3 सितंबर 2026, गुरुवार विशेष पर्व: शीतला सप्तमी ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:30 से 05:15 तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:55 से दोपहर 12:46 तक राहुकाल: दोपहर 01:55 से 03:30 तक सूर्योदय- सुबह 06:00 बजे सूर्यास्त- शाम 06:41 बजे चंद्रमा 3 सितंबर की सुबह राशि परिवर्तन & शीतला सप्तमी का पूजन किया जाता है। आज भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का दिन होने के कारण विशेष शुभ माना जाता है।

भगवान विष्णु के चरणों का ध्यान कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र बोलते हुए यात्रा आरंभ करें। भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत से परिपूर्ण हो! कल्याण हो!
3 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि देर रात 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इसी दिन शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालु शीतला माता की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की.
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि और गुरुवार का दिन है। सप्तमी तिथि 03 सितंबर को देर रात 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा कल रात 12 बजकर 29 मिनट तक रवि योग रहेगा। वहीं, कल रात 12 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके साथ कल 03 सितंबर को शीतला सप्तमी है
चंद्रमा 3 सितंबर 2026 की सुबह मेष राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर कर जाएंगे। चंद्रमा का यह गोचर सुबह 7 बजकर 26 मिनट पर होगा। मन, माता, अर्थ आदि के कारक ग्रह चंद्रमा जब अपनी उच्च राशि में जाएंगे तो इनकी शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी।
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:30 ए एम से 05:15 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 04:52 ए एम से 06:00 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:46 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:27 पी एम से 03:18 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:41 पी एम से 07:03 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 10:12 पी एम से 11:43 पी एम
- अमृत काल- 03:07 पी एम से 04:54 पी एम
रवि योग और कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। मान्यता है कि रवि योग में किया गया कार्य सफल होता है। सूर्य के प्रभाव वाला यह योग बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। सूर्य की ऊर्जा से भरपूर इस योग में किए गए कार्य को कोई बिगाड़ नहीं सकता। इस योग में सभी अनिष्ट शक्तियों को नष्ट करने की अद्भुत शक्ति मानी जाती है। अतः इस योग में जो भी कार्य किए जाएं, उनके सफल होने की मान्यता है। इसलिए रवि योग में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
वहीं, कृतिका नक्षत्र कुल 27 नक्षत्रों में कृतिका तीसरा नक्षत्र है। इसका पहला चरण मेष राशि में, जबकि बाकी तीन चरण वृष राशि में आते हैं। लिहाजा मेष और वृष, दोनों राशियों पर कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहता है। कृतिका नक्षत्र के दौरान सूर्यदेव की उपासना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं।
मेष राशि
चंद्रमा का गोचर आपके धन के द्वितीय भाव में होगा। इस गोचर के चलते आपको धन-धान्य की प्राप्ति हो सकती है। पारिवारिक जीवन में अच्छा समय बिताने का भी आपको मौका मिल सकता है। जो लोग राजनीति के क्षेत्र में हैं उनके प्रशंसकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अपनी वाणी से आप लोगों को प्रभावित कर पाएंगे। जो लोग लेखन, गायन, वादन आदि के क्षेत्र में हैं उनकी कोई रचना प्रसिद्धि पा सकती है।
वृषभ राशि
चंद्रमा का गोचर आपकी ही राशि में होगा ऐसे में आपके आत्मविश्वास में वृद्धि देखने को मिल सकती है। मानसिक रूप से आप प्रबल होंगे और सही समय पर सही फैसले ले पाएंगे। पारिवारिक जीवन में खुशियां आपको प्राप्त हो सकती हैं, कुटुंब के किसी सदस्य के जरिए शुभ समाचार भी मिल सकता है। कारोबारियों की योजनाएं सफल हो सकती हैं वहीं नौकरी पेशा लोगों को भी सुखद बदलाव कार्यक्षेत्र में देखने को मिल सकते हैं। दांपत्य जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।
कर्क राशि
चंद्रमा आपकी ही राशि के स्वामी हैं और वृषभ राशि में गोचर के दौरान आपके एकादश भाव में विराजमान रहेंगे। एकादश भाव लाभ का कारक माना जाता है, ऐसे में आपको भी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लाभ की प्राप्ति हो सकती है। निवेश किए गए धन से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। जो लोग विदेशों से जुड़ा कारोबार करते हैं उनको अच्छी डील मिल सकती है। इसके साथ ही पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आपको देखने को मिल सकते हैं।
कन्या राशि
चंद्रमा के गोचर के चलते आपका नवम भाव सक्रिय होगा जिसे भाग्य का भाव भी कहा जाता है। इस गोचर के प्रभाव से आपके अधूरे काम पूरे हो सकते हैं और किस्मत का भी आपको भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। कुछ नौकरी पेशा लोगों की अचानक से पदोन्नति हो सकती है। कन्या राशि के विद्यार्थियों के जीवन में भी सुखद बदलाव आ सकते हैं, एकाग्रता में वृद्धि देखने को मिलेगी।
4 सितंबर 2026 : श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में बाल गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और मिलकर भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। कहते हैं जो भी श्रद्धालु जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की सच्चे मन से आराधना करता है उसके जीवन के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।
चांदी की बांसुरी
जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को बांसुरी जरूर अर्पित करें। अगर संभव हो तो इस शुभ अवसर पर कान्हा को चांदी की छोटी सी बांसुरी जरूर चढ़ाएं। बांसुरी अर्पित करते समय कान्हा से अपनी मनोकामना मांगें। इसके बाद यह बांसुरी घर के मंदिर में ही या अपनी तिजोरी में रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
2. पीले वस्त्र
भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबर धारी कहा जाता है। कहते हैं पीला रंग उन्हें अति प्रिय है, इसलिए जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर कान्हा को पीले रंग की पोशाक जरूर पहनाएं। इससे बाल गोपाल की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
3. वैजयंती माला
जन्माष्टमी पर या इससे पहले भगवान कृष्ण के लिए वैजयंती माला जरूर खरीदें। फिर जन्माष्टमी की पूजा के दिन यह माला उन्हें पहनाएं। ऐसा माना जाता है कि श्रीकृष्ण को वैजयंती माला अर्पित करने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है और अटके हुए काम बनने शुरू हो जाते हैं।
4. मोर पंख
मोर पंख भगवान कृष्ण का बेहद प्रिय माना जाता है। इसी कारण से जन्माष्टमी के दिन इसे भगवान को अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में जन्माष्टमी पर कान्हा के मुकुट पर मोर पंख जरूर सजाएं।
5. शंख
जन्माष्टमी के दिन घर में एक नया दक्षिणावर्ती शंख लाना बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं इस शुभ दिन पर इस शंख में गंगाजल भरकर भगवान कृष्ण का अभिषेक करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।