4 सितंबर 2026, शुक्रवार &  भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जन्माष्टमी ^ मध्यरात्रि में कान्हा जन्म & कालाष्टमी भी & आधी रात को कृष्ण जन्म & जन्माष्टमी पर इन का होगा भाग्योदय ^ बाल गोपाल को पीले रंग के वस्त्र धारण करायें

4 सितंबर 2026, शुक्रवार &  4 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। रात 11:57 से 12:43 के आसपास (लगभग मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म & अष्टमी तिथि देर रात 12 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। वहीं हर्षण योग दोपहर बाद 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। साथ ही रोहिणी नक्षत्र रात 11 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा इस दिन कालाष्टमी भी मनाई जाएगी। & जन्माष्टमी के दिन व्रत & आधी रात को 12 बजे बाल गोपाल की पूजा ^  भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि ^ BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH MOB. 9412932030

धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि की आधी रात को मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। 04 सितंबर को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा।  इस तिथि पर रोहिणी नक्षत्र और हरषाना योग का विशेष संयोग बन रहा है। इस तिथि पर चंद्रमा का गोचर वृषभ राशि में है, जिसके स्वामी मंगलदेव

  • जन्माष्टमी पूजा का समय – 11:57 PM से 12:43 AM, 5 सितंबर
  • मध्यरात्रि का क्षण – 12:20 AM, सितम्बर 05

4 सितंबर 2026 जन्माष्टमी चंद्रोदय समय

जन्माष्टमी के दिन चंद्रमा रात 11 बजकर 29 मिनट पर निकलने की संभावना है।  अष्टमी तिथि 4 सितंबर को तड़के 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर रात 12:13 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र रात्रि 11:03 बजे तक रहेगा।

  • ब्रह्म मुहूर्त – 04:30 AM से 05:15 AM
  • प्रातः सन्ध्या – 04:52 AM से 06:00 AM
  • अभिजित मुहूर्त – 11:55 AM से 12:45 PM
  • विजय मुहूर्त – 02:26 PM से 03:17 PM
  • गोधूलि मुहूर्त – 06:39 PM से 07:02 PM
  • सायाह्न सन्ध्या – 06:39 PM से 07:48 PM
  • अमृत काल – 08:03 PM से 09:33 PM
  • निशिता मुहूर्त – 11:57 PM से 12:43 AM, सितम्बर

द्वापर युग में मथुरा पर राजा उग्रसेन का शासन था। उनका पुत्र कंस बेहद अत्याचारी था। कंस ने अपने पिता को गद्दी से हटाकर मथुरा पर अधिकार कर लिया और प्रजा पर अत्याचार करने लगा। हालांकि, अपनी बहन देवकी से वह बहुत प्रेम करता था, लेकिन उसी प्रिय बहन को कंस ने बहुत कष्ट भी दिए। देवकी का विवाह यदुवंशी सरदार वसुदेव से हुआ था।

बड़े अरमानों से कंस ने देवकी का विवाह कराया। जब विवाह के कंस स्वयं देवकी और वसुदेव को उनके घर पहुंचाने के लिए रथ लेकर निकला। तभी आकाशवाणी हुई कि जिस बहन को वह इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी की आठवीं संतान कंस के वध का कारण बनेगी। यह सुनकर कंस क्रोधित हो गया और वसुदेव को मारने के लिए आगे बढ़ा।

तब देवकी ने कंस से वसुदेव का जीवन बख्शने की विनती की और वचन दिया कि उनकी जो भी संतान होगी, उसे वह कंस को सौंप देंगी। कंस ने अपनी बहन की बात मान तो ली, लेकिन देवकी और वसुदेव दोनों को कारागार में बंद कर दिया। देवकी और वसुदेव की 7 संतानें हुईं और एक-एक करके उनके मामा कंस ने जन्म लेते ही उन सभी नवजातों की हत्या कर दी। आठवीं संतान के जन्म का समय आया तो कारागार की सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई। इसी दौरान गोकुल में नंद की पत्नी यशोदा भी संतान को जन्म देने वाली थीं।

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात को देवकी ने भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण को जन्म दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार उस समय भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में देवकी और वसुदेव के सामने प्रकट हुए। उन्होंने बताया कि वे मानव रूप में अवतार लेकर कंस के अत्याचार का अंत करने आए हैं और वसुदेव से उन्हें गोकुल में नंद-यशोदा के पास छोड़ आने को कहा।

