6 सितंबर 2026, रविवार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि ^ 6 सितंबर को सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र का खास संयोग & वार: रविवार (Sunday) मास / पक्ष: भाद्रपद, कृष्ण पक्ष तिथि: दशमी तिथि शाम 07:29 बजे तक, उसके बाद एकादशी तिथि नक्षत्र: आर्द्रा नक्षत्र रात्रि 07:52 बजे तक, उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र & अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:40 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:26 से 05:11 बजे तक विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 से 03:30 बजे तक राहुकाल (Rahu Kaal): शाम 05:03 से 06:37 बजे तक
By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & President : Bagla Mukhi Peeth Dehradun 9412932030
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर रात्रि 7 बजकर 31 मिनट से शुरू हो जाएगी। वहीं एकादशी तिथि की समाप्ति 7 सितंबर को 5 बजकर 6 मिनट पर होगी। उदयातिथि में एकादशी 7 सितंबर को है इसलिए अजा एकादशी का व्रत भी 7 सितंबर को रखा जाना ही सही माना जाएगा। वहीं व्रत का पारण 8 सितंबर को सुबह 6 बजे के बाद होगा।

समाज या राजनीति के क्षेत्र में अपना रुतबा कायम करना चाहते हैं, तो

शनिवार 6 सितंबर के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। इस दिन सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र & रविवार 6 सितंबर के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। शाम 7 बजकर 30 मिनट के बाद एकादशी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। आज शाम 7 बजकर 53 मिनट तक आर्द्रा नक्षत्र रहेगा जिसका स्वामी ग्रह राहु है। इसके साथ ही सिद्धि योग भी आज विराजमान रहेगा।
रविवार के दिन सिद्धि योग में ये उपाय किए जाएं तो मनचाहे परिणाम आपको जीवन में प्राप्त हो सकते हैं। कुछ विशेष उपाय : ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र में कुछ खास उपाय करने से जीवन की अलग-अलग परेशानियों को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति में मदद
आर्द्रा नक्षत्र में रात को सोते समय अपने सिरहाने पर 2 मूली रखकर सोएं और सुबह उठकर मंदिर में दान कर दें। यह प्रक्रिया आर्द्रा नक्षत्र से शुरू करके लगातार 7 दिनों करें। वहीं, मंदिर में गुड़ या गुड़ से बनी कोई चीज दान करनी चाहिए। & आर्द्रा नक्षत्र के दौरान हाथ में कच्चा कोयला लेकर बहते जल में प्रवाहित कर दें। चांदी की एक ठोस गोली अपने ऑफिस या दुकान की तिजोरी में रख दें। & सफलता नहीं मिल पा रही है तो देवी सरस्वती के मंदिर जाएं। देवी मां की विधिवत पूजा करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। & आर्द्रा नक्षत्र में रात को सोते समय अपने सिरहाने पर चन्दन का छोटा सा टुकड़ा रख कर सोएं और सुबह उस चन्दन को राहु के मंत्र का जाप करते हुए जल में प्रवाहित कर दें। मंत्र है: ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स राहवे नम
आर्द्रा नक्षत्र में संभव हो तो चांदी के बने हाथी को अन्यथा मिट्टी के हाथी को अपने घर में स्थापित करें। साथ ही पक्षियों को बाजरा डालें।
समाज या राजनीति के क्षेत्र में अपना रुतबा कायम करना चाहते हैं, तो मंदिर में तिल या गेहूं से बनी किसी चीज का दान करें। तिल या फिर गेहूं का दान करें।
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर रात्रि 7 बजकर 31 मिनट से शुरू हो जाएगी। वहीं एकादशी तिथि की समाप्ति 7 सितंबर को 5 बजकर 6 मिनट पर होगी। उदयातिथि में एकादशी 7 सितंबर को है इसलिए अजा एकादशी का व्रत भी 7 सितंबर को रखा जाना ही सही माना जाएगा। वहीं व्रत का पारण 8 सितंबर को सुबह 6 बजे के बाद होगा। ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 AM से 05:38 AM तक प्रातः सन्ध्या: 05:15 AM से 06:25 AM तक अभिजित मुहूर्त: 12:12 PM से 01:01 PM तक गोधूलि मुहूर्त: 06:48 PM से 07:11 PM तक
अजा एकादशी के दिन कई शुभ योग भी बनने जा रहे हैं। इस दिन सुबह के समय पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा और रात्रि के समय पुष्य नक्षत्र। इसके साथ ही चंद्र-गुरु की युति से इस दिन गजकेसरी योग का निर्माण होगा। इस दिन पंचमहापुरुष योग में से एक मालव्य योग का निर्माण शुक्र के स्वराशि में होने बनेगा। इसके साथ ही बुध ग्रह अपनी उच्च राशि में होकर भद्र योग का निर्माण इस दिन करेंगे। ऐसे में अजा एकादशी का व्रत रखने से और इस दिन तुलसी से जुड़े धार्मिक उपाय करने से भक्तों को बेहद शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। जो लोग व्रत या उपाय न कर पाएं उन्हें भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करने से भी सुखद परिणाम मिल सकते हैं।
क्या है पंच महापुरुष योग?
ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बनने वाले योग हमारे जीवन पर भी प्रभाव डालते हैं। ज्योतिष में कई अच्छे और बुरे योगों की जानकारी मिलती है, लेकिन सभी योगों में पंच महापुरुष योग को बेहद खास और शुभ माना जाता है। यह योग कैसे बनता है और कैसे परिणाम इससे मिलते हैं,
कुंडली में मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि पंच महापुरुष योग का निर्माण करते हैं। मंगल से बनने वाले योग को रूचक योग, बुध से बनने वाले योग को भद्र योग, गुरु से बनने वाले योग को हंस योग, शुक्र से बनने वाले योग को मालव्य योग, और शनि से बनने वाले योग को शश योग कहा जाता है। कुंडली के पांच अलग-अलग ग्रहों से बनने वाले इन योगों को ही पंच महापुरुष योग का नाम दिया गया है। इन पांच योगों में से एक भी अगर आपकी कुंडली में बनता है तो आपको बेहद अच्छे फल प्राप्त होते हैं। आइए अब जानते हैं कि ये योग बनते कैसे हैं।
मंगल का रुचक योग
कुंडली के केंद्र भाव (1, 4, 7, 10) में जब मंगल अपनी स्वराशि यानि मेष या वृश्चिक में या फिर अपनी उच्च राशि मकर में हों तो रुचक योग बनता है। ऐसे लोगों को साहसी और पराक्रमी माना जाता है। मंगल के प्रभाव से नेतृत्व करने की भी इनमं अच्छी क्षमता होती है। सेना, पुलिस, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में ये सफल होते हैं।
बुध का भद्र योग
जब बुध ग्रह कुंडली के केंद्र भावों में अपनी राशियों मिथुन या कन्या में हों तो भद्र योग बनता है। इस योग के बनने से व्यक्ति को अच्छी बौद्धिक क्षमता मिलती है। ऐसे लोग जबरदस्त कारोबारी हो सकते हैं। टेक्निकल क्षेत्रों में ये ऊंचाइयों को छू सकते हैं।
गुरु का हंस योग
शुभ ग्रह गुरु जब कुंडली के केंद्र भावों में अपनी राशि या फिर अपनी उच्च राशि में होते हैं तो हंस योग बनता है। गुरु की राशियां धनु और मीन हैं जबकि उच्च राशि कर्क। इस योग के बनने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है, धन वैभव की कोई कमी नहीं होती और मान-सम्मान भी व्यक्ति को खूब मिलता है।
शुक्र का मालव्य योग
शुक्र जब केंद्र भावों में अपनी राशियों वृषभ या तुला में हो या फिर अपनी उच्च राशि मीन में हो तो व्यक्ति को भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। ऐसे लोग कलात्मक क्षेत्रों में खूब नाम कमाते हैं और दृढ़निश्चयी होते हैं।
शनि का शश योग

शनि जब कुंडली के केंद्र भावों में मकर या कुंभ राशि में हों या फिर अपनी उच्च राशि तुला में हों तो शश योग बनता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति न्यायप्रिय होता है। सरकारी क्षेत्रों में ऐसे लोगों को सफलता प्राप्त होती है। ऐसे लोग अच्छे जज या वकील हो सकते हैं।