25 सितंबर 2026, शुक्रवार,अनंत चतुर्दशी,गणेश विसर्जन अनंत सूत्र 14 कपड़ों वाला धागा क्यों बांधा जाता है? बगला मुखी साधिका द्वारा 27 सितंबर को प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी प्रस्थान

25 सितंबर 2026, शुक्रवार सूर्योदय: सुबह 06:11 बजे सूर्यास्त: शाम 06:07 बजे अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन: 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी का व्रत और गणेश उत्सव का समापन व मुख्य गणपति विसर्जन किया जाएगा। विसर्जन के लिए सुबह, दोपहर और शाम को शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध हैं & अनंत सूत्र क्या है और 14 कपड़ों वाला धागा क्यों बांधा जाता है?

अनंत चतुर्दशी पर बप्पा की विदाई अनंत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात करीब 11:18 बजे शुरू होगी और 25 सितंबर की रात करीब 11:06 बजे समाप्त होगी हिंदू पंचांग के अनुसार, गणेशोत्सव के दसवें दिन होने वाला मुख्य विसर्जन 25 सितंबर दिन शुक्रवार को किया जाएगा.

अनंत चतुर्दशी की पूजा में सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का ध्यान करना, पूजा सामग्री तैयार करना, अनंत सूत्र की पूजा करना, व्रत कथा सुनना या पढ़ना और आरती करना प्रमुख माना जाता है। अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना का पर्व है। ‘अनंत’ का अर्थ है जिसका कोई अंत नहीं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हुए भक्त जीवन में धर्म, संयम, श्रद्धा और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।

धार्मिक परंपरा में इस दिन अनंत सूत्र धारण करने की भी विशेष मान्यता है। पूजा के बाद हाथ में बांधा जाने वाला यह सूत्र भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की स्मृति और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

इसी दिन गणेशोत्सव का भी समापन होता है। इसलिए महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में Anant Chaturdashi 2026 Maharashtra और गणेश विसर्जन विशेष रूप से चर्चा में रहता है। मुंबई के पंचांग में भी 25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी दोनों दर्ज हैं। अनंत चतुर्दशी को भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार भगवान विष्णु सृष्टि के कर्ता और उनके अनंत स्वरूप समय के अनुयायी हैं, सृष्टि और ब्रह्मांड की एकता का प्रतीक माने जाते हैं।

इस दिन भक्त भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा करते हैं। पंचामृत, फूल, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य जलते हैं। इसके बाद अनंत चतुर्दशी व्रत कथा का श्रवण किया जाता है। पूजा के अंत में भगवान विष्णु से परिवार में सुख-शांति, सद्बुद्धि और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रार्थना की जाती है।

अनंत चतुर्दशी की पूजा में अनंत सूत्र का विशेष स्थान है। सामान्य तौर पर इसे लाल या केसरिया रंग के चश्मे से तैयार किया जाता है और इसमें 14 रंगीन कपड़े मिलते हैं। धार्मिक परंपरा में इन 14 आंतों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। इस सूत्र को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है। पूजा के दौरान पहले अनंत सूत्र को भगवान के सामने लाकर उनकी पूजा की जाती है। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार इसे कायम रखा गया। अनंत सूत्र को केवल धागा न लक्ष्य श्रद्धा, संकल्प और भगवान विष्णु के स्मरण के प्रतीक के रूप में देखना चाहिए।

अनंत चतुर्दशी की पूजा में अनंत सूत्र का विशेष स्थान है। सामान्य तौर पर इसे लाल या केसरिया रंग के चश्मे से तैयार किया जाता है और इसमें 14 रंगीन कपड़े मिलते हैं।

धार्मिक परंपरा में इन 14 आंतों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। इस सूत्र को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है।

पूजा के दौरान पहले अनंत सूत्र को भगवान के सामने लाकर उनकी पूजा की जाती है। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार इसे कायम रखा गया। अनंत सूत्र को केवल धागा न लक्ष्य श्रद्धा, संकल्प और भगवान विष्णु के स्मरण के प्रतीक के रूप में देखना चाहिए।

25 सितंबर 2026 को भगवान विष्णु की पूजा के दौरान भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

सरल मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।”

इसके अलावा भगवान विष्णु के मंदिर का स्मरण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ या विष्णु स्तुति भी की जा सकती है।

मंत्र जाप का उद्देश्य मन को पूजा में एकाग्र करना और भगवान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है। यदि आपको कोई विशेष मंत्र का जाप प्राप्त हुआ है, तो वही गुरु-परंपरा के मंत्र का जाप करना माना जाता है।

  • अनंत चतुर्दशी की कथा में सुमंत, उनकी पत्नी दीवा, पुत्री सुशीला और ऋषि कौंडिन्य का प्रसंग है। कथा के अनुसार सुशीला ने अनंत भगवान की पूजा करके अनंत सूत्र धारण किया था।
  • बाद में ऋषि कौंडिन्य ने उस सूत्र के महत्व को बिना बताए समझा दिया। इसके बाद उनके जीवन में कई कठिनाइयां आईं। जब उन्हें अनंत भगवान की पूजा का महत्व समझा गया, तब उन्होंने भगवान की आराधना की।
  • एक अन्य प्रसिद्ध परंपरा में पांडवों के वनवास से भी अनंत व्रत जोड़ा जाता है। धार्मिक अनुयायियों का उद्देश्य भक्तों में श्रद्धा, धैर्य, संयम और भगवान के प्रति विश्वास का भाव विकसित होना है।
  • इसलिए अनंत चतुर्दशी 2026 पर कथा प्रवचन या वाचन पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
  • LEFT HAND ; JORGE FERNADISE ; EX DEFENCE MINISTER;; COMING MY RESIDENCE ; CHANDRA SHEKHAR JOSHI

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