इसके बाद भगवान ने नवजात शिशु का रूप धारण कर लिया। उसी समय कारागार के पहरेदार मूर्छित हो गए और उसके द्वार अपने आप खुल गए। वसुदेव बालक कृष्ण को सूप में रखकर गोकुल की ओर चल पड़े। भारी बारिश के चलते उस समय यमुना नदी उफान पर थी। वसुदेव जब बालक कृष्ण को लेकर यमुना में उतरे, तब भगवान के चरणों का स्पर्श होते ही यमुना का जल शांत हो गया और उनके लिए रास्ता बन गया। वसुदेव गोकुल पहुंचे और नंद के घर जाकर बालक कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया। इसके बदले वे वहां जन्मी कन्या को लेकर मथुरा के कारागार में लौट आए।

प्रात: काल में जब कंस को देवकी के आठवें बच्चे के जन्म की सूचना मिली, तो वह अत्यंध क्रोध में धधकता हुआ उस शिशु की हत्या करने कारागार पहुंच गया। निर्मम कंस ने कन्या को देवकी की गोद से छीनकर उसे पत्थर पर पटकने का प्रयास किया, लेकिन वह कन्या उसके हाथ से निकलकर आकाश की ओर चली गई। उसने कंस को चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है और गोकुल में नंद के घर पहुंच चुका है।

कृष्ण ने किया अत्याचारी कंस का अंत

आकाशवाणी सुनकर कंस और अधिक क्रोधित हो गया। उसने कृष्ण को मारने के लिए कई राक्षसों को भेजा, लेकिन सभी के प्रयास विफल रहे। आगे चलकर युवा अवस्था में श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और मथुरा के लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। भगवान कृष्ण ने अपने जीवन में अनेक लीलाएं कीं और महाभारत में अर्जुन को गीता का उपदेश देकर संसार को धर्म और कर्म का मार्ग दिखाया।

न-धान्य के लिए: जन्माष्टमी की रात को लड्डू गोपाल का केसर मिले दूध से अभिषेक करें। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है।
बांसुरी का उपाय: भगवान कृष्ण को बांसुरी बेहद प्रिय है। इस दिन राधा-कृष्ण मंदिर में चांदी या बांस की एक सुंदर बांसुरी अर्पित करें। करियर और कारोबार में लाभ होगा।
पीले वस्त्र व भोग: कान्हा को पीले वस्त्र पहनाएं और उन्हें पीले रंग की मिठाई या पंजीरी के साथ तुलसी दल का भोग लगाएं। इससे भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान “क्लीं कृष्णाय नमः” या “ह्रीं क्लीं कृष्णाय नमः” मंत्र की कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें।

जन्माष्टमी पर इन अभिलेखों का होगा भाग्योदय

वृषभ राशि

जन्माष्टमी के दिन वृषभ राशि पर श्रीकृष्ण की विशेष कृपा बरसाने वाली है। इस दिन चंद्रमा आपकी राशि में उच्च रहेगा। श्रीकृष्ण की भक्ति, प्रेम, सौंदर्य, आकर्षण और संगीत के प्रतीकों से संबंधित मंदिर, जो शुक्र ग्रह से संबंधित है। जन्माष्टमी पर आपको विशेष लाभ मिल सकता है। शुक्र चंद्रमा और अटके हुए कार्य को पूरा करने में सहायक साबित होंगे। रिश्तों से लाभ हो सकता है और परिवार में कोई मांगलिक कार्य हो सकता है।

उपाय- जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को बांसुरी बांधें और चांदी के रंग का वस्त्र पहनाएं।

2. कर्क राशि

पौराणिक कथाओं में श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में बताया गया है। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं, इसलिए जन्माष्टमी पर कर्क राशि के जातकों की मानसिक शांति और संतुलन में वृद्धि होगी। कला क्षेत्र से जुड़े लोगों को हो सकता है लाभ।

उपाय- जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री का भोग लगाएं और कान्हा को सफेद वस्त्र पहनाएं।

3. तुला राशि

जन्माष्टमी पर शुक्र अपनी स्वराशि तुला में रहेंगे और मंगल के साथ नवपंचम योग बनेगा। इन शुभ योग से तुला राशि वालों के भौतिक सुख-सुविधा में वृद्धि होगी। आर्थिक स्थिति में पहले से सुधार होगा और बिजनेस में नई-नई डील मिल सकती है।

उपाय- जन्माष्टमी पर कच्चा दूध और गंगाजल से लोध गोपाल का अभिषेक करें।

4. राशि

जन्माष्टमी पर ग्रह-नक्षत्रों से बनने वाला योग धनु राशि वालों के लिए भी सिद्ध होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और व्यापार में लाभ होगा। वैवाहिक जीवन में प्यार और संत सुख की प्राप्ति के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को रेस्टॉरेंट मिल में मिल सकता है।

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