तों की रक्षा करने वाले भगवान माने जाते हैं.
उस नाविक की बात सुनकर कैप्टन अलबेक बिटो ने पूरे विश्वास के साथ भगवान जगन्नाथ को याद किया. उन्होंने मन ही मन एक संकल्प लिया कि यदि उनका जहाज इस भयंकर तूफान से सुरक्षित निकल गया, तो जहाज पर मौजूद बड़ी घंटी को भगवान जगन्नाथ के चरणों में समर्पित कर देंगे.
लोककथाओं के अनुसार, प्रार्थना के कुछ समय बाद समुद्र का प्रकोप धीरे-धीरे शांत होने लगा. जहाज सुरक्षित रूप से अपने मार्ग पर आगे बढ़ गया और एक बड़ी दुर्घटना टल गई. इस चमत्कारिक अनुभव से प्रभावित कप्तान ने अपनी मन्नत पूरी करने का निर्णय लिया.
बाद में वह घंटी भगवान जगन्नाथ को भेंट कर दी गई और जगन्नाथ पुरी मंदिर परिसर में स्थापित की गई. यही घंटी आज “फ्रेंच घंटी” के नाम से प्रसिद्ध है. माना जाता है कि यह केवल धातु से बनी एक वस्तु नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और भगवान के प्रति समर्पण की एक अनोखी कहानी की प्रतीक है.