2026; सप्तमी 17, महाअष्टमी 18 अक्टूबर ;19 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक, नवमी तिथि 19 अक्टूबर सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर, मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक

17 अक्टूबर विशेष-  शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन, सप्तमी पूजा, मां कालरात्रि पूजा, सूर्य गोचर &  शारदीय नवरात्र में महाष्टमी का विशेष महत्व है. इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है. अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी & कन्या पूजन 19 अक्टूबर को अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार यह अनुष्ठान कर सकते हैं. शारदीय नवरात्र में महानवमी 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि सुबह 10 बजकर 51 मिनट के आसपास समाप्त होने के बाद नवमी तिथि शुरू होगी. इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.

17 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और शनिवार का दिन है। सप्तमी तिथि शनिवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के रविवार सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। 17 अक्तूबर को नवरात्रि का सातवां दिन रहेगा। शनिवार को सुबह 9 बजकर 4 मिनट तक रवि योग रहेगा। साथ ही 17 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा, उसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र लग जायेगा। इसके अलावा 17 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 50 मिनट पर सूर्य तुला राशि में गोचर करेंगे। सूर्योदय- सुबह 06:22 बजे  सूर्यास्त- शाम 05:49 बजे

ब्रह्म मुहूर्त- 04:55 ए एम से 05:44 ए एम प्रातः संध्या- 05:19 ए एम से 06:33 ए एम अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:47 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 06:14 पी एम से 06:39 पी एम सायाह्न संध्या- 06:14 पी एम से 07:28 पी एम 

सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को सुबह से शुरू होकर 18 अक्टूबर, रविवार को सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। चूंकि 17 अक्टूबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि प्राप्त हो रही है, इसलिए सप्तमी का व्रत 17 अक्टूबर 2026 को रखना उत्तम और मान्य होगा।

नवरात्रि के दौरान पड़ने वाली सप्तमी को महासप्तमी के नाम से जाना जाता है। आज के दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जायेगी। आपको बता दें कि जब माता पार्वती ने शुंभ-निशुंभ नामक दैत्यों का अत्याचार समाप्त करने के लिए अपने स्वर्णिम वर्ण को त्याग दिया था, तब उन्हें कालरात्रि के नाम से जाना गया।

महाअष्टमी तिथि: अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से आरंभ होगी और 19 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और अधिकांश पंचांगीय गणना के अनुसार महाअष्टमी की पूजा व कन्या पूजन 19 अक्टूबर 2026 को करना श्रेष्ठ माना गया है,

नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर, मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इसलिए महानवमी और हवन 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को ही दोपहर बाद दशमी और विजया दशमी (दशहरा) का पर्व होगा।

नवमी हवन 19 या 20 अक्टूबर किसी भी दिन किया जा सकता है क्योंकि नवमी तिथि दोनों ही दिन रहने वाली है। बता दें 19 अक्टूबर को नवमी सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। 

नवमी हवन मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026

इस दिन नवमी हवन पूजन का शुभ मुहूर्त 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस बीच आप अपनी सुविधानुसार कभी भी हवन अनुष्ठान पूर्ण कर सकते हैं। हवन के बाद कन्या पूजन जरूर करें।

नवमी हवन मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026

20 अक्टूबर को नवमी हवन का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। अगर 19 तारीख को किसी कारण हवन पूजन का समय न मिले तो आप 20 अक्टूबर को ये अनुष्ठान कर सकते हैं। लेकिन ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज के अनुसार, नवरात्रि हवन के लिए 19 तारीख का समय ज्यादा शुभ है।

नवरात्रि की अष्टमी को भी हवन पूजन किया जा सकता है। अगर आप अष्टमी 18 अक्टूबर को मना रहे हैं तो इस दिन हवन का शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। जो लोग 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाएंगे उनके लिए हवन का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *