1 नवंबर 2025 1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी व्रत, 1 नवंबर 2025 के अनुसार ग्रहों की चाल कुछ राशियों के लिए नई शुरुआत

1 नवंबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। इस तिथि पर शतभिषा नक्षत्र और ध्रुव योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें शनिवार को अभिजीत मुहूर्त 11:42-12:26 मिनट तक रहेगा। राहुकाल सुबह 09:19-10:41 मिनट तक रहेगा। & भद्रा/देवप्रबोधिनी एकादशी व्रत (स्मार्त)/देवउठनी ग्यारस यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI EDITOR 9412932030

 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी व्रत रखा जाएगा.
देव उठनी एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 08:14 बजे से लेकर 10:08 बजे तक होगा. इस मुहूर्त में विष्णु जी की पूजा की जाएगी.

शनिवार का दिन यानी 1 नवंबर 2025 का दिन अति शुभ और सकारात्मक है. शनिवार को शनिदेव और हनुमान जी की पूजा करने का विधान है. इस दिन जो भी भक्त हनुमान जी की पूजा करते हैं उन्हें दुखों से छुटकारा मिलता है, शनि दोष से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. हनुमान जी की शनिवार के दिन पूजा करने से कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति संतुलित होती है. शनिवार का दिन शनि  से शुरू होता है जो कर्मफल और न्याय के कारक ग्रह हैं.

1 नवंबर 2025 को तिथि- कार्तिक शुक्ल दशमी तिथि सुबह 09:12 तक, इसके बाद एकादशी.
1 नवंबर 2025 को वार शनिवार है.
1 नवंबर 2025 को नक्षत्र शतभिषा शाम 06:20 बजे तक, इसके बाद पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र.
1 नवंबर 2025 को योग- ध्रुव योग रात 02:09, इसके बाद व्याघात योग सुबह 04:1 बजे तक.
1 नवंबर 2025 को करण- गर सुबह  09:12 बजे तक. इसके बाद वणिज रात 08:28 तक, इसके बाद विष्टि.

अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:48 बजे से लेकर दोपहर 12:32 बजे तक.
अमृत मुहूर्त – सुबह 11:17 बजे से लेकर दोपहर 12:51 बजे तक.
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05:00 बजे से लेकर सुबह 05:48 बजे तक. .

i: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह पर्व का बहुत महत्व है. कार्तिक माह में पड़ने वाले इस त्योहार पर बड़ो ही धूमधाम से भगवान शालीग्राम की पूजा आराधना की जाती है. देवउठनी एकादशी पर यानी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से उठते हैं और जगत का पालपोषण फिर से शुरू करते हैं. इस दिन से शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं और फिर इसके अगले दिन द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह किया जाता है जिसें शालीग्राम भगवान के साथ देवी तुलसी का विवाह किया जाता है. भगवान विष्णु के स्वरूप श्री शालिग्राम भगवान और तुलसी देवी का शुभ विवाह करते हुए पूजा उपासना की जाती है और इस दिन लोग व्रत का संकल्प भी करते हैं. इस दिन तुलसी जी के साथ भगवान शालीग्राम की पूजा करते हुए आरती के साथ अनुष्ठान को संपन्न किया जाता है.

॥शालिग्राम भगवान की आरती॥
शालिग्राम सुनो विनती मेरी ।
यह वरदान दयाकर पाऊं ॥

चन्दन धुप दीप तुलसीदल ।
वरन -वरण के पुष्प चढ़ाऊँ ॥

तुम्हरे सामने नृत्य करूँ नित ।
प्रभु घंटा शंख मृदंग बजाऊं ॥

चरण धोय चरणामृत लेकर ।
कुटुंब सहित बैकुण्ठ सिधारूं ॥

जो कुछ रुखा सूखा घर में ।
भोग लगाकर भोजन पाऊं ॥

मन वचन कर्म से पाप किये ।
जो परिक्रमा के साथ बहाऊँ ॥

ऐसी कृपा करो मुझ पर ।
जम के द्वारे जाने न पाऊं ॥

माधोदास की विनती यही है ।
हरी दासन को दास कहाऊं ॥

॥ इति श्री शालिग्राम आरती संपूर्णम् ॥

शालिग्राम भगवान के मंत्र
श्रीविष्णवे नम:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो नारायणाय

शालिग्राम दान करने का मंत्र :
शालग्रामशिला पुण्या भुक्तिमुक्ति प्रदायिनी |
शालग्रामप्रदानेन मम सन्तु मनोरथाः ||
चक्राङ्कितसमायुक्तशालग्रामशिला शुभा |
दानेनैव भवेत्तस्या उभयोर्वाञ्छितं फलं ||

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