18 अक्टूबर विशेष- शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन, आज के दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाएगी साथ ही कुछ लोग कन्या पूजन भी

18 अक्टूबर 2026, रविवार आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी सुबह 08:28 AM तक, इसके बाद अष्टमी & 18 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है जोकि सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगी और उसके बाद अष्टमी लग जाएगी। रविवार के दिन माता दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाएगी। इसके साथ ही कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करेंगे। रविवार 18 अक्टूबर के दिन सुकर्मा योग भी रहेगा।
- विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
- नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा (दोपहर 12:48 PM तक, उपरांत उत्तराषाढ़ा)
- योग: सुकर्मा (रात 11:55 PM तक, उपरांत धृति)
- करण: वणिज (सुबह 08:28 AM तक), विष्टि (रात 09:42 PM तक), बव
- चन्द्रमा: धनु राशि (रात 07:33 PM तक, उपरांत मकर राशि)
- सूर्योदय/सूर्यास्त: सूर्योदय सुबह 06:28 AM, सूर्यास्त शाम 05:55 PM
- राहुकाल: शाम 04:29 PM से 05:55 PM तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:49 AM से दोपहर 12:34 PM
- ह्म मुहूर्त- 04:45 ए एम से 05:35 ए एम
- प्रातः संध्या- 05:10 ए एम से 06:25 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:47 ए एम से 12:33 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 05:54 पी एम से 06:19 पी एम
- सायाह्न संध्या- 05:54 पी एम से 07:09 पी एम
- सूर्योदय- सुबह 06:22 बजे
- सूर्यास्त- शाम 05:48 बजे
- नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी की पूजा करने से कष्ट और दुखों से मुक्ति मिलती है और साथ ही शत्रुओं पर भी व्यक्ति विजय प्राप्त करता है। इसके साथ ही विवाह में आ रही अड़चनों से भी मुक्ति माता महागौरी दिला सकती है। अष्टमी तिथि की पूजा से राहु ग्रह भी नियंत्रित होता है क्योंकि माता महागौरी, राहु ग्रह की नियंत्रक हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:45 ए एम से 05:35 ए एम
- प्रातः संध्या- 05:10 ए एम से 06:25 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:47 ए एम से 12:33 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 05:54 पी एम से 06:19 पी एम
- सायाह्न संध्या- 05:54 पी एम से 07:09 पी एम
पंचांग की बात करें तो द्रिक पंचांग अनुसार, दुर्गा अष्टमी यानी महा अष्टमी का पावन पर्व 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। जबकि कुछ पंचागों और ज्योतिषियों का ये मानना है कि ये पावन पर्व 18 अक्टूबर को भी मनाया जा सकता है। दरअसल नवरात्रि की अष्टमी पर रात्रि पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। अगर इस दृष्टि से देखें तो ये पावन पर्व 18 अक्टूबर को ही मनाया जाना चाहिए। वहीं जो लोग उदया तिथि को महत्व देते हैं वे इस पर्व को 19 अक्टूबर को मनाएंगे। लेकिन आपको बता दें कि इस बार अष्टमी दोनों ही दिन रहने के कारण आप अपनी सुविधानुसार 18 या 19 अक्टूबर किसी भी दिन ये पावन पर्व मना सकते हैं।
महा अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 08:27 से शुरू होकर शाम 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। आप इस बीच अपनी सुविधानुसार कभी भी कन्या पूजन कर सकते हैं। वहीं अगर कन्या पूजन के सबसे शुभ मुहूर्त की बात करें तो सुबह 10.30 बजे से पहले का समय कन्या पूजन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
महा अष्टमी 18 अक्टूबर 2026 हवन पूजन मुहूर्त
महा अष्टमी पर हवन पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। हवन से पहले माता महागौरी की विधि विधान पूजा करें। उन्हें हलवा, पूरी और चने का भोग लगाएं। फिर परिवार सहित हवन पूजन करें। हवन के लिए अभिजीत मुहूर्त का समय भी सबसे शुभ माना जाता है।
नवमी हवन 19 या 20 अक्टूबर किसी भी दिन किया जा सकता है क्योंकि नवमी तिथि दोनों ही दिन रहने वाली है। बता दें 19 अक्टूबर को नवमी सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी।
नवमी हवन मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026
इस दिन नवमी हवन पूजन का शुभ मुहूर्त 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस बीच आप अपनी सुविधानुसार कभी भी हवन अनुष्ठान पूर्ण कर सकते हैं। हवन के बाद कन्या पूजन जरूर करें।
नवमी हवन मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026
20 अक्टूबर को नवमी हवन का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। अगर 19 तारीख को किसी कारण हवन पूजन का समय न मिले तो आप 20 अक्टूबर को ये अनुष्ठान कर सकते हैं। लेकिन ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज के अनुसार, नवरात्रि हवन के लिए 19 तारीख का समय ज्यादा शुभ है।
क्या अष्टमी को हवन पूजन कर सकते हैं?
नवरात्रि की अष्टमी को भी हवन पूजन किया जा सकता है। अगर आप अष्टमी 18 अक्टूबर को मना रहे हैं तो इस दिन हवन का शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। जो लोग 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाएंगे उनके लिए हवन का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।