शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026, रविवार, हनुमान जी को चोला चढ़ाने से संकट, भय और बाधाएं दूर & चोला चढ़ाना एक अत्यंत पवित्र और मनोकामना पूर्ण करने वाला अनुष्ठान

साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा के साथ-साथ घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। नवरात्रि के आरंभ पर हनुमान जी को चोला चढ़ाने से जीवन के सारे संकट, भय और बाधाएं दूर & माता दुर्गा के साथ-साथ बजरंगबली की भी असीम कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। & हनुमान जी को चोला चढ़ाना एक अत्यंत पवित्र और मनोकामना पूर्ण करने वाला अनुष्ठान & मनोकामना पूर्ति: नियमित या विशेष अवसरों पर चोला चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ग्रह दोष शांति: इससे कुंडली में मंगल ग्रह का दोष (Mangal Dosha) और शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के कष्ट कम होते हैं। नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। &

हनुमान जी को भेट दक्षिणा 3100 और पीठ के साधक की दक्षिणा, वस्त्र, आदि अलग से दी जाती है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाना (Hanuman Chola) और विशेष श्रृंगार करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। & उदयातिथि के अनुसार घटस्थापना रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय के बाद सुबह के शुभ मुहूर्त में &

योध्या हनुमानगढ़ी विशेष आयोजन: नवरात्रि के पहले दिन प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर (अयोध्या) में सुबह 06:00 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक विशेष चोला श्रृंगार (Chola Shringar) और निरंतर हनुमान चालीसा का पाठ & हनुमान जी को चोला चढ़ाने की योजना बना रहे हैं, तो

हनुमान जी के चोले के लिए मुख्य रूप से चमेली का तेल, शुद्ध सिंदूर (नारंगी रंग का), चांदी का वर्क, एक जनेऊ, और लाल रंग का वस्त्र या लंगोट & हनुमान जी की मूर्ति को गंगाजल या साफ जल से स्नान कराएं। इसके बाद चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी के पूरे विग्रह (मूर्ति) पर अनामिका उंगली से लेप (चोला) & चोला चढ़ाने के बाद हनुमान जी को जनेऊ पहनाएं और लाल रंग का वस्त्र या लंगोट अर्पित करें। अंत में चांदी का वर्क ।

हनुमान जी को बूंदी के लड्डू या बेसन के लड्डू का भोग& और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित । इसके बाद हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें और अंत में आरती करें।

2026 में करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। & नए साल 2026 में अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर को मनाई जाएगी। चमेली का तेल या शुद्ध घी और सिंदूर अच्छी तरह मिला लें। साथ ही चोला, चांदी/सोने का वर्क, और इत्र साथ रखें।

अभिषेक: हनुमान जी की प्रतिमा या मूर्ति को गंगा जल से स्नान कराएं।

चोला अर्पण: सबसे पहले हनुमान जी के बाएं पैर से चोला चढ़ाना शुरू करें और धीरे-धीरे पूरे शरीर पर सिंदूर व घी/तेल का लेप लगाएं। श्रृंगार: चोला चढ़ाने के बाद उन पर चांदी या सोने का वर्क लगाएं, इत्र अर्पित करें, और लाल लंगोट पहनाएं।

भोग और आरती: अंत में गुड़-चने या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें।

आवश्यक पूजा सामग्री

अन्य सामग्री: गंगाजल, धूप, दीपक, कपूर, पान, सुपारी, लौंग और इलायची

सिंदूर: हनुमान जी वाला विशेष सिंदूर (लगभग 50 से 125 ग्राम)

चमेली का तेल या शुद्ध घी: सिंदूर घोलने के लिए

चांदी या सोने का वर्क: चोले के ऊपर लगाने के लिए

वस्त्र और जनेऊ: लाल या पीले रंग का नया वस्त्र (लगोट/अंगोछा) और जनेऊ

इत्र व सुगंध: केवड़ा या चमेली का इत्र

प्रसाद: गुड़, चना, बूंदी के लड्डू या मौसमी फल

  1. नियम व पवित्रता: स्नान करने के बाद लाल या पीले रंग के साफ वस्त्र पहनें। [1, 2]
  2. अभिषेक: सबसे पहले मंदिर में घी का दीपक जलाएं। हनुमान जी की प्रतिमा का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें और साफ वस्त्र से पोछें। [1, 2]
  3. सिंदूर का घोल तैयार करें: एक साफ बर्तन में सिंदूर लेकर उसमें चमेली का तेल या गाय का घी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट (घोल) बना लें। [1, 2]
  4. चोला अर्पण की दिशा: श्री राम का नाम लेते हुए हनुमान जी के चरणों से चोला चढ़ाना शुरू करें। सबसे पहले बाएं या दाएं पैर पर नीचे से ऊपर की ओर लेप लगाएं, फिर दोनों हाथों और बाकी अंगों पर नीचे से ऊपर की दिशा में चोला चढ़ाएं। [1, 2]
  5. श्रृंगार: चोला चढ़ाने के बाद चांदी या सोने का वर्क लगाएं। इसके बाद उन्हें इत्र, नया वस्त्र (लगोट) और जनेऊ अर्पित करें। [1, 2, 3]
  6. भोग व आरती: हनुमान जी को गुड़-चना या लड्डुओं का भोग लगाएं। अंत में हनुमान चालीसा का पाठ करें और कपूर जलाकर आरती करें। [1, 2, 3]

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