02 सितंबर 2026 का पंचांग: बुधवार के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि दिन: बुधवार मास: भाद्रपद पक्ष: कृष्ण पक्ष तिथि: षष्ठी तिथि (भोर 04:27 AM, 03 सितंबर तक) विशेष व्रत: हलषष्ठी (हरछठ / ललही छठ) व्रत & सूर्योदय: सुबह 05:59 AM सूर्यास्त: शाम 06:42 PM & अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:55 AM से दोपहर 12:46 PM (लगभग) ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:00 AM से 04:48 AM BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & FOUNDER PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार का दिन है। षष्ठी तिथि 02 सितंबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा हलषष्ठी का व्रत किया जायेगा। वहीं, कल रात 9 बजकर 12 मिनट तक ध्रुव योग रहेगा। इसके साथ ही कल 02 सितंबर को देर रात 1 बजकर 43 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा कल दोपहर 1 बजकर 46 मिनट पर शुक्र तुला राशि में गोचर

2 सितंबर को हलषष्ठी व्रत है। यह पर्व श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। चूंकि बलराम जी का प्रधान शस्त्र हल और मूसल है। इस दिन को हलषष्ठी, हरछठ या ललही छठ के रूप में मनाया जाता है। बलराम को हलधर के नाम से जाना जाता है। इस दिन गाय के दूध और दही का सेवन करना भी वर्जित है। इस दिन व्रत करने से संतानहीन दंपति को श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है और जिनकी पहले से संतान है, उनकी संतान की आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।
बलरामजी के जन्मोत्सव
भद्राज मंदिर: उत्तराखंड में भगवान बलराम का एकमात्र धाम। ,,,,,,,, पहाड़ी की चोटी पर स्थित भद्राज मंदिर में भगवान बलभद्र की पूजा की जाती है। ,,,,,,
चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक साधक बगलामुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून 9412932030

भगवान बलभद्र एक जाग्रत देवता है ,,,,, इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में महाभारत युद्ध के ठीक बाद, पांडवों के समय की मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान बलराम ने इस पहाड़ी पर आकर तपस्या की थी। स्थानीय मान्यताओं में बलभद्र जी को ‘भद्रराज देवता’ कहा जाता है , विशेष रूप से ‘रोट कढ़ाई’ (आटे और घी का हलवा) प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं। दूध घी मक्खन का भोग लगता है ,,,, भगवान बलभद्र के विषय में समाज के अधिकांश लोगों को विशेष जानकारी नहीं है,,,,,, पहाड़ों की रानी मसूरी से 15 किमी की दूरी भगवान भद्रराज का मंदिर स्थित है. भद्रराज मंदिर भगवान कृष्ण के छोटे भाई बलभद्र को समर्पित है. मान्यता है कि भगवान बलराम ने यहां पर राक्षस का वध किया. साथ ही चरवाहों के साथ पशुओं को भी चराया था.
देहरादून के पास मसूरी की भद्राज पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर लगभग 7500 फीट की ऊंचाई पर है। भगवान बलराम को समर्पित यह स्थल आस्था और एडवेंचर ट्रेकिंग, दोनों का अद्भुत संगम है। लोक मान्यता है कि बलराम जी ने यहां पशुपालकों की रक्षा की थी और आज भी भद्राज देवता के रूप में उनकी आस्था के केंद्र बने हुए हैं