BJP का 243 सीटों वाला इंटर्नल सुपरसर्वे, पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिन मौजूदा विधायकों का परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं पाया गया है, उनका टिकट कटना तय – भाजपा ने आगामी चुनाव के लिए टॉप स्ट्राइक रेट मिशन तैयार – कमजोर विधायकों को हटाकर ऐसे नए चेहरों को मौका देना है, जो जनता से जुड़े हों और जमीन पर एक्टिव हों और चुनाव जीतने की पूरी क्षमता रखते हों। पार्टी ने ब्लॉक स्तर की बैठकें, कार्यकर्ता फीडबैक और पिछले चुनावी आंकड़ों के आधार पर ये मूल्यांकन किया है।
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भाजपा ने सिर्फ अपने घर की सफाई नहीं की है, बल्कि विपक्षी दलों और पाला बदलने वाले नेताओं की भी सीट-दर-सीट समीक्षा की है। इससे पार्टी को हर सीट पर बूथ से लेकर उम्मीदवार तक की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन में बड़ा बदलाव जल्द ही देखने को मिल सकता है। लंबे समय से चल रही इंतजार के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नए चुनाव की प्रक्रिया जून के मध्य से शुरू होने वाली है। लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों के बाद अब बीजेपी अपने संगठन को नई दिशा देने के लिए तैयार है। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि पार्टी नेतृत्व में बड़े बदलाव संभव हैं, जो आने वाले वर्षों में बीजेपी की रणनीति को नया आकार देंगे।
जानकारी के मुताबिक, जून के दूसरे हफ्ते में चुनाव प्रक्रिया की आधिकारिक अधिसूचना जारी हो सकती है, जिसके बाद राज्यों में संगठनात्मक चुनाव होंगे और अंततः राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव संपन्न होगा। इस प्रक्रिया में नामांकन, जांच और मतदान जैसी पारदर्शी गतिविधियां शामिल होंगी, ताकि पार्टी के संविधान का पूर्ण पालन किया जा सके।
नए अध्यक्ष के सामने रहेंगी ये चुनौतियां
वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल पहले ही लोकसभा चुनाव तक बढ़ाया गया था, लेकिन अब चुनाव पूरी तरह से खत्म होने के बाद यह साफ हो जाएगा कि वह फिर से उम्मीदवार होंगे या पार्टी किसी नए चेहरे को मौका देगी। नए अध्यक्ष के सामने न केवल 2026 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी होगी, बल्कि पार्टी की संगठनात्मक मजबूती को भी बढ़ाना होगा। पार्टी के अंदर यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इससे कार्यकर्ताओं की भागीदारी भी बढ़ेगी और संगठन की जमीनी पकड़ मजबूत होगी। फिलहाल बीजेपी ने इस प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा तो नहीं की है, लेकिन अंदरूनी तैयारियों से साफ है कि पार्टी इस चुनाव को समय पर पूरा करना चाहती है। जून के अंत तक तय होने वाला यह चुनाव न सिर्फ बीजेपी के भविष्य की दिशा तय करेगा, बल्कि देश की राजनीति पर भी गहरा असर डालने वाला माना जा रहा है। नेता हों या कार्यकर्ता, सभी की निगाहें इस अहम बदलाव पर टिकी हैं।
भाजपा ने साफ कर दिया है कि टिकट वितरण में वरिष्ठता या नजदीकी नहीं, बल्कि वोटर कनेक्शन और जीतने की क्षमता सबसे अहम होगी। यानी चाहे कोई कितना भी पुराना नेता क्यों न हो, अगर परफॉर्मेंस कमजोर है तो टिकट की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी ने विधायकों के परफॉर्मेंस की गहराई से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। इस सर्वे से साफ हो गया है कि भाजपा इस बार जीत को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। जिन मौजूदा विधायकों का परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं पाया गया है, उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है। खासकर वे विधायक जो सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं लेकिन ग्राउंड पर जीरो वर्क कर रहे हैं, उन्हें भी इस बार बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। भाजपा का मानना है कि जनता अब फील्ड वर्क देखती है, सिर्फ डिजिटल प्रचार से बात नहीं बनने वाली।
पार्टी को इस बात का भी अहसास है कि टिकट कटने से कुछ नेता बगावत या पाला बदल सकते हैं। इसलिए भाजपा पहले से ही ऐसे नेताओं की पहचान कर डैमेज कंट्रोल* की रणनीति बना रही है। पार्टी चाहती है कि किसी भी तरह का असंतोष चुनावी तैयारियों पर असर न डाले।