HIMALAYAUK LEADING NEWSPORTAL & YOUTUBE CHANNEL & DAILY NEWSPAPER
और आज से अजय सिंह बिष्ट ख़त्म हो गया: आसमानी शक्तियां: एक दैवीय, अलौकिक शक्ति है यह वो शक्तियां हैं जो मनुष्य को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करती हैं, उसका साथ देती हैं और उसकी सहायता करती हैं। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI 9412932030
अदभुत एक्सक्लूसिव
आसमानी शक्तियों ने अजय बिष्ट को अकूत शक्तियों से संपन्न कर बना दिया योगी आदित्यनाथ: अदभुत शक्ति संपन्न योगी आदित्यनाथ, यशस्वी आदित्यनाथ
चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक बगला बगला मुखी पीठ देहरादून & मुख्य संपादक हिमालयायूके न्यूज: की कलम से (विशेष: ,,,,पितृपक्ष के दौरान आसमानी शक्ति से ब्रह्म मुहूर्त में कुछ भी मांगा तो पूर्ण होगा,, पर ध्यान रहे,,,
संन्यास के बाद घर वालों से मोह त्याग कर पूरी तरह संन्यासी का जीवन जीने वाले योगी आदित्यनाथ ने संन्यास के बाद पिता को सूचना देने के लिए पोस्टकार्ड का सहारा लिया. सन्यास के बाद पोस्ट कार्ड में योगी ने लिखा कि ‘आज से अजय सिंह बिष्ट ख़त्म हो गया
उत्तराखंड के पौड़ी ज़िले के पंचुर गांव में वन विभाग में काम करने वाले आनंद सिंह बिष्ट और सावित्री देवी के 7 बच्चे हैं. इसमें तीसरे बेटे का नाम अजय बिष्ट था. गांव में रहने वाले अजय सिंह बिष्ट पढ़ने में तेज़ थे तो उन्होंने इंटर के बाद ग्रजुऐशन और पोस्ट ग्रेजुऐशन किया. पढ़ाई के दौरान वो पंचुर के पास कांडी गांव के रहने वाले संत महंत अवैद्यनाथ के सम्पर्क में आये. अवैद्यनाथ महाराज गोरखपुर के गोरखनाथ मठ के महंत थे और उन्हें एक योग्य उत्तराधिकारी की तलाश थी.
इसी बीच अजय सिंह बिष्ट के व्यवहार और तेज़ से प्रभावित होकर महंत अवैद्यनाथ ने अजय सिंह बिष्ट को साथ चलने को कहा. जीवन के मायने समझने और संन्यास से प्रभावित होकर अजय सिंह बिष्ट महंत अवैद्यनाथ के साथ चल पड़े. अजय ने घर में मां को तो इस बात का इशारा कर दिया लेकिन पिता से कहा कि वो नौकरी करने जा रहे हैं. गोरखपुर जाकर जब संन्यास लेने का फ़ैसला अजय सिंह बिष्ट ने कर लिया तब तक पिता इस फ़ैसले से अनभिज्ञ थे. अपने गुरु से दीक्षा लेने के बाद उनका नाम पड़ा ‘योगी आदित्यनाथ’.
पोस्ट कार्ड पाकर पिता परेशान हुए, मां फूट-फूटकर रोईं और घरवाले बेहद दुखी हो गए.
पिता को लगता था कि उनका बेटा पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बनेगा लेकिन उसने ये कैसा फ़ैसला कर लिया. घर से मोह त्याग कर एक संन्यासी बनकर कैसे रहेगा. माँ सावित्री देवी को भी बेटे का अलगाव सता रहा था. घरवालों को अगर किसी बात की संतुष्टि थी तो इस बात की कि उनका अजय जो अब योगी बन गया है वो महंत अवैद्यनाथ जी के सानिध्य में है.
इसके बाद गोरखपुर से जब योगी आदित्यनाथ ने 26 साल की उम्र में चुनाव लड़कर संसद का रास्ता तय किया तो परिवार बेहद खुश था.