गुप्त नवरात्र के कारण बहुत विशेष है और इस बार यह 12 वर्षों में पड़ने वाले दुर्लभ ‘गजकेसरी योग’ (चंद्रमा और गुरु की युति) और ‘बुध पुष्य योग’ के संयोग के साथ शुरू हो रहा है & यह दिन विशेष रूप से गुप्त सिद्धियां, मंत्र साधना और मां दुर्गा व दस महाविद्याओं की पूजा के लिए समर्पित है। यह दिन पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ & गुप्त नवरात्र काल में 2 सर्वार्थ सिद्धि योग और 3 रवि योग भी बनेंगे।

By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob 9412932030
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा, यानी 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। इस बार गुप्त नवरात्र 9 दिन तक रहेगी। खास बात यह है कि इसका शुभारंभ 12 साल बाद गजकेसरी योग और बुध पुष्य योग के दुर्लभ संयोग में हो रहा है। दस महाविद्याओं की साधना को समर्पित गुप्त नवरात्रि का आरंभ
15 जुलाई 2026 (बुधवार) गुप्त नवरात्र के कारण बहुत विशेष & 12 वर्षों में पड़ने वाले दुर्लभ ‘गजकेसरी योग’ (चंद्रमा और गुरु की युति) और ‘बुध पुष्य योग’ के संयोग के साथ शुरू
15 जुलाई को बुधवार, पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति रहेगी। चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा। सामान्यतः गुरु का एक ही राशि में आगमन 12 वर्ष में होता है, इसलिए यह संयोग बेहद विशेष माना जा रहा है।

15 जुलाई 2026 (बुधवार) का पंचांग आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है。 इस दिन पुष्य नक्षत्र, हर्षण योग और बव करण रहेगा。 दिन के मुख्य अशुभ समय राहुकाल में कोई भी नया कार्य करने से बचें, जबकि अभिजीत मुहूर्त किसी भी शुभ कार्य के लिए सबसे उपयुक्त समय है。 15 जुलाई 2026 (बुधवार) के पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है。 इस दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्र का पहला दिन है。 यह तिथि सुबह 11:51 बजे तक रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि लग जाएगी。
15 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि & इस तिथि पर पुष्य नक्षत्र और हरषाना योग का विशेष संयोग बनेगा। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर कर्क राशि में होगा, जिसके स्वामी चंद्रदेव होते हैं।

सुबह 5:54 बजे सूर्योदय और शाम 7:11 बजे सूर्यास्त होगा। 15 जुलाई 2026 को सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेगा, जबकि चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में अगले दिन 12:09 बजे संचार करेगा। 15 जुलाई 2026 (बुधवार) को हर्षण योग सुबह 8:03 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद वज्र योग शुरू हो जाएगा। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से लेकर 12:55 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है। राहुकाल दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक रहेगा, 15 जुलाई 2026 (बुधवार) को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में शयन करने चले जाते हैं। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत और अन्य मांगलिक कार्य अगले चार माह तक नहीं किए जाएंगे।

गुप्त नवरात्र के दौरान भड़ली नवमी का मुहूर्त रहेगा, लेकिन 16 जुलाई को गुरु तारा अस्त हो जाएगा। इस कारण इस अवधि में विवाह के मुहूर्त मान्य नहीं रहेंगे। आषाढ़ और माघ मास की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। यह काल साधना, उपासना और गुप्त विद्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के अनुसार, वर्षभर में चार नवरात्र आते हैं, जिनमें दो गुप्त और दो प्रकट होते हैं। आषाढ़ और माघ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहलाते हैं, जबकि चैत्र और अश्विन मास के नवरात्र प्रकट नवरात्र माने जाते हैं। साधना, उपासना तथा गुप्त विद्याओं के लिए गुप्त नवरात्र विशेष महत्व रखती है।
बुधवार और पुष्य नक्षत्र के मिलने से बुध-पुष्य योग बनता है। व्यापारिक सौदों, खरीदारी, बहीखाता पूजन और सोने/चांदी के आभूषण खरीदने के लिए रात 09:46 से पहले का समय सर्वोत्तम है।