27 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। जिसे रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि पर आर्द्रा नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त 12:03 − 12:50 मिनट तक रहेगा & 27 फरवरी 2026, शुक्रवार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि है, जिसे आंवला एकादशी और रंगभरी ग्यारस के रूप में मनाया जाता है। दिन में आयुष्मान योग और सर्वार्थसिद्धि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं, जो नए कार्यों के शुभारंभ के लिए उत्तम माने गए हैं। & मार्च 2026 में प्रदोष व्रत तीन बार पहला प्रदोष व्रत- 1 मार्च 2026 (रवि प्रदोष) शाम 6 बजकर 21 मिनट से 7 बजकर 08 मिनट तक. दूसरा प्रदोष व्रत- 16 मार्च 2026 (सोम प्रदोष) शाम 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 54 मिनट तक. तीसरा प्रदोष व्रत- 30 मार्च 2026 (सोम प्रदोष) शाम 6 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 57 मिनट तक.
आंवले के पेड़ के तने पर 7 बार कच्चा सूत लपेटें और घी का दीपक जलाएं
और बगलामुखी साधना आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और माँ बगलामुखी की साधना—दोनों ही पीले रंग (Yellow) पर केंद्रित हैं। एकादशी पर विष्णु जी को पीला वस्त्र और प्रसाद चढ़ाया जाता है, और माता बगलामुखी (पीताम्बरा) की पूजा भी पीले रंग से ही की जाती है। आमलकी एकादशी पर एकाग्रता के साथ की गई विष्णु भक्ति ही आगे चलकर साधना की दिशा में सहायक होती है।
By Chandra Shekhar Joshi ; Bagula Mukhi peeth Dehradun 9412932030

आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु को पीले पुष्प और आंवला अर्पित करें। आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करें या आंवले का सेवन करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। आवंला, रंगभरनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल की आमलकी एकादशी पर रवि योग, आयुष्मान के साथ कई शुभ योगों का निर्माण
साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही पद-प्रतिष्ठा, यश और कीर्ति में बढ़ोतरी होती है। इस शुभ अवसर पर पूजा, जप-तप और दान-पुण्य (Vrat Benefits 2026) किया जाता है। अगर आप भी लक्ष्मी नारायण जी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो आमलकी एकादशी पर पूजन के साथ इन चीजों का दान करें। आमलकी एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र का दान करें। उड़द दाल का दान मकई और चने की दाल का दान करें। गेहूं का दान करें। चावल और आटा का दान & गन्ने का रस राहगीरों को पिलाएं। गुड़ और मूंगफली का दान दही और चीनी का दान मूंग दाल या साबुत मूंग का दान करें। चावल और आटा का दान करें। मसूर दाल का दान करें।

विष्णु पूजा में शंख का विशेष महत्व है। आमलकी एकादशी के दिन दक्षिणावर्ती या सामान्य शंख में कच्चा दूध और गंगाजल भरकर भगवान विष्णु या शालिग्राम का अभिषेक करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान शंखनाद करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। श्रद्धा और मंत्र जप के साथ किया गया यह उपाय बहुत फायदेमंद बताया गया है।
हिंदू धर्म में हर शुभ काम तिथि के अनुसार किए जाते हैं। शुभ तिथियों का विशेष महत्व माना जाता है। इन्हीं शुभ तिथियों में से एक होती है एकादशी, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी (आंवला) एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीहरि आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं, इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ और फल की पूजा का विशेष महत्व है। विधि-विधान से पूजा करने पर हजार गायों के दान के बराबर पुण्यफल मिलता है। इस शुभ तिथि पर किए जाने वाले कुछ उपाय व्यक्ति के जीवन से सारे कष्ट दूर करने में सहायक माने जाते हैं।

शुक्रवार को आमलकी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन एकादशी तिथि रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। 27 फरवरी को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है जिसे आमलकी एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। खास बात ये है कि इस शुभ तिथि पर दो शुभ योग भी बन रहे हैं। रवि योग सुबह 06:48 से प्रारंभ हो जाएगा तो सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:48 से शुरू होगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:57 बजे तक रहेगा।
घी, खीर या दूध व चावल से बने खाने का सेवन करके, शुभ शगुन लेकर यात्रा प्रारम्भ करें। 27 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। जिसे रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि पर आर्द्रा नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त 12:03 − 12:50 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष में अभिजीत मुहूर्त को बहुत ही शुभ माना जाता है। राहुकाल सुबह 11:00 − 12:26 मिनट तक रहेगा।

भगवान विष्णु को तुलसी दल अत्यंत प्रिय हैं। किसी भी एकादशी व्रत में तुलसी पत्र चढ़ाने से कई गुना अधिक पुण्य मिलता है। आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ के पास तुलसी जी के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर श्रद्धा से इस मंत्र “महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।” का जाप करने से श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और साधन की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
भगवान विष्णु को पीला चंदन और गोपी चंदन अत्यंत प्रिय है। आमलकी एकादशी के दिन भगवान को चंदन से ऊर्ध्वपुंड्र तिलक लगाना चाहिए। पूजा के बाद उसी चंदन को अपने माथे पर लगाने से सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। मान्यता है कि यह उपाय जीवन के कष्टों को दूर कर भाग्य को प्रबल बनाता है।

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 फरवरी को पड़ रही है, जिसे आमलकी या आंवला एकादशी के नाम से जाना जाता है। फाल्गुन महीने में आने के कारण यह हिंदी पंचांग की अंतिम एकादशी मानी जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा का विधान है और साथ ही आंवले के दान को भी अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर अनेक यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है।
- श्रीकृष्ण के साथ गौ माता की पूजा करना और किसी गौशाला में सेवा या दान देना भी पुण्यदायक माना गया है।
- मंदिर में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, चंदन, पुष्प, मिठाई, तेल-घी या वस्त्र आदि का दान करना शुभ फलदायी होता है।
- इस दिन आंवले का सेवन अवश्य करना चाहिए, चाहे फल के रूप में हो या रस के रूप में। आंवले का दान भी विशेष महत्व रखता है।
- इसके अतिरिक्त माता अन्नपूर्णा की पूजा कर जरूरतमंद लोगों को अन्न दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा के साथ आंवले के पेड़ का पूजन करना अनिवार्य माना गया है। हिंदू धर्म में आंवला वृक्ष को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन आंवले का सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और रोगों से रक्षा होती है।
आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। पूजा में आंवले का फल अर्पित करना शुभ माना गया है। अगर संभव हो तो इस दिन आंवले का पौधा लगाएं या उसका दान करना भी बहुत पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन के दोष दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
- इस दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक अवश्य जलाना चाहिए।
- भगवान विष्णु की पूजा करते हुए “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करना शुभ माना गया है।
- भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक कर “कृं कृष्णाय नम:” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।
- प्रातःकाल उठकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- स्नान के बाद विधिपूर्वक विष्णु पूजा करें और दीप प्रज्वलित कर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- पूजा के उपरांत आंवले के वृक्ष के नीचे कलश स्थापित करें और धूप, दीप, चंदन, रोली, अक्षत तथा पुष्प अर्पित कर पूजन करें।
- इसके बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं।
- अगले दिन स्नान और पूजा के पश्चात कलश, वस्त्र तथा आंवला दान करें और फिर व्रत का पारण कर भोजन ग्रहण करें।
- श्रद्धा और नियम के साथ किया गया यह व्रत विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है।